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हिमाचल प्रदेश

कोरोना लॉकडाउन : हिमाचल के दूध उत्पादकों के सामने रोजगार बचाने का संकट

Nirmal kant
17 April 2020 1:25 PM GMT
कोरोना लॉकडाउन : हिमाचल के दूध उत्पादकों के सामने रोजगार बचाने का संकट
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दूध बेच कर करते थे गुजारा लेकिन अब लॉकडाउन की वजह से दूध बिक नहीं रहा है। उन्होंने बताया कि कहीं से मदद भी नहीं मिल रही है। भविष्य को लेकर भी चिंतित है। सरकार की मदद की गुहार...

जनज्वार ब्यूरो, शिमला। हिमाचल के चंबा और इसके आस पास के जिलों में दूध उत्पादक गुज्जर भारी आर्थिक बदहाली से दो चार हो रहे हैं। हिमाचल में लगातार लॉकडाउन के चलते वह दूध की सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार दूध से होने वाली आमदनी से ही रोटी खाता था। अब लॉकडाउन की वजह से वह बाहर नहीं निकल पा रहे है। उन्होंने बताया कि सरकार भी उनका दूध नहीं खरीद रही है। यदि वह बाजार में दूध नहीं बेच पा रहे हैं तो कम से कम सरकार को ऐसा प्रावधान करना चाहिए कि उनका दूध सरकारी रेट पर खरीद जाये।

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गुर्जर वेल्फेयर एसोसिएशन के प्रधान हैसनदीन ने बताया कि उनका घुमंतू समुदाय है। जो लगातार मवेशियों को चराता हुआ घूमता रहता है। लेकिन अब उन्हें जंगल में भी नहीं जाने दिया जा रहा है। ऐसे में उनके सामने पशुओं के चारे का भी संकट आ गया है। पहले तो पशु घूमते हुए चर लेते थे। इस तरह से उनका चारे का खर्च बच जाता था। अब न पशु चरने के लिए बाहर जा रहे है। न दूध बिक रहा है। इस तरह से उनके सामने दोहरा संकट आ गया है।

यह भी बताया कि इधर कुछ क्षेत्रों में उनका सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया गया है। यह भी अपने आप में एक बड़ी समस्या है। इससे निजात दिलवाने की दिशा में भी अभी कुछ नहीं हो रहा है। ध्यान रहे हिमाचल के चंबा में ही गुज्जर समुदाय के एक युवक को सामाजिक बहिष्कार की वजह से आत्महत्या करनी पड़ गयी थी। वह एक जमाती से मिल लिया था। हालांकि उसका कोरोना का टेस्ट नेगटिव आया था। इसके बाद भी गांव के लोगों से उससे दूध नहीं लिया। इससे तंग आकर उसने यह कदम उठाया था।

मुदाय के लोगों ने सरकार से मांग की कि एक तो उन्हे दूध बेचने की इजाजत दी जानी चाहिए। इसके साथ ही वह अपने आस पास के इलाके में दूध बेच सके, इसके लिए सरकार कोई एक अभियान चलाये। जिससे दूसरे समुदाय के लोगों को समझाया जाये कि उनका बहिष्कार करना सही नहीं है। वह भी इंसान है। कोई भी व्यक्ति धर्म के आधार पर अच्छा या बुरा नहीं हो सकता है।

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न्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस दिशा में जल्दी ही कदम नहीं उठाया तो उनके सामने भारी आर्थिक संकट आ जायेगा। इससे उनका निकलना मुश्किल हो जायेगा। उन्होंने मांग की कि एक तो सरकार तुरंत उनका दूध खरीदना शुरू करें। इसके साथ ही जो सामाजिक बहिष्कार हो रहा है, यह स्थिति कैसे खत्म हो सकती है, इस ओर तुरंत ही सरकार को देखना चाहिए। इसके साथ ही उनके वेल्फेयर की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो उनके लिए यह दिन खासी दिक्कत वाले हो सकते है।

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