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ज्ञानपीठ से सम्मानित वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह का निधन

Janjwar Team
19 March 2018 10:25 PM GMT
ज्ञानपीठ से सम्मानित वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह का निधन
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साहित्य जगत में फैली शोक की लहर, अभी ख्यात व्यंग्यकार सुशील सिद्धार्थ के अचानक 17 जनवरी को हुए निधन से लोग उबरे भी नहीं थे कि दो दिन के अंदर केदारनाथ की मौत ने दिया दूसरा सदमा...

जनज्वार,दिल्ली। हिंदी के वरिष्ठ और ज्ञानपीठ सम्मान से सम्मानित कवि केदारनाथ सिंह का आज रात तकरीबन 9 बजे एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। 86 वर्षीय केदारनाथ सिंह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। पेट में संक्रमण की शिकायत के बाद इलाज के लिए उन्हें अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) में भर्ती किया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो ई।

केदारनाथ सिंह के निधन से हिंदी साहित्य जगत में शोक का माहौल व्याप्त हो गए हैं। एक बेटे और पांच बेटियों के पिता केदारनाथ सिंह के हिंदी साहित्य जगत को दिया योगदान अमूल्य है, जिसे इतिहास याद रखेगा।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 1932 में जन्मे केदारनाथ सिंह नई कविता के अग्रणी कवियों में गिने जाते हैं। उनकी कविता हिंदी कविता में नए बिंबों के प्रयोग के लिए ख्यात है। आलोचकों के मुताबिक केदारनाथ सिंह की कविताएं जटिल विषयों को सहज एवं सरल भाषा में व्यक्त करती हैं। केदारनाथ सिंह अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के प्रमुख कवि हैं।

बनारस विश्वविद्यालय से 1956 में हिन्दी में एमए और 1964 में पीएचडी करने के बाद केदारनाथ सिंह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र में बतौर शिक्षक काम करने लगे। जेएनयू में वे भारतीय भाषा केंद्र के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने कविता, आलोचना के अलावा कई पुस्तकों का संपादन भी किया है।

केदारनाथ सिंह के प्रमुख कविता संग्रहों में 'अभी बिल्कुल अभी', 'जमीन पक रही है', 'यहां से देखो', 'बाघ', 'अकाल में सारस', 'उत्तर कबीर और अन्य कविताएं', 'तालस्ताय और साइकिल', 'सृष्टि पर पहरा' शामिल हैं।

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2013 में केदारनाथ सिंह के साहित्य जगत में योगदान को देखते हुए उन्हें साहित्य के सबसे बड़े सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले वे हिन्दी के 10वें लेखक हैं।

ज्ञानपीठ पुरस्कार के अलावा उन्हें मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कुमारन आशान पुरस्कार, जीवन भारती सम्मान, दिनकर पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान पुरस्कारों समेत कई अन्य सम्मानों से भी पुरस्कृत किया जा चुका है।

लेखक जयप्रकाश मानस उनके निधन पर लिखते हैं, एक दिन यह कहना या सोचना भी कितना दुखद होगा, कभी जेहन में आया न था, हमारे ज्येष्ठतम् प्रिय कवि, ज्ञानपीठ पुरस्कार से अलंकृत आदरणीय केदारनाथ सिंह जी अपनी पार्थिवता में अब शायद ही हमें दिखाई देंगे।

प्रेमचंद गांधी लिखते हैं, 'हमें रोशन दुनिया दिखाने वाले एक-एक कर जा रहे हैं। आज केदारनाथ सिंह भी हाथ और साथ दोनों छोड़कर चले गए। विनम्र श्रद्धांजलि।'

पत्रकार लेखक शेष नारायण सिंह उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखते हैं, जब पडरौना के कालेज के प्रिंसिपल, डॉ केदार नाथ सिंह, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र में प्रोफेसर होकर आये तो बहुत अच्छा लगा था। मैं उनको तब से जानता था, जब मैंने बी ए में नाम लिखाया था। पिछले चालीस साल में जब भी मिला, बहुत ही अपनेपन से उन्होंने सम्मान दिया। कभी मेरे अखबारी लेखन की तारीफ की और कभी टेलिविज़न पर की गयी मेरी टिप्पणियों को शब्दशः बताकर मुझे इज्ज़त बख्शी, आज उनकी मृत्यु की खबर ने झकझोर दिया है।

वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने अपने अग्रज कवि के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए यह सूचना भी साझा की कि उनकी अंत्येष्टि 20 मार्च को अपराहन 3 बजे लोधी रोड स्थित शवदाहगृह में की जाएगी।

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