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राजनीति

संसद से आधा किलोमीटर की दूरी पर हिंदूवादियों ने जलाया संविधान

Prema Negi
10 Aug 2018 4:36 PM GMT
संसद से आधा किलोमीटर की दूरी पर हिंदूवादियों ने जलाया संविधान
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मनु स्मृति जिंदाबाद के नारे के साथ अंबेडकर को गालियां बकते हुए हिंदुवादियों ने संविधान को किया आग के हवाले, मगर इन संविधान विरोधियों के खिलाफ अब तक नहीं हुआ है कोई मुकदमा दर्ज, सोशल मीडिया पर हो रही है देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग...

जनज्वार। देश की बागडोर संभालते वक्त ‘संविधान को सबसे पवित्र किताब’ और खुद को ‘आंबेडकर का शिष्य’ घोषित करने वाले प्रधानमंत्री मोदी के राज में संविधान को खुलेआम जलाकर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, मगर मोदी तो छोड़िये उनकी पार्टी के किसी अदने से नेता का बयान भी इसके विरोध में नहीं आता।

सोशल मीडिया पर हिंदुवादियों द्वारा संविधान जलाए जाने का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ—साफ देखा जा सकता है कि पहले इन लोगों ने कागज के कुछ पन्नों को जलाया फिर संविधान के पहले पेज को आग के हवाले कर दिया पूरी किताब को स्वाहा कर दिया।

दलित कार्यकर्ता और गुजरात के वडगाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए यह वीडियो शेयर किया है और ट्वीट किया है कि 'मनुस्मृति के बजाय संघी भाजपाई हमारे देश के संविधान को जला रहे हैं। @PMOIndia कुछ टिप्पणी करेंगे इस मामले में? या अपना चिर—परिचित मौन ही बनाए रखेंगे? जितना जितना फ़ासीवाद आगे बढ़ता जाएगा यह लोग बाबा साहब को और भी अपमानित करेंगे— यही इनका असली चरित्र है। मोदी जी कुछ तो शर्म करो।



हिंदूवादियों द्वारा संविधान जलाए जाने पर छात्र नेता कन्हैया कुमार ने #SaveConstitution हैश टैग के साथ ट्वीटर पर शेयर करते हुए लिखा है, 'संविधान जलाने वाले इन संघी लोगों को असल तकलीफ आरक्षण से नहीं है, इन्हें तकलीफ इस बात से है कि संविधान अमीर-गरीब, दलित-ब्राह्मण, महिला-पुरुष, हिन्दू-मुसलमान सबको बराबर अधिकार देता है, इसीलिए ये अम्बेडकर मुर्दाबाद के साथ मनुस्मृति ज़िंदाबाद के नारे भी लगाते हैं।'



इन युवा नेताओं के अलावा संविधान जलाए जाने पर सोशल मीडिया पर हिंदुवादियों का खूब विरोध किया जा रहा है।

स्ट्रोक' के चलते भाजपा के निशाने पर आए पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए ट्वीट किया है, 'जंतर मंतर पर मनुवादियों ने बाबा साहेब को गाली देते हुए भारत का संविधान जला दिया, और दिल्ली पुलिस मूकदर्शक बनी रही।'

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