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आंदोलन

22 सालों से अल्मोड़ा में मुसलमानों को नहीं निकालने दिया धार्मिक जुलूस

Janjwar Team
1 Dec 2017 4:00 AM IST
22 सालों से अल्मोड़ा में मुसलमानों को नहीं निकालने दिया धार्मिक जुलूस
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कहता है प्रशासन अगर निकाला जुलूस-ए-मोहम्मदी तो हो सकती है अनहोनी, मुस्लिम समुदाय में जुलूस नहीं निकालने देने को लेकर नाराजगी...

संजय रावत

अल्मोड़ा। उत्तराखंड में सभी जगह जुलूस-ए-मोहम्मदी अन्य तीज—त्योहारों की तरह ही मनाया जाता है। पर सबसे शिक्षित शहर अल्मोड़ा, जो जिला भी है और राजनीतिक शहर भी तो इसे यहां मनाने की इजाजत के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग पिछले 22 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। 2 दिसंबर को इसका आयोजन होना है, पर प्रशासनिक अमला वही राग अलाप है कि कोई अनहोनी हो सकती है।

2 दिसंबर के दिन मोहम्मद साहब की याद में मुसलमानों द्वारा जुलूस भी निकाला जाता है। लेकिन अल्मोड़ा में कुछ लोगों के अनावश्यक विरोध के चलते स्थानीय प्रशासन जुलूस की अनुमति नहीं दे रहा है, जिस कारण से समाज के लोगों में रोष व्याप्त है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस मामले में अल्मोड़ा प्रशासन के रवैए पर भी गहरी नाराजगी जताई है। सामाजिक संस्था अंजुमन सेवा समिति के संयोजक अमीनूर्रहमान ने जुलूस-ए-मोहम्मदी की अनुमति नहीं दिए जाने पर हैरानी जताई है।

समिति के संयोजक का कहना है कि इस संदर्भ में जिला प्रशासन द्वारा न तो कोई रास्ता निकाला जा रहा है और न ही समस्या का समाधन ही खोजा जा रहा है। यही वजह है कि लंबे समय से यह समस्या चल रही है।

उनका कहना है कि अल्मोड़ा में कई धर्मिक जुलूस निकाले जाते हैं, लेकिन मोहम्मदी जुलूस निकालने की बात आती है तो सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने की दुहाई दी जाने लगती है। यह ठीक नहीं है।

उन्होंने इस प्रकरण से भारत के राष्ट्रपति, प्रधनमंत्री के साथ ही प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी पत्रा भेजा है, लेकिन अभी तक इस संदर्भ में गंभीरता से विचार ही नहीं किया गया है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पीएमओ कार्यालय ने प्रमुख सचिव को पत्रा प्रेषित कर इस बाबत कार्रवाई करने को कहा है, लेकिन इस मामले में प्रदेश सरकार की ओर से कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।

अमीनूर्रहमान कहते हैं अगर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई तो यह मुस्लिम समाज का अपमान होगा।

राजनीतिक हलकों में चर्चा यह भी है कि चूंकि अल्मोड़ा भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की कर्मभूमि रही है, शायद इसलिए अल्मोड़ा में भाजपा के राज में जुलूस-ए-मोहम्मद की इजाजत न हो।

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