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मई दिवस पर खनन माफिया के विरोध में उत्तराखण्ड के जनजाति बहुल वीरपुर-लच्छी में प्रतिरोध सभा आयोजित

Prema Negi
3 May 2019 5:45 AM GMT
मई दिवस पर खनन माफिया के विरोध में उत्तराखण्ड के जनजाति बहुल वीरपुर-लच्छी में प्रतिरोध सभा आयोजित
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1 मई 2013 को रामनगर स्थित वीरपुर लच्छी गांव में खनन माफिया द्वारा जलाए गये घरों का मुआवजा आज तक उत्तराखण्ड सरकार के समाज कल्याण विभाग से नहीं मिला प्रभावित ग्रामीणों को, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट व निचली अदालतों में जनजाति बहुल गांव झेल रहा 9 मुकदमे...

जनज्वार, रामनगर। बुक्सा जनजाति बहुल वीरपुर लच्छी गाँव में दमन विरोधी संघर्ष समिति द्वारा अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 मई के अवसर पर एक प्रतिरोध सभा का आयोजन किया गया।

सभा में बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि खनन माफिया द्वारा गाँव में घुसकर की गयी फायरिंग आगजनी व महिलाओं के ऊपर किये गये हमले को 6 वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें आज तक न्याय नहीं मिल पाया है। इस मामले में ग्रामीण सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट व निचली अदालतों में 9 मुकदमे झेल रहे हैं।

वक्ताओं ने कहा खनन माफिया सोहन सिंह व डीपी सिंह उन पर फर्जी मुकदमे लाद रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। 1 मई 2013 को खनन माफिया द्वारा जलाए गये घरों का मुआवजा आज तक उत्तराखण्ड सरकार के समाज कल्याण विभाग ने नहीं दिया है।

इस प्रतिरोध सभा में जले हुये घरों को मुआवजा दिये जाने व सभी 9 मुकदमों की सुनवाई तत्काल खत्म किये जाने की मांग की गयी।

इस प्रतिरोध सभा को चारु तिवारी, प्रभात ध्यानी, ललित उप्रेती, महेश जोशी, कैसर राना, मदन सिंह, सरस्वती जोशी, चंदो देवी, चंपा देवी, कन्हाई सिंह समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता संचालन मुनीष कुमार ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व दर्जाधारी मंत्री सोहन सिंह द्वारा ग्रामीणों के खेतों पर रास्ता बनाकर डम्फर चलाने, विरोध करने पर महिलाओं को बन्दूक की बटों से मारने, उनके घरों में आग लगाने, गोलियां चलवाने और उल्टा 307 का मुकदमा भी लगवाने का 6 साल पुराना मामला देश की सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। यह उत्तराखंड का बहुचर्चित मामला रहा है, जिसमें कांग्रेस—माफिया गठजोड़ उजागर हुआ था।

संबंधित खबर : बुक्सा जनजाति उत्पीड़न मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में ग्रामीणों के खिलाफ कांग्रेस नेता द्वारा लगाया गया यह मुकदमा खारिज हो चुका था, जिसके बाद कांग्रेसी नेता सोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में ग्रामीणों के खिलाफ केस डाला था। उत्तराखंड के नैनीताल जिले का छोटा सा गांव है वीरपुर लच्छी, जो कि खनन माफिया व सरकार के गुनाहों का गवाह है। पुलिस व खनन माफिया के खौफ से भागकर खेतों में छुप जाने वाले अनुसूचित जनजाति के लोग अब खनन माफिया से लोहा ले रहे हैं, उसकी हर चाल का मजबूती से मुकाबला कर रहे हैं।

1 मई, 2013 को जब बुक्सा समुदाय की महिलाओं ने सोहन सिंह के डम्फर चालकों से कहा कि तुम सड़क पर पानी क्यों न डाल रहे हो, धूल उड़ने से हमारे आंगन व खाने में मिट्टी भर रही है। महिलाओं का इतना बोलना भी कांग्रेस के पूर्व दर्जाधारी मंत्री सोहन सिंह को बर्दाश्त नहीं हुआ। वो अपने दोनों पुत्रों डीपी सिंह व सुमितपाल सिंह के साथ गुंडों की फौज लेकर गांव में घुस गया। इस मामले में जब ग्रामीणों ने पुलिस थाने में घटना की रिपोर्ट करवाई तो सोहन सिंह ने भी क्रास फर्जी मुकदमा दर्ज करवा दिया। ग्रामीणों के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) 147, 148, 149, 386, 341, 427, 323 व एससीएसटी एक्ट आदि लगवा दी गयीं। यह मामला तब से चल रहा है।

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