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नहीं रहा नैनी झील से 320 लाशें निकालने वाला हनुमान

Janjwar Team
17 March 2018 9:40 PM GMT
नहीं रहा नैनी झील से 320 लाशें निकालने वाला हनुमान
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खिलंदड़ हुलिया व खिचड़ी दाढ़ी वाला हनुमान सरोवर नगरी हनुमान को रहेगा हमेशा याद

नैनीताल,जनज्वार। नैनी झील व उससे लाशों को बरामद होना चोली दामन का रिश्ता हो सकता है। लेकिन पिछले 45 सालों से इसमें एक कड़ी भी जुड़ी है। वह नैनीताल में साधारण सा व्यक्ति हनुमान लाल।

खिलंदड़ हुलिया, बिखरे बाल व खिचड़ी दाड़ी वाला 73 वर्षीय हनुमान पिछले 45 वर्षों में बिना किसी स्वार्थ और पैसे लिए 320 लाशें झील से निकाल चुका था। आखिर इस अजीबोगरीब और इंसानियत के मददगार इंसान का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया, मगर सरोवर नगरी हनुमान के कार्यों की एवज हमेशा उसे याद रखेगी।

आखिरी समय में हनुमान को यह बात सालती रही कि उसका इस दुनिया में कोई अपना नहीं था। अजीबोगरीब हुलिया रखने वाले कुंवारे हनुमान ने कभी चने बेचे, कभी भुट्टे, कभी रिक्शा चलाया, तो कभी मजदूरी कर ली।

हनुमान अधिकांश समय झील के आस-पास ही अपना आशियाना बनाता था। नैनी झील में शवों के मिलने पर परोपकारी हनुमान से पुलिस सहयोग लेना नही भूलती। हनुमान कौन था इस बाबत बहुत कम लोगों को पता था।

वर्ष 1930 में हल्द्वानी मार्ग पर मिठ्ठन लाल की जूतासाज की दुकान हुआ करती थी, वह उन्हीं का मझला पुत्र था। बड़े भाई का निधन बचपन में हो गया। पिता का कारोबार बंद होने से स्कूल नहीं जा सका। 14 वर्ष की आयु में होशियार तैराक बन चुके हनुमान ने पहला शव पालीटेक्निक के छात्र की निकाली। यहां से लाश निकालने का सिलसिला शुरू हुआ।

साल—दर—साल हनुमान नैनी झील से लाश—दर—लाश निकालता रहा। पुलिस का वह स्थाई मददगार बन गया। इन 45 वर्षों की यात्रा में वह 320 शवों को निकाल चुका। शवों को निकालने की एवज वह कुछ नहीं लेता। दो जून की रोटी के साथ-साथ वह थोड़ा खर्च लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के लिए भी करता था।

आवारा पशुओं व बेसहारा बच्चों के प्रति उसका स्नेह उदाहरण बन जाते हैं। अपने घर से भागे एक बालक को उसने पढ़ा लिखाकर फौज में भी भर्ती किया। वह कांग्रेस का समर्थक था। इंदिरा गांधी जब जेल गई तो हनुमान भी विधायक स्व. बाल किशन के साथ 14 दिन जेल में रहा।

नैनी झील से हनुमान ने कई ऐसे लोगों की लाशें भी निकालीं, जिनकी हत्या कर झील में डाल दिया गया था। 30 वर्ष पूर्व बोरे में बंद महिला की लाश उसने निकाली थी। उस शव का चेहरा तेजाब से जला था। इसके बाद आधा दर्जन शव ऐसे मिले, जिनकी हत्या कर झील में डाल दिया गया था।

अंतिम समय में हनुमान यहां एक टीन शैड में रह रहा था। पिछले एक पखवाड़े से बीडी पांडे अस्पताल में भर्ती था और आज शनिवार को उसने वहीं दम तोड़ दिया।

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