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अंतरजातीय विवाह करने पर पंचायत ने सुनाया दुल्हन को गोमूत्र पीने और गोबर खाने का फरमान, कहा भरना पड़ेगा 5 लाख अर्थदंड भी

Prema Negi
8 Feb 2020 4:53 AM GMT
अंतरजातीय विवाह करने पर पंचायत ने सुनाया दुल्हन को गोमूत्र पीने और गोबर खाने का फरमान, कहा भरना पड़ेगा 5 लाख अर्थदंड भी
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अनाथ लड़की का दूसरे धर्म के लड़के से प्रेम विवाह ​रिश्तेदारों को इतना अखरा कि कर डालीं अमानवीयता की हदें पार

पहले तो समाज के ठेकेदारों ने भूपेश के परिवार की एक भी बात नहीं सुनी और अब सुनी भी तो शर्त रख दी कि अगर इस परिवार को हुक्का पानी खुलवाना है तो भूपेश की पत्नी आस्था जैन को गौ मूत्र पीना होगा और उससे स्नान करना होगा, इतना ही नहीं उसे गोबर भी खाना होगा, ताकि वह पवित्र हो जाये...

जनज्वार। हमारी सरकारें दावे करती हैं कि समाज से वैमनस्यता कम हो रही है, अंतरजातीय विवाहों को उसके द्वारा भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है, मगर समाज अभी भी जातियों को लेकर कितना कट्टर है इसे देखना हो तो हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई घटनायें सामने हैं जहां अंतरजातीय प्रेम की कीमत जोड़ियों ने अपनी जान देकर चुकाई। हरियाणा में तो खाप पंचायतों के ऐसे तानाशाही फरमान जगजाहिर हैं ही।

ब हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के झांसी में सामने आया है। यहां शुक्रवार 7 फरवरी को पंचायत ने अंतरजातीय विवाह के दंडस्वरूप ऐसा फरमान सुनाया, जिससे कलेजा मुंह को आ जाये। झांसी के एक गांव में अंतरजातीय विवाह करने पर समाज के तथाकथित ठेकेदारों ने शादीशुदा जोड़े और उनके परिवार को समाज से बेदखल कर दिया था और दोबारा उन्हें समाज में शामिल करने के लिए परिवार पर पांच लाख रुपये का भारी-भरकम अर्थदण्ड करने के साथ उन्हें पवित्र करने के लिए गौ मूत्र पीने, उससे स्नान करने व गोबर का सेवन का फरमान सुना दिया गया।

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स मामले में कल शुक्रवार 7 फरवरी को पंचायत अपने सामने पीड़ित परिवार से यह कुकृत्य करवाने वाली थी कि इस मामले की खबर पुलिस प्रशासन तक पहुंच गयी। पुलिस और जिला प्रशासन के अफसरों ने घटनास्थल पर पहुंचकर पंचायत का तुगलकी फरमान भुगतने से पीड़ित परिवार को बचा लिया।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक झांसी के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के हंसारी ग्वालटोली के रहने वाले भूपेश यादव ने लगभग 4 साल पहले 3 जून 2015 को सदर बाजार निवासी आस्था जैन से प्रेम विवाह किया था। इस विवाह में दोनों परिवारों के लोग शामिल हुए थे, यानी दोनों परिवारों की आपसी सहमति से ही दोनों ने शादी की। मगर भूपेश का अंतरजातीय विवाह समाज के तथाकथित ठेकेदारों को इतना नागवार गुजरा कि जिस पहलकदमी के लिए भूपेश और उसके परिजनों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था, पंचायत ने उसके सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुना दिया।

पंचायत के तुगलकी फरमान के बाद लोगों ने सामाजिक कार्यों व शादी समारोह आदि में भूपेश के परिवार को बुलाना बंद कर दिया। समाज से बेदखल कर दिये भूपेश के परिजनों ने पंचायत से कई बार विनती की कि उनका हुक्का-पानी खुलवा दिया जाये। पहले तो समाज के ठेकेदारों ने भूपेश के परिवार की एक भी बात नहीं सुनी और अब सुनी भी तो शर्त रख दी कि अगर इस परिवार को हुक्का पानी खुलवाना है तो भूपेश की पत्नी आस्था जैन को गौमूत्र पीना होगा और उससे स्नान करना होगा, इतना ही नहीं उसे गोबर भी खाना होगा, ताकि वह पवित्र हो जाये। इतना कुकृत्य करवाने की शर्त के अलावा पंचायत ने यह भी शर्त रखी कि इस परिवार को हुक्का पानी खुलवाने की एवज में पांच लाख रुपए का अर्थ दंड भी देना होगा, तभी समाज परिवार को अपने शुभ कार्यों में शामिल करेगा।

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माज के ठेकेदारों के इस फरमान पर शुक्रवार 7 फरवरी को शाम चार बजे पंचायत के सामने अमल होना था कि किसी ने इस बात की खबर पुलिस प्रशासन को कर दी। पंचायत भूपेश की पत्नी आस्था को गोमूत्र पिला कर उससे स्नान करवानी और गोबर खिलाती, उससे पहले ही मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट सलिल पटेल और सीओ सिटी संग्राम सिंह दल-बल के साथ पहुंच गये।

न्होंने इस खाप पंचायत के सदस्यों को सख्त हिदायत दी कि किसी के मौलिक अधिकारों का इस तरह हनन करने की हिम्मत की तो पूरी जिंदगी जेल में गुजारनी होगी। प्रशासनिक अफसरों ने 6 पंचों के खिलाफ शांति भंग करने की निरोधात्मक कार्रवाई भी की। उन्हें हिदायत दी कि आइंदा किसी मामले पर इस तरह की दोबारा पंचायत लगी या किसी को ऐसा ​तुगलकी फरमान सुनाया तो प्रशासन उस पर कठोर कार्रवाई करेगा। इसके अलावा पुलिस प्रशासन ने अंतर्जातीय विवाह करने वाले युवक-युवती और उनके परिजनों को सुरक्षा का आश्वासन भी दिया।

गौरतलब है कि हमारे 137 करोड़ आबादी वाले देश में सालभर में मात्र 500 लोग अंतरजातीय विवाह की हिम्मत कर पाते हैं, उसकी वजह शायद समाज के यही तुगलकी फरमान होंगे, जिस कारण आज की युवा पीढ़ी भी ऐसी हिम्मत नहीं कर पा रही। यह हाल तब है जबकि सरकार द्वारा अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों यानी दोनों में से किसी एक का दलित होना जरूरी है, उन्हें ढाई लाख रुपये की सहायता भी देती है।

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