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पुलिस ने मचाया गुजरात के मुस्लिम गांव में तांडव

Prema Negi
22 Feb 2019 12:23 PM GMT
पुलिस ने मचाया गुजरात के मुस्लिम गांव में तांडव
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मोदी के गुजरात में 17 फरवरी को दर्जनों पुलिस वाले मुस्लिम गांव सेमरनी में गए और औरत—मर्द, बच्चा—बूढ़ा किसी को नहीं बख्शा। औरतों—बच्चों के साथ भी दुर्व्यव​हार और लाठीचार्ज किया, घरों में तोड़फोड़ और लूटपाट मचाई। सहमे हुए लोग डर रहे हैं अपने गांव—घर वापस लौटने को…

जनज्वार। अमरेली ज़िले के धारी तालुका के सेमरनी गाँव में 17 फरवरी को पुलिस द्वारा तोड़ फोड़ और लूटपाट की गई। इस संबंध में ग्रामीणों ने अमरेली ज़िला कलेक्टर को आवेदन दिया है कि पुलिस ने जबरन हमारे घरों में घुसकर मारपीट की और हमारे नकदी—सामान लूटकर चली गई। डर के मारे ग्रामीण गांव में वापस नहीं आ रहे हैं। कलेक्टर ने ग्रामीणों की शिकायत को जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया है, हालांकि पुलिस इस मामले में पुलिस के खिलाफ ग्रामीणों की एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है।

ग्रामीणों की शिकायत के मुताबिक मोदी के गृहराज्य में गुजरात के समरेडी (धारी) गांव में 17 फरवरी को गांव में पुलिस, एलसीबी, एसओजी, जंगल विभाग और बिजली विभाग के कर्मचारियों ने बहुत ही क्रूरतापूर्वक महिलाओं और बच्चों पर लाठीचार्ज किया। ग्रामीणों के मुताबिक पुलिस और अन्य विभाग के कर्मचारियों ने गांव के लगभग 40 घरों में घुसकर उनके घरेलू सामान, बच्चों के खिलौनों, टीवी, फ्रीज, सीलिंग फेन, पलंग, अलमारी, खिड़की, दरवाजे, बाथरूम के दरवाजे, कार, बाइक आदि को बहुत ही बुरी तरीके से क्षतिग्रस्त किया।

Minority Coordination Committee के कन्वेनर मुजाहिद नफ़ीस कहते हैं, 'जिला कलेक्टर को दिए आवेदन में ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज की है कि इतना ही पुलिस ने पानी भरने के पम्प, पाइप आदि जीवन की जरूरती चीजों को भी तोड़ दिया। समरेडी के ग्रामीणों के पालतू पशुओं भैंस, मुर्गी-मुर्गा आदि को भी मारा पीटा गया और कुछ पशुओं को खोलकर भगा दिया गया, जिनका अब तक कोई अता पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने घर के अन्दर अलमारी में रखे हुए सामान, गहने भी लूट लिए। इसी के साथ कुछ ग्रामीणों को भी पुलिस गिरफ्तार कर ले गई।'

इस संबंध में जब अमरेली के एसपी निर्लिप्त राय से जनज्वार ने बात करनी चाही तो पहले उन्होंने कहा कि गांव में आपस में मारपीट की एक शिकायत आई थी, जिसकी छानबीन के लिए हमारी टीम गई थी, मगर जब जनज्वार ने जानना चाहा कि शिकायत क्या थी तो एसपी महोदय ने यह कहते हुए फोन काट दिया कि आप हमसे इस बारे में बाद में बात कीजिए।

वहीं ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस वालों का गांव के एक—दो लोगों से किसी बात पर विवाद था, इसलिए 16 फरवरी की रात 4 पुलिसवाले उनके नाम गिरफ्तारी वारंट लेकर गांव में आ गये। इस दौरान कहासुनी में आपस में मारपीट हो गई। दूसरे दिन 17 फरवरी को पुलिस समेत अन्य विभागों के दर्जनों कर्मचारी गांव में घुस आए और औरत—मर्द, बच्चा किसी को नहीं बख्शा। औरतों पर भी लाठीचार्ज किया, हम लोग डर के मारे अब गांव वापस नहीं लौट रहे हैं।

वहीं जिस संगठन Minority Coordination Committee की मदद से ग्रामीणों का आवेदन कलेक्टर तक पहुंचाया जा सका, उससे जुड़े महबूब रहमान कहते हैं, लगभग 150 की कुल आबादी वो भी बूढ़े—बच्चे—जवान वाले इस मुस्लिम गांव के ग्रामीणों की आर्थिकी का मुख्य आधार पशुपालन और थोड़ी बहुत खेती—बाड़ी, मजदूरी है। मगर ग्रामीणों ने यहां के लोगों पर जो कहर ढाया है, उसके डर के चलते ग्रामीण अपने घरों में वापस नहीं लौट रहे हैं।

पुलिसिया उत्पीड़न का कहानी बयां करना ग्रामीणों के घर का दृश्य

अमरेली के समस्त मुस्लिम एवं नागरिक समाज द्वारा कल 21 फरवरी को कलेक्टर जिला को शिकायत पत्र देते हुए निवेदन किया है कि पीड़ितों को कानूनी मदद दी जाए और दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाए।

जिला कलेक्टर से पीड़ित ग्रामीणों ने मांग की है कि सेमरनी गाँव से विस्थापित लोगों को क़ानून के संरक्षण में अतिशीघ्र पुनः बसाया जाये। सभी घरों में हुए नुकसान, तोड़फोड़ का सर्वे किया जाये व उनको डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी अथवा राहत कोष से तात्कालिक वित्तीय सहायता दी जाये।

इसके साथ ही सेमरनी गाँव के लोगों का उत्पीड़न करने वाले आरोपियों के विरुद्ध संविधान की रक्षा के लिए सभी को समान न्याय मिले, इसके लिए ज़रूरी क़दम उठाये जाएं और फ़ौरन दोषी पुलिसकर्मियों और अन्य विभागों के लोगों पर एफआईआर दर्ज की जाये जिससे लोगों में क़ानून, व्यवस्था पर विश्वास क़ायम रहे।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि सेमरनी गाँव के निर्दोष लोगों पर दर्ज किये गए केस वापस लिए जाएँ व उनको निर्दोष घोषित किया जाये। पुलिस द्वारा लूटपाट किये गए माल-सामान, नक़दी वापस की जाए।

गौरतलब है कि सेमरनी के ज्यादातर ग्रामीण पशुपालक हैं, इनके लगभग 300 गाय, भैंस, बकरा, मुर्गा वगैरह के लिए घास-चारा, पानी की तत्काल व्यवस्था की जाये।

कलेक्टर के पास जब ग्रामीणों ने यह आवेदन दिया, उस वक्त सेमरनी गाँव के निवासियों के साथ अनेक संगठनों के लगभग 300 नेतृत्वकारी लोग वहां मौजूद थे। इसमें प्रमुख रूप से महबूब रहमान क़ादरी, मुजाहिद नफ़ीस, हाजी नानभाई बिलाखिया, हाजी अब्दुल रज्जाक राधानपरा, समीर भाई कुरैशी, रफ़ीक भाई मोगल, रफ़ीक भाई चौहान, भावन भाई राईस, हसन भाई बलोच, मोह्हमद भाई बलोच, रशीद भाई बलोच, अब्दुल गफ्फार भाई रईस, राजू भाई मिलन, असलम भाई बिलाखिया, असलम भाई मच्छीवाला, जमियत-ए-उलेमा हिन्द जूनागढ़ ज़िला के इब्राहीम करुड़, अब्दुल रज्जाक गोसलिया आदि मौजूद थे।

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