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सिक्योरिटी

मिटता जा रहा है जीवन को जीने और ढोने का फर्क

Janjwar Team
29 Nov 2017 6:34 PM GMT
मिटता जा रहा है जीवन को जीने और ढोने का फर्क
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आज हर इंसान अच्छे जीवन स्तर को पाने के तनाव में इस तरह पागल है कि कुछ समय बाद 'जीवन स्तर' में से जीवन शब्द गायब हो जाएगा...

निशांक

मैं एक बहुराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हूँ तो मैं इसके माध्यम से तनाव से सम्बंधित चुनातियों के बारे में बताना चाहूंगा। पूरी दुनिया इस बात को जानती है कि आईटी के क्षेत्र में भारत अग्रणी है, परंतु इस सफलता के पीछे के तनाव को समझना और उनका सामना करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। मसलन अलग—अलग शिफ्ट में काम करना, दुनिया के विभिन्न देशों के समय प्रणाली के साथ खुद का सामंजस्य बैठाना और भी अनेक चुनौतिया...

यहां सवाल उठता है जीवनशैली और कार्य के बीच हम संतुलन कैसे बनाएं। हालांकि इस मुद्दे पर पहले भी मैं अपने अग्रजों से चर्चा करता रहा हूं। मेरी अपने वरिष्ठ रमनदीप सिंह से एक बार इस विषय पर चर्चा हुई। रमनदीप सिंह पिछले एक दशक से ज्यादा समय से एक सफल टेक्नोक्रैट हैं, साथ ही योग और ध्यान का अभ्यास करते हैं। वे फिलहाल मैं जिस कंपनी में जॉब करता हूं वहां समाधान वास्तुविद् (solution architect) थे । उन्होंने कुछ ऐसी बेहद जरूरी बातें जो शायद सभी लोगों के काम की होंगी।

रमनदीप सिंह ने बताया कि हमारा मन एक अत्यंत रहस्यमयी संकल्पना है,और अगर हम अपने विचारों का विश्लेषण करें तो हम काफी हद तक इसे अपने बस में कर सकते हैं। अगर हम योग और ध्यान का अभ्यास करें तो ये आश्चर्यजनक परिणाम हम अपने जीवन में हासिल कर सकते हैं। चेतना के जागृत होने से हम अपने जीवन में अनेक चमत्कार देख सकते हैं।

एक व्यक्ति कांसेशनेस के साथ अपनी हर उस आदत से छुटकारा पा सकता है, जिसे वो दूर करना चाहता है। फिर चाहे वो आदत कितनी भी पुरानी या जड़ हो और हमारे मन का भी खेल वही है। दुनिया के सारे तनाव और परेशानी सबसे पहले हमारे मन में पनपती है। योग और ध्यान वो कला है जो हमे जाग्रत मन से कल्पना और यथार्थ के बीच भेद करना सिखाता है । जिस वक्त हमे इसका बोध हो जाता है ,स्वतः तनाव अलग और हम अलग । क्योंकि परेशानियां हमारी खुद की बनायीं होती हैं।

जैसे ही हम अपने सोचने का तरीक बदलते हैं उस वक्त ही सारे तनाव गायब। बात करते है। कार्य सम्बंधित तनाव के बारे में। आमतौर पर इसके चार कारण होते हैं—

कार्य को जल्दी पूरा करने की आतुरता
हम अकसर काम को जल्दी पूरा करने की होड़ में लगे होते हैं कि उसके बाद हम तनावरहित हो सकें और यही सोचकर हम वीकेंड पर भी काम करते हैं। फिर से अगला हफ्ता शुरू और फिर ज्यादा काम। इस तरह हम उस तनाव श्रृंखला को तोड़ नहीं पाते और उसमें फंसते चले जाते हैं।

कार्य की निर्धारित समयसीमा (डेडलाइन)
हम काम को जल्द से पूरा करना चाहते हैं क्योंकि हमारी एक निर्धारित समयसीमा है, जो तनाव में उत्प्रेरक का कार्य करता है।

कार्य का बर्डन
अत्यधिक कार्य का दबाव, जो खुद में एक बड़ा तनाव है।

किसी कार्य का न होना
हम उस समय भी परेशान हो जाते हैं जब हमसे कोई कार्य नहीं हो पाता। उस समय हमें अपनी नौकरी को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगते हैं, जिससे स्ट्रेस बढ़ता है।

बात करते हैं इसके समाधान की, किस प्रकार हम कुछ सरल तरीकों के इस्तेमाल से किसी भी तरह के तनाव से तुरंत छुटकारा पा सकते हैं।

सबसे पहले तो हमें इस बात को स्वीकारना होगा कि हम किसी बात को लेकर तनावग्रस्त हैं। क्योंकि लोग मानने को तैयार नहीं रहते कि उन्हें किसी बात या नौकरी इत्यादि को लेकर किसी तरह का तनाव है। अगर हमें पता हो कि हम किस तरह के तनाव में हैं तो उसका तनाव खोजना आसान होता है।

जब तनाव महसूस हो तो 2—3 मिनट के लिए अपना काम बंद कर दें। तनाव के महसूस होने पार सबसे पहला काम होता है तनाव से भागना जो एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
तनाव की स्थिति में ज्यादातर लोग कॉफी, स्मोकिंग या किसी सहयोगी से बात कर इससे राहत पाने की कोशिश करते हैं। मगर इसका सबसे आसान तरीका है अपनी स्थिति को स्वीकार कर काम को उसी हालत में छोड़ आँखें बंद कर लें 5—10 बार गहरी साँस भरें। उसके बाद अपनी आंखें खोल स्वाभाविक अवस्था में लौट आएं। इस प्रक्रिया में आधे से एक मिनट का वक्त लगेगा, जिससे आपको काफी राहत महसूस होगी।

अकसर आॅफिस या काम की जगह पर चार—पांच कारण तनाव के लिए जिम्मेदार होते हैं। जब किसी कार्य के न होने से हम तनाव में होते हैं तो बजाय नकारात्मकता लाने के हम नई स्किल्स सीखने सीखकर खुद को ज्यादा योग्य बना सकते हैं। बजाय तनाव लेने के हम कार्य से संबंधित नई चीजों को सीखकर अपनी कार्यक्षमता में वृद्धि कर सकते हैं।

जहां तक अत्यधिक काम के बर्डन से होने वाले तनाव की बात करें, तो सिर्फ काम की अधिकता के बारे में सोचकर ही इंसान तनावग्रस्त हो जाता है। यहां तनाव का कारण अत्यधिक काम नहीं है, बल्कि वह सोच है जिसके कारण हम तनाव महसूस करते हैं। इससे मुक्ति पाना आसान है। हालांकि काम की अधिकता में इंसान चीजें भूल जाता है तो भी उसे तनाव होता है। इससे बचने के लिए संबंधित व्यक्ति फोन, लैपटॉप या नोटबुक में अपनी प्राथमिकताओं को नोट करने की आदत डाल ले और उसी हिसाब से काम करे तो तनाव काफी कम हो जाएगा। तनाव से बचने के लिए हम किसी भविष्य के काम से संबंधित विचार को लिखना शुरू कर सकते हैं, जो मन में आता है।

बात करते हैं कार्य की निर्धारित समयसीमा (डेडलाइन) से होने वाले तनाव की बाबत। किसी काम की डेडलाइन तय करने से पहले उसके बारे में सोचें, योजना बनाकर उस पर काम करें। काम को छोटे छोटे हिस्सों में बांटकर हम आसानी से उसे डेडलाइन के अंदर पूरा कर सकते हैं। ऐसे में बजाय तनाव लेने के अगर कोई हमारा काम के दौरान मददगार साबित हो सकता है तो उसकी मदद लें, इससे तनाव से मुक्त होंगे और डेडलाइन के साथ—साथ काम बहुत अच्छा होगा।

कार्य को जल्दी पूरा करने की आतुरता शायद सभी को होती है, यह भी तनाव का एक बड़ा कारण है। यदि आप जल्दी से काम खत्म करना चाहते हैं, तो इस बात को ध्यान में रखें कि शांत मन से काम करें। अपने आपको बताएं कि असल में, काम के बाद भी मैं तनावमुक्त और आराम से रहना चाहता हूं। भविष्य के बारे में कौन परवाह करता है, मैं इस काम को मन की शांति के साथ करूँगा। अगर आप मन को शांत रखकर सोच—समझकर काम करें तो तनाव कम होने के साथ काम का रिजल्ट भी बेहतर होगा।

तो तनाव भगाने के इन तरीकों को अपनाकर आप बड़ी से बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी या जल्दी से जल्दी डेडलाइन पूरी करने की शर्तों को आसानी से पूरा कर सकते हैं और एक तनावरहित जिंदगी खुशहाली के साथ जी सकते हैं।

(निशांक एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।)

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