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पूर्वांचल की 19 लोकसभा सीटों पर मोदी-योगी की कठिन परीक्षा, भाजपा प्रत्याशियों की राह नहीं आसान

Prema Negi
7 May 2019 5:08 AM GMT
पूर्वांचल की 19 लोकसभा सीटों पर मोदी-योगी की कठिन परीक्षा, भाजपा प्रत्याशियों की राह नहीं आसान
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file photo

पूर्वांचल के मतदाताओं ने उपचुनाव परिणाम से स्पष्ट बता दिया है कि जनता जनार्दन मोदी और योगी से है बहुत नाराज, जनता खुलेआम लगी है कहने मोदी गरीब-कमजोर के नेता नहीं बल्कि पूंजीपतियों के हैं फायर ब्रांड नेता...

अरविंद गिरि

जनज्वार। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की 19 लोकसभा सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को बड़ी जीत हासिल हुई थी। तमाम वादों, दावों और गुजरात मॉडल के सपने दिखाकर हासिल हुई यह जीत इस बार भाजपा के गले की फांस बन चुकी है, क्योंकि जनता सवाल करने लगी है चुनावी दावों और वादों को लेकर।

तब मोदी लहर में भाजपा का पट्टा पहन सभी प्रत्याशियों को जनता ने मोदी के वोटबैंक के रूप में जिताया था। तब जनता को लगा था कि मोदी सरकार नौजवानों को रोजगार, किसानों को समर्थन मूल्य व मुआवजा तथा अपराध पर अंकुश लगायेगी, साथ ही यह भी उम्मीद कर रही थी कि पूर्वांचल की बंद चीनी मिलों को फिर से एक बार चालू करायेगी।

नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर मंडल की लोकसभा सीटों देवरिया, पडरौना, महराजगंज और गोरखपुर में चुनावी जनसभा सभाओं में हवाई वादों का पुलिंदा बांधा था, जिसमें चीनी मिलों को चालू कराना उनका प्रमुख वादा था। पेशे से किसान रूपलाल कहते हैं, हमें उम्मीद थी कि मोदी-योगी की सरकार आने के बाद उनकी आमदनी में इजाफा होगा, साथ ही बकाया भुगतान भी हो जायेगा। मोदी ने जनता से वादा किया था कि सरकार बनते ही गन्ना किसानों का भुगतान उनकी सरकार की प्राथमिकता में रहेगा, मगर हमें सिवाय ठगने के और कुछ नहीं किया गया।

इसी तरह र्वांचल में इंसेफ्लाइटिस पर रोक लगाने के लिए मेडिकल कॉलेज में व्यापक पैमाने पर डाक्टरों एवं चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाने की बात मोदी चुनावों सभाओं में कर गए थे, जहां हालात और भी बदतर हैं।

इसी तरह बस्ती मंडल की 3 लोकसभा सीटों पर भी बन्द चीनी मिलों को चालू कराना और मुसहर बस्ती में लघु उद्योग को लगाने की बात की थी। आजमगढ़ मण्डल की 5 लोकसभा सीटों पर अपराध पर अंकुश लगाने एवं आतंकवाद को खत्म करने का वादा किया था। भाजपा ने सबका साथ सबका विकास का जुमला नारा दिया गया था।

वाराणसी मंडल की 5 लोकसभा सीटों पर भी पक्का आवास, रोजगार के लिए लघु उद्योग लगाने का वादा मोदी ने किया था। मां गंगा का बेटा हूं, मां गंगा ने मुझे बुलाया है, मुझे गंगा मां की सफाई करानी है, के साथ केसरिया चोला ओढ़कर बाबा विश्वनाथ के दर्शन और आरती की, साथ ही चुनाव जीत कर पूर्ण बहुमत की सरकार भी बना ली।

पिछले चुनावों में मोदी लहर में पूर्वांचल की 19 सीटों पर भाजपा को जीत भी मिली, मगर इन लोकसभा क्षेत्रों में पांच वर्षों के मोदीकाल कोई परिवर्तन नहीं हुआ, बल्कि किसान, नौजवान बेरोजगारी, तंगहाली, गरीबी से तंग आकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं।

जब मोदी सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरी तो इस बार उसने पिछड़ा और अतिपिछड़ा का जातीय कार्ड खेला। यह कार्ड उसने सीधे समाजवादी पार्टी के वर्चस्व को कम करने के लिए खेला, जिससे कि वह एक बार फिर से भारी जीत हासिल कर सके। मगर जनता भाजपा के इस गेम से भी बखूबी वाकिफ हो चुकी है।

योगी आदित्यनाथ को यूपी की कमान सौंपने से कई दिग्गज भाजपाई ही खपा थे। योगी के मुख्यमंत्री बनते ही पूर्वांचल के कद्दावर एवं ब्राह्मणों के शिरोमणि पं.हरिशंकर तिवारी के गोरखपुर स्थित हाते में बिना किसी पूर्व सूचना के योगी पुलिस और अधिकारियों ने सरकार के इशारे पर छापेमारी की। इसके बाद पूर्वांचल के ब्राह्मण नेताओं और कार्यकर्ताओं जिसमें देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थ नगर, संतकबीरनगर, बस्ती, बलिया, मऊ, आजमगढ़ आदि जनपदों में पं.हरिशंकर तिवारी, बसपा प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर, सतीश चन्द्र मिश्र के नेतृत्व में गोरखपुर कमिश्नर कार्यालय पर भारी संख्या में लोगों ने सरकार एवं योगी आदित्यनाथ के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में ब्राह्मणों का आक्रोश साफ-साफ देखा गया।

योगी के मुख्यमंत्री बनते ही अखिलेश यादव सरकार में किया गया 172800 शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त कर दिया गया एवं 32022 अनुदेशकों का बढ़ा हुआ मानदेय 1700 आज तक नहीं दिया गया है और बी.टी.सी.69000 एवं 685080 अनुदेशक भर्ती 32000, उर्दू भर्ती 4000 गणित विज्ञान की भर्ती 29000 पर रोक लगा दी गई। जब अभ्यर्थियों ने इसका विरोध किया तो उन पर योगी के इशारे पर 147, 148, 354, 7 सीएलओ सहित गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया गया। पुलिस बल द्वारा बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया, जिससे बेरोजगारों में योगी—मोदी के खिलाफ पर्याप्त आक्रोश है।

योगी आदित्यनाथ सरकार में घूसखोरी और भ्रष्टाचार पर तनिक अंकुश नहीं लग सका। नौकरशाहों को तो किसी का डर भी नहीं रहा, वे मनमाने तौर तरीकों से सरकार के इशारे पर जनता का शोषण कर रहे हैं, जिसका एक बड़ा उदाहरण है गोरखपुर के आरडी मेडिकल कॉलेज में कमीशनखोरी के लिए अगस्त माह 2017 में आक्सीजन के कमी के कारण भारी संख्या में नवजात शिशुओं की मृत्यु हो गई, मगर योगी के कानों में नौकरशाहों ने जूं तक नहीं रेंगने दी।

पूर्वांचल इंसेफ्लाइटिस जैसी जानलेवा बीमारी का गढ़ है, मगर इस पर सरकार का कोई ध्यान नहीं गया जिससे मृत्यु दर में भारी बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल हुए उपचुनावों में पूर्वांचल में जनता ने भाजपा के प्रति अपने रुख का प्रदर्शन भी कर दिया है, भाजपा प्रत्याशियों को मुंह की खानी पड़ी।

पिछड़ी जाति के वोटबैंक को सहेजने के लिए केशवप्रसाद मौर्या को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था, जिसके बाद फूलपुर उपचुनाव में भाजपा बुरी तरह हारी। अतीक अहमद का जेल से चुनाव लड़ना भी भाजपा के लिए संजीवनी का काम न कर पाया। पूर्वांचल के मतदाताओं के उपचुनाव परिणाम से स्पष्ट है कि जनता जनार्दन मोदी और योगी से बहुत नाराज हैं। जनता खुलेआम कहने लगी है मोदी गरीब, कमजोर के नेता नहीं बल्कि पूंजीपतियों के फायर ब्रांड नेता हैं।

मोदी-योगी को भी शायद पूर्वांचल की 19 लोकसभा सीटों पर हार का आभास होने लगा है, जिसके कारण वृहद पैमाने पर प्रत्याशियों में फेर बदल किया गया है और बाहरी प्रत्याशियों को एक दूसरे की लोकसभाओं से चुनाव लड़वाया जा रहा है, जिसका संसदीय क्षेत्र की जनता, मतदाता और कार्यकर्ता अंदरूनी विरोध कर रहे हैं। कह रहे हैं कि इसका परिणाम गोरखपुर और फुलपुर उपचुनाव जैसा होगा।

मतदाता सरेआम कह रहे हैं कि मोदी के 2014 के चुनावी घोषणापत्र की आज तक कोई भी योजना धरातल पर नहीं उतरी है और न राममंदिर जिसे उन्होंने चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाया था, वही बन पाया है। इसलिए हम इस बार उनके झांसे में नहीं आएंगे और न ही उन्हें वोट देंगे।

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