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पानीपत के प्रवासी मजदूरों के हालात में नहीं कोई सुधार, IFTU का आरोप- HC के निर्देशों का भी नहीं हो रहा पालन

Manish Kumar Kumar
15 May 2020 8:27 AM GMT
पानीपत के प्रवासी मजदूरों के हालात में नहीं कोई सुधार, IFTU का आरोप- HC के निर्देशों का भी नहीं हो रहा पालन
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इंडियन फेडरनेशन ऑफ ट्रेड यूनियन (IFTU) ने चीफ सेक्रेटरी समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों को कोर्ट के आदेश की अवमानना का लीगल नोटिस भेजा है...

मनोज ठाकुर की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो: प्रवासी मजदूरों के खाने पीने व रहने को लेकर सरकार भले ही कितने भी दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। इंडियन फेडरनेशन ऑफ ट्रेड यूनियन (IFTU) का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पानीपत के प्रवासी मजदूरों की ओर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।

रियाणा के पानीपत में प्रवासी मजदूरों की स्थिति को लेकर IFTU ने पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में PIL लगाई थी। इस पर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिये थे कि मजदूरों के खाने पीने की उचित व्यवस्था की जाये। उनका पंजीकरण भी किया जाये। फेडरेशन का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने इस दिशा में कोई भी काम नहीं किया है.

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अब इसी को लेकर IFTU ने चीफ सेक्रेटरी समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों को कोर्ट के आदेश की अवमानना का लीगल नोटिस भेजा है। फेडरेशन के मजदूर नेता पीपी कपूर ने बताया कि प्रवासी मजदूरों की अनदेखी की जा रही है। इस वजह से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर अधिकारी मदद के नाम पर सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।

अपने वकील के माध्यम से दिये गये नोटिस में कपूर ने बताया कि पानीपत में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर फंसे हुये हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक उनका पंजीकरण नहीं कराया गया है। जब तक उनका पंजीकरण नहीं होगा, तब तक उन्हें नियमित तौर पर सरकार की ओर से दी जाने वाली मदद नहीं मिलेगी। लेकिन पंजीकरण की ओर अधिकारियों का ध्यान ही नहीं है।

बताया कि प्रवासी मजदूरों की स्थिति को लेकर एक पीआईएल नंबर 39 पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर कर मांग की थी कि पानीपत के प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन की वजह से खाने को कुछ नहीं मिल रहा है। यह सभी अप्रशिक्षित और गैर संगठित मजदूर है, जो अपने हितों की रक्षा करने में भी सक्ष्म नहीं है। वह कई कई दिनों तक भूखे रहने पर मजबूर हो रहे हैं। इस पीआईएल पर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि मजदूरों को खाने पीने का उचित प्रबंध किया जाये। इसके साथ ही उनका पंजीकरण किया जाये।

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उन्होंने कहा कि अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। पानीपत में कोई ऐसा नोडल अधिकारी भी नियुक्त नहीं किया गया जहा मजदूर अपनी बात रख सके। अभी भी जो खाना उन्हें दिया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। इतना ही नहीं प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिये दूध आदि का भी कोई प्रबंध नहीं किया है। सरकार ने घोषणा की थी कि मजदूरों को प्रति सप्ताह चार हजार रुपये दिये जायेंगे। लेकिन इन मजदूरों को यह पैसा भी नहीं मिल रहा है।

पीपी कपूर ने बताया कि अधिकारियों व सरकार को कोर्ट के आदेशों की भी परवाह नहीं है। ऐसे में अब कोर्ट की अवमानना का नोटिस देने के सिवाय उनके पास कोई रास्ता ही नहीं बचा है।

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