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अमित शाह के बयान 'मोदी नहीं तानाशाह' को टेनिस स्टार Martina Navratilova ने बताया मजाक, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

Janjwar Desk
11 Oct 2021 11:37 AM GMT
अमित शाह के बयान मोदी नहीं तानाशाह को टेनिस स्टार Martina Navratilova  ने बताया मजाक, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
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'मोदी नहीं तानाशाह' को मजाक बताने के बाद टेनिस स्टार मार्टिना नवरातिलोवा कट्टर दक्षिणपंथियों का बन गयी हैं निशाना

Martina Navratilova : अमित शाह के बयान 'मोदी नहीं तानाशाह' को मजाक बताने के बाद टेनिस स्टार मार्टिना नवरातिलोवा कट्टर दक्षिणपंथियों, छद्म राष्ट्रवादियों और हिंसक हिन्दू संगठनों के निशाने पर आ गयी हैं, इस मामले में वे अब रिहाना और ग्रेटा थन्बर्ग की श्रृंखला की अगली कड़ी हैं...

महेंद्र पाण्डेय की टिप्पणी

Modi not a dictator, जनज्वार। मार्टिना नवरातिलोवा (Martina Navratilova) टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी रह चुकी हैं और आज भी टेनिस कमेंटेटर और विशेषज्ञ के तौर पर सक्रिय हैं, महिला खिलाड़ियों की परेशानियों पर सक्रिय हैं। टेनिस के 18 सिंगल्स और 31 युगल/मिश्रित ग्रैंड स्लैम खिताब (Grand Slam trophies) उनके नाम हैं।

खेल से दूर, समलैंगिकता (LGBTQ) जैसे मुद्दे की मुखर समर्थक हैं और दूसरे मानवाधिकार के मुद्दे (Human Rights) पर भी अपनी बेबाक राय रखती हैं। हाल में ही हमारे देश में संसद टीवी (Sansad TV) को दिए गए एक इंटरव्यू में अमित शाह (Amit Shah) ने कहा था कि मोदी जी कोई तानाशाह है नहीं हैं, बल्कि इतना लोकतांत्रिक नेता भारत में कभी नहीं हुआ। अमित शाह ने कहा कि हरेक महत्वपूर्ण फैसला मोदी जी हरेक से सलाह-मशविरा लेकर की करते हैं और सबसे अच्छे श्रोता हैं – सबकी बात सुनते हैं।

यही नहीं, अमित शाह ने कहा कि हम केवल सरकार चलाने नहीं आये हैं बल्कि भारत का नव-निर्माण करने आये हैं। (He is not a dictator. He is most democratic leader India has ever seen.. I have never seen a good listener as Prime Minister Narendra Modi Modi believes, and he has said this multiple times, that we have not to come just run the government, but to build India)

इस इंटरव्यू को हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) ने भी प्रकाशित किया है। मार्टिना नवरातिलोवा ने ट्विटर के एक मैसेज में हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित इस खबर को साझा करते हुए लिखा है, इससे बड़ा मजाक और क्या होगा (And for my next Joke……)।

मार्टिना के इस ट्वीट के बाद से जाहिर है, वे कट्टर दक्षिणपंथियों, छद्म राष्ट्रवादियों और हिंसक हिन्दू संगठनों के निशाने पर आ गयी हैं। इस मामले में मार्टिना अब रिहाना (Rihana) और ग्रेटा थन्बर्ग (Greta Thunberg) के श्रृंखला की अगली कड़ी हैं। मार्टिना ने फरवरी 2016 में भी न्यू यॉर्क टाइम्स (New York Times) में जीएनयू और देशद्रोह (JNU Row) पर प्रकाशित एक लेख को साझा करते हुए लिखा था, यह लोकतंत्र नहीं है। उस समय भी वे बीजेपी समर्थकों के निशाने पर आई थीं, पर उन्होंने पूरी शालीनता से इसका सामना किया था और विरोध में लिखे गए अधिकतर कमेन्ट का जवाब भी दिया था।

मार्टिना केवल भारत के बारे में ही अपनी राय रखती हों ऐसा नहीं है। इसी वर्ष अप्रैल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan, PM of Pakistan) ने पाकिस्तान में बढ़ते बलात्कार के मामलों से सम्बंधित एक टीवी डिबेट में महिलाओं के कपड़ों को बलात्कार के लिए जिम्मेदार कहा था और इस वक्तव्य की दुनियाभर में भर्त्सना की गयी। मार्टिना नवरातिलोवा ने उस समय भी इमरान खान के वक्तव्य की कड़े शब्दों में आलोचना की थी।

मार्टिना ने अपने टेनिस कैरियर में 170 एकल, 125 युगल/मिश्रित युगल (Singles & Doubles/Mixed Doubles) मैच जीते हैं। भारत के लीएंडर पेस के साथ भी वे मिश्रित युगल खेल चुकी हैं और इस जोड़ी ने फ्रेंच ओपन और विम्बलडन का खिताब भी जीता था। मार्टिना एक प्रखर वक्ता हैं और मानवाधिकार और समान अधिकार (Human Rights and Equal Rights) जैसे विषयों पर उनके भाषणों का आयोजन संयुक्त राष्ट्र समेत अनेक अंतरराष्ट्रीय अधिवेशनों में किया जाता है।

अपने टेनिस जीवन के दौरान मार्टिना टेनिस में पुरुषों और महिलाओं की बराबरी के लिए काम करती रहीं। पिछले कुछ वर्षों से मार्टिना लगातार खेलों में मानवाधिकार के मुद्दे पर मुखर रही हैं। पिछले वर्ष एक अंतरराष्ट्रीय समारोह में जापान की नाओमी ओसका (Naomi Osaka) के साथ मार्टिना ने भी सभी खेलों के खिलाड़ियों को सन्देश दिया था कि उन्हें मानवाधिकार के मुद्दे पर मुखर होना आवश्यक है, क्योंकि खिलाड़ियों की बात युवा ध्यान से सुनते हैं और अपना आदर्श मानते हैं।

वर्ष 2016 में मार्टिना ने बड़े खेल आयोजकों को ऐसे आयोजनों के दौरान मानवाधिकार पर पैनी निगाह रखने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि केवल आयोजन ही महत्वपूर्ण नहीं बल्कि इसमें संलग्न श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा (rights of construction workers engaged for stadiums) भी की जानी चाहिए।

हमारे प्रधानमंत्री लगातार सार्वभौम कुटुम्बकम के जाप करते हैं, पर मार्टिना जैसे जागरूक वैश्विक नागरिक जब कुछ भी विरोध में कहते हैं, तब सबसे हिंसक मोदी जी के न्यू इंडिया के लोग ही होते हैं। ऐसा ही भारत मोदी-शाह बना रहे हैं। मजाक को मजाक कहना, इस देश में हिम्मत का काम है। मार्टिना नवरातिलोवा को एक मजाक को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद।

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