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Punjab Congress: सिद्धू के नखरे बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है कांग्रेस आलाकमान, नए विकल्प पर हो रहा मंथन

Janjwar Desk
29 Sep 2021 9:37 AM GMT
Punjab Congress: सिद्धू के नखरे बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है कांग्रेस आलाकमान, नए विकल्प पर हो रहा मंथन
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(कांग्रेस आलाकमान अब सिद्धू के विकल्प पर मंथन कर रहा है)

Punjab Congress: आलाकमान की ओर से बातचीत के रास्ते बंद तो नहीं किए गए हैं लेकिन बड़े केंद्रीय नेताओं की ओर से आगे आकर बातचीत करने,मनाने या फिर समझाने-बुझाने की कोई कोशिश भी नहीं दिख रही..

Punjab Congress: (जनज्वार)। पंजाब में चल रही उठापटक के बीच कांग्रेस आलाकमान नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Siddhu) को ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं दिख रहा। हालांकि, उनका इस्तीफा तो अबतक स्वीकार नहीं किया गया है लेकिन पार्टी आलाकमान की ओर से अभी तक बातचीत की कोई पहल भी नहीं की गई है।

एक तरह से कहा जाय तो आलाकमान की ओर से बातचीत के रास्ते बंद तो नहीं किए गए हैं लेकिन बड़े केंद्रीय नेताओं (Central leaders of Congress) की ओर से आगे आकर बातचीत करने,मनाने या फिर समझाने-बुझाने की कोई कोशिश भी नहीं दिख रही। इशारा साफ है, इस बार सिद्धू को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने की कोई बात नहीं होने जा रही, बल्कि उनके विकल्प पर विचार किया जा रहा है।

माना जा रहा है कि पार्टी सिद्धू को नहीं मनाएगी। इतना ही नहीं पार्टी ने पंजाब में नए प्रदेश अध्यक्ष (State President) के लिए मंथन भी शुरू हो गया है। इस दौड़ में रवनीत सिंह बिट्टू का नाम सबसे आगे चल रहा है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सिद्धू पर हमले शुरू कर दिए हैं। सांसद मनीष तिवारी के बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.अश्वनी कुमार ने प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने सिद्धू के इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि अब स्थिति को सही करने में हम समय नहीं गंवा सकते। हमें तुरंत पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया प्रधान नियुक्त कर देना चाहिए।

कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, सिद्धू के इस्तीफे से कांग्रेस आलाकमान सख्त नाराज है और उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस कारण ही पार्टी नेतृत्व ने सिद्धू से अब तक बात भी नहीं की है। हालांकि, सिद्धू का इस्तीफा भी स्वीकार नहीं किया गया है। कहा जा रहा था कि पंजाब प्रभारी हरीश रावत बुधवार को चंडीगढ़ जाएंगे लेकिन फिलहाल उनका दौरान भी टल गया है।

वजह भी साफ है। आलाकमान ने सिद्धू को प्रदेश में पार्टी की कमान सौंपी ताकि अगले चुनावों के लिए पार्टी को मजबूत किया जा सके। लेकिन सिद्धू ने इसके उलट मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ ही सियासी उठापटक शुरू कर दी। गुटबाजी, नाराजगी और खेमेबाजी के बाद आलाकमान ने कैप्टन का इस्तीफा भी ले लिया। इसके बाद सिद्धू की पसंद माने जाने वाले चरनजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन उनके कैबिनेट मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा क्या हुआ, सिद्धू ने प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देकर सनसनी मचा दी।

यही नहीं, बल्कि एक अलग तरह की खेमेबाजी शुरू हो गई और सिद्धू के पीछे-पीछे महज दो दिन पहले कैबिनेट में शामिल हुईं रजिया सुल्ताना ने भी इस्तीफा दे दिया। यही नहीं बल्कि, इस्तीफा देते वक्त उन्होंने खुले तौर पर सिद्धू के समर्थन में ऐसा किए जाने की बात भी कह दी।

यह भी खबर आई कि इसके बाद सिद्धू के पटियाला स्थित आवास पर मंगलवार की रात एक बैठक भी हुई, जिसमें चन्नी कैबिनेट के एक मंत्री परगट सिंह भी शामिल हुए। हालात साफ हैं और इन हालातों को कांग्रेस आलाकमान भी अच्छे से समझ रहा है। लिहाजा, अब यह तय नजर आ रहा है कि इस बार कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से हुई किरकिरी को बर्दाश्त नहीं करेगी।

वैसे पार्टी सूत्रों की मानें तो सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार नहीं कर कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व उन्हें समय देना चाहता है लेकिन अगर वह नहीं माने तो सख्त कदम भी उठाया जा सकता है। सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने आज कैबिनेट की बैठक बुलाई है। खबरों की मानें तो आज की कैबिनेट में जो मंत्री नहीं आएंगे उनपर भी कार्रवाई हो सकती है।

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