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समाज

Attack on Christian : यूसीएफ का दावा, भारत में 2022 के पहले 7 महीनों में ईसाइयों पर हुए 300 से अधिक हमले

Janjwar Desk
8 Sept 2022 12:17 PM IST
Attack on Christian : यूसीएफ का दावा, भारत में 2022 के पहले 7 महीनों में ईसाइयों पर हुए 300 से अधिक हमले
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Attack on Christian : यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम ( UCF ) ने दावा किया है कि 2022 के पहले सात महीनों में देश में ईसाइयों खिलाफ उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा हमले हुए।

Attack on Christian : देशभर में अपराध को लेकर एनसीआरबी द्वारा डेटा जारी करने के बाद एक गैर-सरकारी संगठन ने ईसाइयों के खिलाफ साल 2022 के पहले महीनों में 300 से ज्यादे हमले होने का दावा किया है। संगठन ने यह दावा एक हेल्पलाइन नंबर पर मदद के लिए आई फोन कॉल्स के आधार पर दावा किया है। गैर सरकारी संगठन का दावा है कि जनवरी से लेकर जुलाई 2022 तक देश के अलग-अलग हिस्सों में ईसाइयों पर 300 से अधिक हमले हुए हैं। इनमें हमलों में मौखिक, शारीरिक और कानून प्रवर्तक एजेंसियों की मदद से हुए हमले भी शामिल हैं।

गैर सरकारी संगठन यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम ( United Christian Forum) के मुताबिक 2022 के पहले सात महीनों में ईसाइयों के खिलाफ 302 हमले हुए। फोरम ने यह डेटा उसके पास उसकी हेल्पलाइन पर आये मदद मांगने वाले फोन कॉल के आधार पर जुटाए हैं। यूसीएफ ने इस हेल्पलाइन सेवा की शुरुआत 19 जनवरी 2022 को की थी। इस सेवा का हेल्पलाइन नंबर 1800 208 4545 है। हेल्पलाइन शुरू करने का मकसद संकट में फंसे लोगों, विशेष तौर पर जिन्हें कानून की जानकारी नहीं है, को मदद और कानूनी सहायता प्रदान करना है।

ईसाइयों के खिलाफ यूपी में सबसे ज्यादा हमले

यूसीएफ ने द वायर के साथ अपने डेटा में बताया है कि साल 2022 के जनवरी से जुलाई के बीच अलग-अलग राज्यों में रहने वाले ईसाइयों पर ये हमले हुए हैं। ईसाइयों के खिलाफ सबसे ज्यादा हमले उत्तर प्रदेश से सामने आया है। यूपी में ईसाइयों पर 80 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ का नंबर आता है जहां ऐसे 60 मामले दर्ज किए गए हैं। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य और यूसीएफ के राष्ट्रीय समन्वयक एसी माइकल ने कहा कि भारत में दो अल्पसंख्यक समुदाय निशाने पर हैं। मुस्लिम और ईसाई पर सबसे ज्यादा हमले हो रहे हैं।

मर्जी से धर्म बदलने वालों पर हमला क्यों?

यूसीएफ का कहना है कि जब हम हमलों की बात करते हैं तो हमारा मतलब सिर्फ शारीरिक हमलों से नहीं होता है। हमें तथाकथित धर्मांतरण विरोधी कानूनों को भी ध्यान में रखना होता है। जब हम धर्म की स्वतंत्रता की बात करते हैं तो ये कानून लोगों को उनके द्वारा चुने गए धर्म का पालन करने की शक्ति नहीं देते। माइकल पूछते हैं कि न्यायपालिका को ऐसे कानूनों की जरूरत को समझने के लिए सरकारों से सवाल करने की जरूरत है कि कितने लोगों का जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन लोगों का क्या जो अपनी मर्जी से अपना धर्म बदल रहे हैं।

स्वयं सेवी रिपोर्ट के आधार पर हम कार्रवाई नहीं कर सकते

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ईसाइयों पर हमलों के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह करने वाली जनहित याचिका विभिन्न समाचार संगठनों की स्वयं सेवी रिपोर्ट पर आधारित है, इसलिए इस पर सुनवाई नहीं होना चाहिए। 162 केस जमीनी स्तर पर की गई पुष्टि में फर्जी पाए गए हैं। दरअसल, नेशनल सॉलिडेरिटी फोरम और इवेंजेलिकल फेलोशिप ऑफ इंडिया बेंगलुरू के आर्कबिशप पीटर मचाडो की ओर से दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। ईसाइयों के खिलाफ अत्याचारों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। इसमें याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि जनवरी से दिसंबर 2021 के बीच ईसाई समुदाय के खिलाफ 505 से अधिक हमले हुए और 2022 में इस संख्या में वृद्धि हुई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर जनहित याचिका में उल्लेखित 10 फीसदी मामले भी सही हैं तो इस मुद्दे की गहराई में जाने की जरूरत है। उसने केंद्रीय गृह मंत्रालय से 8 राज्यों से ईसाइयों पर हुए हमलों से संबंधित रिपोर्ट मांगने के लिए कहा है।

इस मसले पर सुनवाई के दौरान बीते एक सितंबर को याचिकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने बताया कि पिछले एक साल में ईसाई समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा की 700 से अधिक घटनाएं दर्ज हुई हैं। याचिका में दावा किया गया है कि अकेले इसी साल मई में 57 से अधिक मामले मामले सामने आये थे।

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