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प्यारे मियां कांड: हाथरस की तरह पुलिस बच्ची की लाश ले गयी श्मशान, मां घर पर करती रही इंतजार

Janjwar Desk
22 Jan 2021 10:23 AM GMT
प्यारे मियां कांड: हाथरस की तरह पुलिस बच्ची की लाश ले गयी श्मशान, मां घर पर करती रही इंतजार
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यौन शोषण का सरगना प्यारे मियां और एमपी पुलिस ने फिर दोहरायी हाथरस की अमानवीयता

प्यारे मियां यौन शोषण की शिकार मरने वाली बच्ची की मां कहती है, मैं 6 महीने से अपनी बेटी मांग रही थी लेकिन बालिका गृह वालों ने उसे मुझे नहीं सौंपा। मुझे सिर्फ सात बार उससे मिलने दिया गया, मेरी बेटी अपराधी नहीं थी, फिर उसे कैदियों की तरह क्यों रखा...

जनज्वार। पुलिस प्रशासन का निर्मम चेहरा आये दिन सामने आता रहता है। अभी भी हाथरस दुष्कर्म की यादें सबके जेहन से उतरी नहीं होंगी कि अमानवीयता की शिकार बनी दलित युवती के साथ यूपी पुलिस भी कम नृशंस नहीं बनी थी। मां-बाप की इजाजत के बगैर हाथरस पुलिस ने युवती का अंतिम संस्कार कर दिया था।

अब मध्य प्रदेश में भी पुलिस ने एक ऐसी ही अमानवीयता की मिसाल पेश की है। यहां पुलिस ने प्यारे मियां यौन शोषण केस की शिकार नाबालिग बेटी और उसके परिवार के साथ हाथरस दोहराया। नाबालिग बच्ची की 20 जनवरी को ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियां खा लेने के बाद मौत हो गयी थी, जिसे पुलिस मां-बाप को बताये बिना श्मशान ले गयी और उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

घर में प्यारे मियां यौन शोषण केस की शिकार बनी नाबालिग की मां अपनी बच्ची का इंतजार करती रही, लेकिन पुलिस शव को सीधे श्मशान लेकर चली गई। हालांकि पुलिस इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। गुरुवार 21 जनवरी को पुलिस की निगरानी में दोपहर 1.30 बजे बच्ची का भदभदा विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

गौरतलब है कि भोपाल के हाई प्रोफाइल प्यारे मियां यौन शोषण केस की शिकार नाबालिग ने ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियां खा ली थी, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार 20 जनवरी को उसकी मृत्यु हो गई थी। बुधवार 20 जनवरी को पीड़िता की मां को बेटी की मौत की खबर इसलिए नहीं दी गई थी कि कहीं उन्हें सदमा न पहुंचे, मगर जब मां ने जब अपनी बेटी के शव को देखा तो वे स्तब्ध रह गईं। उनकी आंखें खुलीं थीं और जुबां थमी हुई थी। थोड़ी देर बाद वह बेहोश हो गईं, बाद में चेहरे पर पानी के छींटे डालकर उन्हें होश में लाया गया।

पीड़िता की मां रोते-रोते एक ही रट लगाये जा रही थी कि मेरी बेटी की क्या गलती थी, जो पुलिस व प्रशासन ने उसके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया। बेटी अस्पताल में तड़पती रही, तो भी हमें उससे नहीं मिलने दिया। हम उसकी शादी के सपने संजो रहे थे और हमारे सपने ही उजड़ गए। बेटी को वैदिक रीति.रिवाज के साथ हम विदा नहीं कर पाए। पुलिस पर आरोप है कि पीड़िता की मां और परिजन घर पर बेटी के शव का इंतजार करते रहे, लेकिन पुलिस उन्हें शव सौंपना ही नहीं चाहती थी।

हालांकि इसी बीच बैरागढ़ एसडीएम मनोज उपाध्याय ने हमीदिया पहुंचकर परिजनों को दो लाख रुपये का चेक दिया और माहौल बिगड़ता देख हबीबगंज सीएसपी भूपेंद्र सिंह ने पीड़िता के पिता व चाचा को शव वाहन में बैठाकर विश्राम घाट भेजा।

काफी हो-हंगामे के बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम घर से मृतका की मां और कुछ महिलाओं को गाड़ी में बैठाकर विश्राम घाट ले आई। मृतक बच्ची की मां ने महिला थाना प्रभारी अजिता नायर, बाल कल्याण समिति के कृपा शंकर चौबे और बालिका गृह की अधीक्षिका अंतोनिया पर उनकी बेटी को जबरन नींद की गोलियां खिलाने का आरोप लगाया है और मांग की है कि इस मामले की सीबीआई की जाये।

भोपाल के चर्चित प्यारे मियां केस में यौन शोषण की शिकार नाबालिग लड़की की मौत के बाद सवाल उठने शुरू हो गये हैं कि आखिर बच्ची को नींद की गोलियां मिली कहां से। बालिका गृह प्रबंधन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और जिला प्रशासन अब तक यह नहीं पता कर पाया है कि बच्ची ने नींद की गोलियां खाईं या उसे जहर दिया गया? जब बालिका गृह में खाने की हर चीज की जांच की जाती है तो बच्ची तक जहर या नींद की गोलियां पहुंची कैसे।

गौरतलब है कि जुलाई 2020 में भोपाल में चार नाबालिग समेमत पांच लड़कियों ने 68 वर्षीय पत्रकार प्यारे मियां उर्फ अब्बा पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। इसके बाद प्यारे मियां को गिरफ्तार कर लिया गया और अभी वह सलाखों के पीछे है।

इस 5 लड़कियों में से एक द्वारा 18 जनवरी को ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियां खाने की खबर आयी, जिसके बाद उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आईडी चौरसिया ने बताया कि नाबालिग जब अस्पताल में भर्ती हुई थी, तब उसकी धड़कन 92 प्रति मिनट और ब्लड प्रेशर 100/60 था। उसकी हालत लगातार खराब होती गयी और 20 जनवरी को उसने दम तोड़ दिया।

प्यारे मियां यौन शोषण की शिकार रही नाबालिग के चाचा कहते हैं, बच्ची की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन पहले हम पर शव ले जाने के लिए दबाव बना रहा था, बाद में पोस्टमॉर्टम होने की जानकारी दी गई। वहीं, नाबालिग की मां कहती है, मैं 6 महीने से अपनी बेटी मांग रही थी लेकिन बालिका गृह वालों ने उसे मुझे नहीं सौंपा। मुझे सिर्फ सात बार उससे मिलने दिया गया। मेरी बेटी अपराधी नहीं थी, फिर उसे कैदियों की तरह क्यों रखा?

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