Kiran Mazumdar Shaw की चेतावनी, 'बढ़ रहा धार्मिक विभाजन, IT और बायोटेक में देश का वैश्विक नेतृत्व दांव पर'

Kiran Mazumdar Shaw : 'राज्य में बढ़ रहा धार्मिक विभाजन, IT और बायोटेक में देश का वैश्विक नेतृत्व दांव पर'
Kiran Mazumdar Shaw : कर्नाटक में मंदिर फेस्टिवल से मुस्लिम व्यापारियों को बाहर रखने के कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी समूहों के प्रयासों को लेकर बायोकॉन लिमिटेड की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार शॉ (Kiran Mazumdar Shaw) ने चिंता जाहिर की है और राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) से इस समस्या को हल करने का आग्रह किया है। किरण मजूमदार शॉ ने कहा कि कर्नाटक ने हमेशा समावेशी आर्थिक विकास किया है और हमें इस तरह के सांप्रदायिक बहिष्कार की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि राज्य में धार्मिक विभाजन बढ़ रहा है और तकनीकी और बायोटेक में देश का वैश्विक नेतृत्व दांव पर है।
Karnataka has always forged inclusive economic development and we must not allow such communal exclusion- If ITBT became communal it would destroy our global leadership. @BSBommai please resolve this growing religious divide🙏 https://t.co/0PINcbUtwG
— Kiran Mazumdar-Shaw (@kiranshaw) March 30, 2022
किरण मजूमदार शॉ ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री बसवराज को भी टैग किया है और उनसे आग्रह किया है कि इस बढ़ते सांप्रदायिक विभाजन का कुछ हल निकालें। एक अन्य ट्वीट में मजूमदार ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री बहुत प्रगतिशील नेता हैं। मुझे पूरा यकीन है कि वह इस मुद्दे को जल्दी हल करेंगे।
Our CM is a very progressive leader. I am sure he will resolve this issue soon https://t.co/Jlzjg77keE
— Kiran Mazumdar-Shaw (@kiranshaw) March 30, 2022
बता दें कि इससे पहले ऐसी रिपोर्ट्स सामने आयीं थीं कि मंदिर के बाहर कई मुस्लिम विक्रेताओं का बहिष्कार करने का अभियान कस्बों-शहरों में फैल रहा है जिसके चलते कई स्थानीय व्यवसाय बंद हो गए हैं। त्योंहारों का आयोजन करने वाली कई मंदिर समितियों ने प्रतिबंधों पर निराशा व्यक्त की है और कहा है कि ये प्रतिबंध लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक संबंधों पर हमला करते हैं। यह प्रतिबंध राज्य के सरकारी कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबंध के बाद आया है जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।
मैंगलुरु के नजदीक बप्पानाडू की दरगाह को सांप्रदायिक सद्भाव की पहचान माना जाता रहा है। दुर्गापरमेश्वरी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि उसे एक मुस्मिम व्यापारी के सहयोग से ही बनवाया गया था। इस मंदिर समिति के प्रमुख ने कहा है कि उन्होंने विश्व हिंदू परिषद द्वारा मुस्लिम दुकानदारों को दुकान न लगाने देने की मांग ठुकरा दी है।











