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बिहार की हर 5 में से 4 महिलाओं ने कभी इंटरनेट का नहीं किया इस्तेमाल, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Janjwar Desk
18 Dec 2020 6:53 AM GMT
बिहार की हर 5 में से 4 महिलाओं ने कभी इंटरनेट का नहीं किया इस्तेमाल, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
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आंकड़ों से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों के लोगों और खासकर पुरुषों की ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में इंटरनेट की अधिक पहुंच है...

अनु भुयान की रिपोर्ट

जनज्वार। भारत में पहली बार एक सरकारी सर्वेक्षण में लोगों से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी इंटरनेट का उपयोग किया है। यह सवाल पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) का हिस्सा था, जिसके लिए हाल ही में आंकड़े जारी किए गए हैं। सर्वेक्षण पिछले साल आयोजित किया गया था।

बिहार में सबसे कम (20.6%) प्रतिशत में महिलाओं ने कहा कि उन्होंने इंटरनेट का उपयोग किया है, वहीं सिक्किम में यह प्रतिशत उच्चतम (76.7%) है। पुरुषों में यह प्रतिशत मेघालय में सबसे कम (42.1%) और गोवा (82.9%) में सबसे अधिक था।

एनएफएचएस के नए आंकड़े आंशिक हैं - इनमें केवल 22 राज्यों के परिणाम हैं, इनमें उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्य गायब हैं। इस प्रकार अभी तक इस सर्वेक्षण के आंकड़ों को पूरी तरह से डिकोड करना संभव नहीं हो सका है। इस रिपोर्ट में चर्चा किए गए परिणाम अकेले इस पहले चरण के हैं, और राज्यों और शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों और महिलाओं के बीच इंटरनेट के उपयोग में व्यापक बदलाव दिखाते हैं।

हालाँकि, जब से दुनिया में कोविड-19 महामारी सामने आई है, काम, शिक्षा और चिकित्सा परामर्श जैसे कार्यों का एक बड़ा हिस्सा लाखों लोगों के लिए ऑनलाइन हो गया है और यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रह सकती है। इसके लिए भारत सरकार अधिक से अधिक भारतीयों को ऑनलाइन लाने की डिजिटल महत्वाकांक्षा रखती है।

ऐसे में इस विशेष सर्वेक्षण प्रश्न के लिए प्राप्त डेटा महत्वपूर्ण हैं। सरकार की अपनी योजनाओं और सार्वजनिक वितरण सेवाओं, जैसे किसानों के लिए सरकार द्वारा ट्रैक्टरों को किराए पर लेना और मौसम की जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट तक पहुंच महत्वपूर्ण है।

क्या आपने कभी इंटरनेट का इस्तेमाल किया है?

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार साल 2019 तक भारत में 718.75 मिलियन इंटरनेट या ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ता थे, जो 2018 के मुकाबले 19% तक ज्यादा थे।

'यह सवाल दो तरह से मददगार है,' इंटरनेट डेमोक्रेसी प्रोजेक्ट की निदेशक अंजा कोवाक्स, जो इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर काम करती हैं, ने कहा 'पहला यह है कि यह इंटरनेट के बारे में जागरूकता के प्रसार का संकेत देता है। दूसरा यह कि यह एक उपयोगी आधार रेखा है: भविष्य के सर्वेक्षणों में, इन संख्याओं को ऊपर जाना चाहिए, जो इस जागरूकता के और अधिक प्रसार का संकेत देता है।"

हालांकि, सिर्फ यह पता लगाना कि क्या लोगों ने 'कभी' इंटरनेट का उपयोग किया है, यहां तक ​​कि एक बार भी, इंटरनेट के साथ भारत के जुड़ाव को समझने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं दे सकता है। एनएफएचएस में भी इंटरनेट से संबंधित कुछ और प्रश्न थे: '[आपके पास है] इंटरनेट पर परिवार नियोजन के बारे में कुछ भी देखा?' 'एचआईवी / एड्स के बारे में आपने किन-किन स्रोतों से जानकारी हासिल की है?' जिसके लिए इंटरनेट भी उत्तर के विकल्पों में से एक था।

'ये आंकड़े इंटरनेट के नियमित उपयोग के बारे में कुछ भी नहीं कहते हैं, जो वास्तव में मायने रखता है। बल्कि ये आंकड़े केवल उसी के बारे में हैं, जिसने कभी इंटरनेट का उपयोग किया है,' कोव्स ने कहा।

'वे इस मामले पर निर्णायक स्थिति में नहीं हैं और आगे की जांच की आवश्यकता होगी। वास्तव में, आदर्श रूप से, इस प्रश्न 'क्या आपने कभी इंटरनेट का उपयोग किया है?' के बाद दूसरे प्रश्न का भी इस्तेमाल करना चाहिए कि हाल के इंटरनेट का इस्तेमाल कितना नियमित है। कभी इंटरनेट का किया गया इस्तेमाल जागरूकता का एक अच्छा संकेत है, लेकिन वास्तविक रूप से कितनी बार इस्तेमाल हुआ, यह महत्वपूर्ण है।' उन्होंने कहा।

अधिक इंटरनेट उपयोग के डेटा की कमी ने कुछ विशेषज्ञों को आश्चर्यचकित नहीं किया है। 'आईटी फॉर चेंज,' जो सामाजिक इक्विटी के लिए डिजिटल तकनीक का लाभ उठाने पर काम करता है, की कार्यकारी निदेशक अनीता गुरुमूर्ति ने कहा, "मुझे डेटा में अधिक इंटरनेट उपयोग देखने की उम्मीद नहीं थी।'

'निजी इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंटरनेट उपयोग के बारे में सोचने का एकमात्र तरीका नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों और अस्पतालों जैसे सार्वजनिक संस्थानों को स्थिर ब्रॉडबैंड की आवश्यकता है। बिजली और ब्रॉडबैंड में पर्याप्त निवेश के बिना मोबाइल-आधारित इंटरनेट का उपयोग केवल कहानी का एक हिस्सा भर है, इससे डिजिटल सक्षम होना संभव नहीं है। इस तरह की बुनियादी सुविधाओं के साथ इंटरनेट का व्यक्तिगत उपयोग निश्चित रूप से एक से दूसरे हाथ को जाएगा।'


इंटरनेट पर पुरुष बनाम महिला

महिलाओं ने इस सवाल पर एक बड़े अंतर से पुरुषों की तुलना में खराब प्रदर्शन किया कि क्या उन्होंने कभी इंटरनेट का उपयोग किया था। बिहार में इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या सबसे कम, केवल 20.6% थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने इंटरनेट का इस्तेमाल किया है।

राज्य में 79.4% महिलाओं ने कहा कि वे कभी भी ऑनलाइन नहीं थीं। स्पेक्ट्रम के विपरीत छोर पर सिक्किम था जहां 76.7% महिलाओं ने कहा कि उन्होंने इंटरनेट का उपयोग किया था। जिस राज्य में सबसे कम लोगों ने कभी इंटरनेट एक्सेस किया था, वह राज्य मेघालय था, जहां 42.1% पुरुषों ने कहा था कि उनके पास इंटरनेट की सुविधा है। इस बीच, गोवा 82.9 प्रतिशत के आंकड़े के साथ उन सबसे अधिक पुरुषों का राज्य था, जिन्होंने कहा था कि उन्होंने इंटरनेट का उपयोग किया था।

पुरुषों और महिलाओं की इंटरनेट तक पहुंच के बीच असमानता को समझाने के लिए, गुरुमूर्ति ने बताया कि शिक्षा, रोजगार और आय में लैंगिक असमानता कैसे लिंग असमानताओं को ऑनलाइन निर्धारित करती है। गुरुमूर्ति ने कहा, "लिंग आधारित उत्पीड़न, ऑनलाइन ट्रोलिंग और पुलिसिंग आत्म-अनुशासन के रूप में नकारात्मक परिणाम पैदा करता है, हालांकि युवा महिलाएं ऑनलाइन सामाजिक संपर्क के माध्यम से अपनी व्यक्तित्व और पहचान बनाने की कोशिश कर सकती हैं।"

मोबाइल फोन से महिलाओं का सशक्तिकरण

इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन के वकील और कार्यकारी निदेशक अपार गुप्ता ने कहा कि इंटरनेट के शहरी बनाम ग्रामीण उपयोग में असमानता और पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता पहले से ही अच्छी तरह से जानी जाती है। "ब्रॉडबैंड इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से ग्रामीण आबादी या महिलाओं के बीच उच्चतर इंटरनेट उपयोग होगा, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है।"

उन्होंने कहा कि इसके लिए बड़े पहल की आवश्यकता होगी, जैसे कि स्थानीय समुदायों और गैर-लाभकारी संगठनों के साथ काम करना।

जबकि नवीनतम एनएफएचएस ने पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए इंटरनेट के उपयोग पर सवाल पेश किया था। पिछले सर्वेक्षण ने विशेष रूप से महिलाओं के लिए एक सवाल पेश किया था: क्या उनके पास एक मोबाइल फोन था और क्या वे उस पर एक एसएमएस पढ़ सकते थे। हालिया सर्वेक्षण में यह सवाल दोहराया गया था।

इस सवाल को "महिला सशक्तीकरण" श्रेणी में शामिल किया गया था, साथ ही अन्य प्रश्न जैसे कि क्या महिलाएं घरेलू फैसलों का हिस्सा थीं, उनके पास बैंक खाता, स्वामित्व वाली जमीन थी और उन्हें कैसे भुगतान किया गया, भी शामिल किए गए थे।

2015-16 की चौथी एनएफएचएस के अनुसार, भारत के शहरी क्षेत्रों में 61.85% महिलाएं, ग्रामीण क्षेत्रों में 36.9%, और कुल मिलाकर 45.9% महिलाओं ने कहा था कि उनके पास एक मोबाइल फोन था जिसका "वे स्वयं उपयोग करती हैं।" दो-तिहाई लोगों ने कहा कि उनके पास एक फोन था, उन्होंने यह भी कहा कि वे इस पर संदेश पढ़ सकते हैं।

जहां तक ​​महिलाओं के मोबाइल फोन के उपयोग का संबंध है, 22 राज्यों के इस साल के एनएफएचएस डेटा में सुधार दिखाई देता है। आंध्र प्रदेश में, 2015-16 में, केवल 36.2% महिलाओं ने कहा था कि वे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करती हैं, जो देश में सबसे कम है।

नवीनतम आंकड़ों में, गुजरात में मोबाइल फोन का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत सबसे कम 48.8% है। पिछले एनएफएचएस में भारत में महिलाओं द्वारा मोबाइल फोन का सबसे अधिक उपयोग 81.2% के साथ केरल में दर्ज किया गया था। इस साल, गोवा में 91.2% के साथ महिला सेलफोन उपयोगकर्ताओं का प्रतिशत सबसे अधिक है।

चौथे एनएफएचएस ने मोबाइल फोन के स्वामित्व को उम्र के साथ दर्ज किया था: यह 15-19 वर्ष की महिलाओं के लिए 25%, 25-29 वर्ष की महिलाओं के लिए 56% थी। हालांकि, संदेश पढ़ने की क्षमता उम्र के साथ कम हो गई: 15-19 वर्ष की महिलाओं के लिए 88% और 40-49 आयु वर्ग की महिलाओं के लिए 48%। अपने स्वयं के मोबाइल फोन का स्वामित्व और उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी में अधिक था और संपत्ति बढ़ने के साथ यह भी बढ़ा।


(Indiaspend.com पर अनु भुयान की अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट से अनुदित)

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