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Video : मोरबी हादसे के वो गुमनाम हीरो जिन्हें न मीडिया पूछ रहा न सरकार, बचाई थीं दर्जनों जानें

Janjwar Desk
10 Nov 2022 1:12 PM GMT
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Video: गुजरात के मोरबी (Morbi) में मच्छु नदी पर बना झूलता हुआ (Morbi Bridge Collapse) पुल सैंकड़ों जाने निगल गया। मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जो असल दोषी थे वे सामने होकर भी साफ-साफ बच निकले या यूं कहें कि बचा लिये गये...

Video: गुजरात के मोरबी (Morbi) में मच्छु नदी पर बना झूलता हुआ (Morbi Bridge Collapse) पुल सैंकड़ों जाने निगल गया। मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जो असल दोषी थे वे सामने होकर भी साफ-साफ बच निकले या यूं कहें कि बचा लिये गये। लेकिन इस बीच हादसे में ऐसे लोग भी रहे जिन्होने धर्म-मजहब की परवाह किये बगैर दर्जनों जिंदगियां मौत के मुँह में जाने से खींच लाए। ये हमारे समाज के ऐसे असली नायक हैं जिन्हें तब से अब तक ना मीडिया (Media) ने पूछा और ना ही सरकार (Government) ने ही।

जनज्वार संवाददाता ने मोरबी की मच्छु नदी के किनारे मकरानी वास के ऐसे की लोगों से बात की जिनने मौत (Death) के मुँह में गिरे लोगों को नई जिंदगी दी। मोरबी हादसे के ऐसे ही रियल हीरोज जिनमें अख्तर इब्राहिम मकरानी, अलीभाई गुलामभाई चानिया, सिकंदर भाई मकरानी, हुसैन हाजीभाई मकरानी ने हमसे बात करते हुए उस दिन का पूरा हादसा ज्यों का त्यों बताया। कि उस दिन किस तरह की आफत टूट पड़ी थी लोगों पर।

अलीभाई गुलामभाई ने हमसे बात करते हुए कहा कि, उस दिन इरफान भाई पेरोल पर आए हुए थे। उन्हें वापिस जेल (Jail) जाना था। हमारे पास फोन आ रहा था। हमें उनके पास पहुँचना था। इसी बीच इरफान भाई का फोन आया कि जल्दी आओ। यहां मच्छु वाला पुल गिर गया (Morbi Bridge Collapse) है..लोग मर रहे हैं। हम लोग सारा काम-धंधा छोड़कर भागे। वहां पहुँचकर देखा तो हाय-तौबा मची हुई थी। हम लोगों ने गाड़ी एक तरफ लगाकर तुरत जैसे हो सका लगों को बचाया।

हमने उनसे बात करते हुए पूछा कि क्या उस वक्त लोगों की जान बचाते हुए आपके मन में हिंदू-मुसलमान (Hindu-Muslim) वाली भावना थी? जिसपर इब्राहिम मकरानी कहते हैं..नहीं भाई अल्ला रहम करे, ऐसे समय हिंदू-मुसलमान (Hindu-Muslim) करके क्या दोजख में हमको जाना है। औरतें, बच्चे चीख रहे थे। हम हिंदू-मुसलमान करते तो लानत है ऐसी जिंदगी पर। उस समय हम लोगों को यही लग रहा था कि कितने ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके।

मच्छु नदी के दूसरी छोर रहने वाले हुसैन हाजीभाई कहते हैं, उस दिन तो ऐसा लगा मानों कौन सी आफत टूट पड़ी है। अब से पहले हमने फिल्मों में ही इस तरह का नजारा देखा था। असल में उस दिन ही देखा था। हर तरफ लोग चीख रहे थे। अपनो को खोज रहे थे। इतने लोगों की जिंदगी बचाने के बाद लोग उन्हें पूछ नहीं रहे पर सवाल पूछने पर हाजीभाई कहते हैं, भाई हमें कोई पूछे ना पूछे हमें हमारा अल्लाह देख रहा है। हमारे कर्म वो लिख रहा है। हम जैसा करेंगे उसे देखना है। कोई देखे, या ना पूछे कोई फर्क नहीं है।

इस बीतचीत की पूरी Video इस लिंक के साथ ही उपर भी देखी जा सकती है

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