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अफ्रीकी देशों ने नस्लीय भेदभाव और हिंसा को लेकर UN HUMAN RIGHTS COUNCIL को लिखा पत्र, बहस कराने की मांग

Janjwar Desk
13 Jun 2020 12:12 PM GMT
अफ्रीकी देशों ने  नस्लीय भेदभाव और हिंसा को लेकर UN HUMAN RIGHTS COUNCIL को लिखा पत्र, बहस कराने की मांग
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जॉर्ज फ्लोयड के परिजनों, पुलिस की बर्बरता के अन्य पीड़ितों के रिश्तेदारों और लगभग 600 गैर सरकारी संगठनों ने परिषद से प्रणालीगत नस्लवाद और पुलिस हिंसा के मुद्दे को तत्काल संबोधित करने का आग्रह किया।

जनज्वार ब्यूरो। अफ्रीकी देशों ने शुक्रवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद से आह्वान किया कि वे संयु्क्त राज्य अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद बढ़ते विरोध और दुनिया के अन्य हिस्सों में बढ़ते नस्लवाद और पुलिस की दबंगई पर तुरंत बहस करें।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में बुर्किना फासो के राजदूत ने 54 अफ्रीकी देशों की ओर से पत्र लिखा और संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय से आह्वान किया कि नस्लीय रूप में मानवाधिकारों का उल्लंघन, अफ्रीकी मूल के लोगों के किलाफ पुलिस की बर्बरता और शांतिपूर्ण विरोध के खिलाफ हिंसा को लेकर तत्काल बहस करने के लिए कहें।

पत्र में अनुरोध किया गया है कि कोरोना महामारी के बाद परिषद का रोके गए 43 वां सत्र अगले सप्ताह जब फिर शुरु होगा तो इस पर बहस की जाए। जॉर्ज फ्लोयड के परिवार, पुलिस की बर्बरता के अन्य पीड़ितों के रिश्तेदारों और लगभग 600 गैर सरकारी संगठनों ने परिषद से प्रणालीगत नस्लवाद और पुलिस हिंसा के मुद्दे को तत्काल संबोधित करने का आग्रह किया।

परिषद को इस तरह के अनुरोध पर विचार करने के लिए कम से कम एक राज्य के द्वारा सपोर्ट किए जाने की आवश्यकता है। बता दें कि 25 मई को अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में एक 46 वर्षीय निहत्थे अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की तब मौत हो गई थी जब एक श्वेत पुलिस अधिकारी ने नौ मिनट तक उसकी गर्दन को अपने घुटनों से दबाकर रखा था।

राजदूत डायडोन्ने डिजायर सौगोरी ने परिषद को लिखे पत्र में लिखा, अफसोस की बात है कि कई अन्य पीड़ितों ने दुर्भाग्य से किसी का ध्यान अपनी ओर नहीं खींचा क्योंकि वह सभी को देखने के लिए किसी सोशल मीडिया पर कैद नहीं किए गए। जॉर्ज फ्लॉयड की मौत का वीडियो कैद किया गया था जिसने अमेरिका और दुनियाभर में अशांति फैला दी है।

उन्होंने लिखा, 'अमेरिका में काले रंग और अन्य रंग के लोगों के साथ भेदभाव के खिलाफ दुनियाभर में जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं वे मौलिक नस्लीय असमानता और भेदभाव की अस्वीकृति हैं।' संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की अध्यक्ष एलीज़ाबेथ टिची-फ़िसलबर्गर द्वार सोमवार को बहस के लिए प्रस्तावित दिन की घोषणा करने की उम्मीद है। जब तक कोई आपत्ति न हो, बहस आगे बढ़ने की संभावना है।

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