बिहार चुनाव 2020

बिहार चुनाव का पहला चरण : मगध, भोजपुर और अंग में NDA-महागठबंधन के सामने LJP व RLSP की चुनौती

Janjwar Desk
27 Oct 2020 8:27 AM GMT
बिहार चुनाव का पहला चरण : मगध, भोजपुर और अंग में NDA-महागठबंधन   के सामने LJP व RLSP की चुनौती
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file photo

बिहार विधानसभा चुनाव में यूं तो सीधा मुकाबला एनडीए व महागठबंधन के बीच है, लेकिन कई सीटों पर लोजपा व रालोसपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दोनों बड़े गठबंधन के बीच मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया है...

जनज्वार। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए बुधवार को पहले चरण में 71 सीटों के लिए मतदान होगा। इस चरण में प्रमुख रूप से मगध और अंग क्षेत्र की सीटों के लिए मतदान होना है। इस चरण में भोजपुरी भाषी क्षेत्र के भी एक हिस्से में मतदान है। भोजपुरिया इलाके के तीन जिलों भोजपुर, बक्सर व सासाराम में इस चरण में मतदान है।

पहले चरण में 16 जिलों की 71 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। इन 71 सीटों में 13 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं जबकि एक कटोरिया अनुसचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। मगध क्षेत्र का केंद्र पटना व अगं क्षेत्र का केंद्र भागलपुर को माना जाता है।

पहले चरण में हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, भाजपा से निष्कासित राजेंद्र सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी व अर्जुन पुरष्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय शूटर श्रेयसी सिंह, राजद के वरिष्ठ नेता जय प्रकाश नारायण यादव के भाई विजय प्रकाश यादव व बेटी, नीतीश सरकार में मंत्री व भाजपा नेता प्रेम कुमार, जदयू नेता व मंत्री जय कुमार सिंह, पटना के बांकीपुर से शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा, पुलुरल्स पार्टी की अध्यक्ष व जदयू के नेता विनोद चैधरी की बेटी पुष्पम प्रिया चौधरी मैदान में हैं।

2015 से अलग है इस बार का चुनाव

बिहार विधानसभा का इस बार का चुनाव 2015 के चुनाव से अलग है। इस बार चिराग पासवान की पार्टी लोजपा व उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा ने पहले चरण की कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

चिराग पासवान ने लोजपा से अधिकतर उन्हीं उम्मीदवारों को टिकट दिया है जो प्रमुख रूप से भाजपा या फिर अन्य दलों में टिकट पाने से वंचित रह गए। जैसे दिनारा से चिराग ने भाजपा से अब निष्कासित राजेंद्र सिंह, अमरपुर से भाजपा से निष्कासित मृणाल शेखर को टिकट दिया है। इन उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी सीटों पर एनडीए-महागठबंधन उम्मीदवारों की मौजूदगी के बीच मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। ऐसा हाल कई दूसरी सीटों पर भी है।

उसी प्रकार उपेंद्र कुशवाहा ने मायावती की बसपा व असदु्दीन ओवैसी एमआइएम से गठजोड़ कर उम्मीदवार उतारा है। छह दलों के इस गठजोड़ के सीएम उम्मीदवार कुशवाहा घोषित किए गए हैं। कुशवाहा ने भी दूसरे प्रमुख दलों के असंतुष्टों को टिकट दिया है। जैसे जुमई में रालोसपा ने भाजपा के टिकट से वंचित रहे वहां के पूर्व विधायक अजय प्रताप को उम्मीदवार बनाया है। अजय प्रताप प्रभावशाली नेता नरेंद्र सिंह के बेटे हैं और वे एनडीए उम्मीदवार श्रेयसी सिंह और महागठबंधन उम्मीदवार विजय प्रकाश से सीधे मुकाबले में हैं।

2014 के चुनाव में लोजपा, रालोसपा जैसे दल एनडीए गठबंधन का हिस्सा थे और जदयू, राजद व कांग्रेस का महागठबंधन था। यानी इन दोनों गठजोड़ में इन प्रमुख दलों का आमने-सामने का मुकाबला था, लेकिन इस बार परिदृश्य बदला हुआ है। ऐसे में ये उम्मीदवार किसे जिताएंगे-हराएंगे या खुद जीतेंगे इसका आकलन करना मुश्किल है। हां, लेेकिन एक बात स्पष्ट है कि सबके दुश्मन नंबर वन नीतीश कुमार ही हैं।

चिराग पासवान हो या उपेंद्र कुशवाहा वे नीतीश सरकार के खिलाफ जांच करवाने व उन्हें जेल भेजने की बात करते हैं। चिराग खुले तौर पर खुद को भाजपा का सहयोगी घोषित करते हैं और उसके साथ सरकार बनाने की बात करते हैं। वहीं, राजद यह कहता रहा है कि उसका मुकाबला भाजपा से है और कुछ सीटों पर लोजपा से है, कहीं भी जदयू से मुकाबला नहीं है। यानी हर किसी के निशाने पर नीतीश कुमार व उनका जदयू है जो पिछले डेढ दशक से बिहार में काबिज है।

इस बार के चुनाव में वर्चुअली प्रचार हुआ है। युवाओं की संख्या बिहार में अच्छी है और उस पर लाॅकडाउन में बाहर से कामगार लौटे हैं जो अब दिवाली-छठ करके की वापस काम पर जाएंगे तो जाहिर है वे यहां वोट भी करेंगे। उनका मत इस चुनाव के परिणाम को प्रभावित करेगा। वरिष्ठ पत्रकार व प्रभात खबर भागलपुर के संपादक जीवेश रंजन सिंह कहते हैं कि कोरोना ने लोगों को और अधिक टेक्नो फ्रेंडली बना दिया है और लोग जागरूक हुए हैं। ऐसे में हवा-हवाई लोग नहीं चलेंगे और जो लोग क्षेत्र में हमेशा सक्रिय रहे हैं उन्हें पहचानेंगे।

पिछले चुनाव का क्या था परिदृश्य

पहले चरण की 71 सीटों में पिछली बार सबसे अधिक 25 राजद ने जीती थी। दूसरे नंबर पर 21 सीटें जदयू ने हासिल किया था। तब राजद-जदयू का मतबूत सामाजिक गठजोड़ था और कांग्रेस उनके साथ थी। 2015 के चुनाव में इस चरण की 14 सीटें भाजपा ने व आठ सीटें कांग्रेस ने हासिल की थीं। वहीं मांझी की पार्टी हम को एक, माले को एक व निर्दलीय ने एक सीट हासिल की थी। अब अगर मौजूदा एनडीए के दलों के हिसाब से देखें तो उनके पास 36 व महागठबंधन के बाद 34 सीटें होती हैं, जिसमें माले भी शामिल हैं।

पहले चरण में इन जिलों में है चुनाव

भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, पटना, भोजपुर, बक्सर, सासाराम, कैमूर, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई।

सीटों के नाम जहां पहले चरण में मतदान

कहलगांव, सुलतानगंज, अमरपुर, धोरैया, बांका, कटोरिया, बेलहर, तारापुर, मुंगेर, जमालपुर, सूर्यगढा, लखीसराय, शेखपुरा, बरबीघा, मोकामा, बाढ, मसौढी, पालीगंज, विक्रम, संदेश, बरहरा, अगियांव, आरा, तरारी, जगदीशपुर, शाहपुर, ब्रह्मपुर, बक्सर, डुमरांव, राजपुर, रामगढ, भभुआ, चैनपुर, चेनारी, सासाराम, करगहर, दिनारा,

नोखा, डिहरी, काराकाट, करवल, कुर्था, जहानाबाद, घोसी, मखदुमपुर, गोह, ओबरा, नवीनगर, कुटुंबा औरंगाबाद, रफीगंज, शेरघाटी, गुरुआ, इमामगंज, बाराचट्टी, बोधगया, गया टाउन, टिकारी, बेलागंज, अतरी, वजीरगंज, रजौली, हिसुआ, गोविंदपुर, नवादा, वारसलीगंज, सिकंदरा, झाझा, जमुई, चकाई।

सामान्य सीटें : 57

अनुसूचित जाति सीटें : 13

अनुसूचित जनजाति सीट : 1

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