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बिहार चुनाव 2020

नीतीश की नई कैबिनेट में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश, जानें नए मंत्रियों के बारे में

Janjwar Desk
17 Nov 2020 2:45 AM GMT
नीतीश की नई कैबिनेट में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश, जानें नए मंत्रियों के बारे में
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Photo: social media

नीतीश कुमार के नए कैबिनेट में सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश की गई है। मंत्रिमंडल के इन 15 सदस्यों में पिछड़ा वर्ग से 7, सवर्ण वर्ग से 5 और दलित समुदाय से 3 नेताओं को मंत्री बनाया गया है.…

जनज्वार ब्यूरो, पटना। बिहार में नीतीश सरकार एक बार फिर से बन गई है। बिहार के 37 वें मुख्यमंत्री के रूप में 16 नवंबर को उन्होंने सातवीं बार शपथ ली। उनके साथ 14 मंत्रियों ने भी शपथ ली है। इनमें सबसे ज्यादा 7 बीजेपी, 5 जेडीयू तथा एक-एक मंत्री वीआईपी और हम पार्टी के कोटे से हैं। आइए, इन नए मंत्रियों के बारे में जानते हैं।

नए कैबिनेट में सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश की गई है। नीतीश कुमार समेत मंत्रिमंडल के इन 15 सदस्यों में पिछड़ा वर्ग से 7, सवर्ण वर्ग से 5 और दलित समुदाय से 3 नेताओं को मंत्री बनाया गया है।

इन मंत्रियों में सबसे उम्रदराज बिजेंद्र यादव हैं, तो सबसे युवा मंत्री वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी हैं। बिजेंद्र यादव 74 साल के हैं, जबकि मुकेश सहनी 41 साल के हैं। हालांकि साहनी फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

बात अगर सबसे अमीर मंत्री की करें, तो बीजेपी के रामसूरत राय इन सबमें सबसे अमीर हैं। उनकी संपत्ति 26.88 करोड़ रुपए है। वहीं, सबसे कम संपत्ति वाले मंत्री रामप्रीत पासवान हैं और उनके पास 1.05 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

नीतीश कुमार के बाद बीजेपी के तारकिशोर प्रसाद ने शपथ ली। वे बीजेपी विधनमण्डल दल के नेता चुने गए हैं और उसी के कोटे से मंत्री बनाए गए हैं। वे वैश्य समुदाय से आते हैं। कटिहार विधानसभा सीट से वे 4 बार विधायक रह चुके हैं।

तीसरे नम्बर पर शपथ लेने वाली रेणु देवी बीजेपी विधानमंडल दल की उपनेता चुनी गई हैं। वे अति पिछड़ा नोनिया समुदाय से आती हैं। पश्चिम चंपारण के बेतिया से विधायक चुनी जातीं हैं। पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुकी हैं और साल 2005 से 2009 तक सूबे की कला, खेल और संस्कृति मंत्री रह चुकी हैं।

विजेंद्र यादव इनमें सबसे उम्रदराज हैं। वे जेपी मूवमेंट से निकले हैं और सुपौल से साल 1990 से अबतक 8 बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे कई दफा मंत्री रह चुके हैं और पिछली बार भी नीतीश कैबिनेट में मंत्री थे।

विजय कुमार चौधरी पहले बैंक में नौकरी किया करते थे, फिर राजनीति में आए। वे पिछली बार विधानसभा के स्पीकर थे। सवर्ण भूमिहार वर्ग से आते हैं। नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं और सरायरंजन विधानसभा सीट से 6 बार विधायक रह चुके हैं।

मेवालाल चौधरी पिछड़ा कुशवाहा वर्ग से आते हैं। बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वीसी रह चुके हैं। उस दौरान नियुक्ति घोटाला का मामला सामनेे आया था। मामला अभी चल रहा है, इस मामले में उन्हें कोर्ट से जमानत मिली हुई है। वे मुंगेर जिला के तारापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं।

अशोक चौधरी दलित वर्ग से आते हैं। वे पहले कांग्रेस में थे और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। अभी जदयू के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हैं और नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं।

शीला कुमारी को महिला वर्ग के कोटे से मंत्री बनाया गया है। वे अति पिछड़ा वर्ग से आती हैं। समस्तीपुर जिला के फुलपरास से पहली दफा ही विधायक बनीं हैं।

अमरेंद्र प्रताप सिंह बीजेपी से हैं। वे आरा से विधायक हैं और सवर्ण राजपूत समुदाय से आते हैं। वे विधानसभा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं।

मंगल पाण्डेय सवर्ण ब्राह्मण वर्ग से आते हैं। पिछली कैबिनेट में भी मंत्री थे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और कई राज्यों के प्रभारी रह चुके हैं।

रामप्रीत पासवान दलित वर्ग से आते हैं। मधुबनी जिला के राजनगर से विधायक चुने गए हैं।

जीवेश मिश्रा सवर्ण भूमिहार वर्ग से हैं। मिथिलांचल में दरभंगा के जाले सीट पर जिन्ना विवाद वाले एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर रहमान को हराकर विधायक बने हैं।

रामसूरत राय मुजफ्फरपुर जिला के औराई से विधायक हैं और वर्तमान मन्त्रियों में सबसे अमीर हैं। पिछड़े यादव समुदाय से आते हैं।

सन्तोष सुमन पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी के प्रमुख जीतनराम मांझी के बेटे हैं और महादलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने पीएचडी तक शिक्षा प्राप्त की है। फिलहाल विधान पार्षद हैं।

मुकेश साहनी वीआईपी पार्टी के प्रमुख हैं और अति पिछड़ा निषाद समुदाय से आते हैं। वे इस बार चुनाव हार गए थे, फिर भी उन्हें मंत्री बनाया गया है।


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