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कोविड -19

प्रशासन हुआ फेल तो पंचायत ने लगाया खुद लॉकडाउन, भिवानी के मुण्ढाणा गांव में बुखार से 60 की मौत

Janjwar Desk
24 May 2021 9:31 AM GMT
प्रशासन हुआ फेल तो पंचायत ने लगाया खुद लॉकडाउन, भिवानी के मुण्ढाणा गांव में बुखार से 60 की मौत
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(ग्रामीणों ने बताया सरकार का ध्यान कोविड से निपटने की दिशा में कम, प्रचार में ज्यादा हैं।)

गांव के निर्वतमान सरपंच विजयपाल रोहिल्ला ने बताया कि हमने वह हरसंभव उपाय किए, जिससे गांव में संक्रमण फैलने से रोका जा सके। गांव में सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कोशिश यह है कि गांव में मौत व बीमारी का ग्राफ कंट्रोल किया जाए....

जनज्वार ब्यूरो/चंडीगढ़। लॉकडाउन की पालना को लेकर जहां प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। फिर भी लोग सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं। इस सब के बीच हरियाणा के भिवानी जिले के गांव गुण्ढाना ने एक अलग पहल की है। इस गांव की पंचायत ने स्वयं ही गांव में लॉकडाउन लगा दिया। अब गांव का हर व्यक्ति इसका पालन भी कर रहा है। ग्रामीणों को यह निर्णय तब उठाना पड़ा,जब एक के बाद एक गांव में लोगों की मौत होने लगी।

सरकार और प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को जब कोई मदद नहीं मिली। दूसरी ओर मौत का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा था। दो माह में यहां 60 लोगों की मौत हो चुकी है। हर घर में कोई न कोई बीमार है। इसके बाद भी सरकार की ओर से गांव की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। लगातार मौत से परेशान पंचायत ने स्वयं गांव में संपूर्ण लॉकडाउन लगाने का निर्णय लिया। इस बाबत प्रशासन को भी पत्र लिख कर इस निर्णय से अवगत कराया गया।

(जिला पुलिस आयुक्त को लिखा पत्र)

पंचायत ने सात मई से एक सप्ताह के लिए लॉकडाउन लगाया था। इसके बाद लॉकडाउन अब अनिश्चितकालीन समय के लिए बढ़ा दिया गया है। इस दौरान गांव में सभी दुकान बंद रखने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। दूध की दुकान सात बजे से दस बजे तक खुली रखने का निर्णय लिया गया है। सब्जी की दुकान पूरी तरह से बंद रखी जा रही है।

पंचायत ने बैठक में बैठने और हुक्का पीने पर भी रोक लगा दी थी। गांव के निर्वतमान सरपंच विजयपाल रोहिल्ला ने बताया कि हमने वह हर संभव उपाय किए, जिससे गांव में संक्रमण फैलने से रोका जा सके। गांव में सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कोशिश यह है कि गांव में मौत व बीमारी का ग्राफ कंट्रोल किया जाए।

सरपंच ने बताया कि 30 हजार की आबादी वाले इस गांव में कोविड का कहर जोरो पर था। प्रशासन को इस बाबत अवगत भी कराया गया। उनकी मांग थी कि गांव में मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। बार बार मांग के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। तब उनके सामने दो ही रास्ते थे, अपनी सुरक्षा स्वयं करें या फिर अपनों को यूं ही मरते देखे। तब पंचायत व ग्रामीणों से बातचीत की। तय किया गया कि स्वयं ही लॉकडाउन लगाया जाए। जिससे संक्रमण तो गांव में फैलने से रोका जा सके।

(गांव में सैनिटाइजेशन करते ग्रामीण)

सरपंच ने बताया कि प्रशासन की ओर से गांव में एक दो बार अधिकारी आए, लेकिन मेडिकल सुविधा की ओर ध्यान नहीं दिया गया। उनकी मांग है कि गांव में कोई सेंटर बना दिया जाए, जहां बीमार ग्रामीणों का इलाज किया जा सके। अभी तक इसकी सुविधा नहीं मिली है। एंबुलेंस की मांग की थी,वह भी अभी तक नहीं मिली। आश्वासन दिया गया था कि गांव में एक डाक्टर उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन अभी तक तो डॉक्टर भी नहीं आया है।

ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने घोषणा की थी कि गांवों को आइसोलेशन वार्ड बनाने के लिए जो 30 हजार रुपए की मदद की घोषणा की थी, वह भी गांव को नहीं मिली है। इस वजह से संक्रमित मरीज घरों में ही रह रहे हैं। इससे परिवार के दूसरे सदस्यों को के भी संक्रमित होने की आशंका बनी रहती है।

सरपंच ने बताया कि क्योंकि उनका कार्यकाल तो पूरा हो गया है,इसलिए उन्हें नहीं पता सरकार की ओर से आने वाली यह राशि आई या नहीं। लेकिन उन्हें यह राशि अभी तक नहीं मिली है। इसलिए वह तो जो अपने स्तर पर कर सकते हैं, कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वह अपने स्तर पर जो कर सकते हैं, कर रहे हैं। गांव के लोग भी सहयोग कर रहे हैं। मौत का सिलसिला भी कुछ कम हुआ है। उनकी कोशिश है जब तक गांव से संक्रमण पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता, तब तक लॉकडाउन रखा जाने का इरादा है। क्योंकि यह एक रास्ता बचता है, जिससे संक्रमण को फैलने से आसानी से रोका जा सकता है।

ग्रामीणों ने बताया कि सरकार का ध्यान कोविड से निपटने की दिशा में कम, प्रचार में ज्यादा हैं। चंडीगढ़ में सरकार की ओर से कोविड से निपटने के जो भी दावे हो रहे हैं, वह दिखावा भर है। कम से कम इस गांव में तो ऐसी कोई सुविधा नहीं दी गयी, जैसा कि सरकार की ओर से दावा किया गया है।

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि सरकार कोविड रोकने में पूरी तरह से असफल साबित हो रही है। खासतौर पर गांवों की ओर तो इस सरकार का कोई ध्यान नहीं है। ऐसा लग रहा है कि सरकार किसान आंदोलन की सजा ग्रामीणों की अनदेखी कर दे रही है। यह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। क्योंकि गांव में जिस तरह से संक्रमण फैल रहा है, यदि इसे रोकने के लिए जल्दी ही ठोस रणनीति न बनाई गई तो हालात बिगड़ सकते हैं।

पूर्व सीएम ने कहा कि मुण्ढाना की पंचायत ने तो लॉकडाउन का निर्णय ले लिया, लेकिन बाकी के गांव इस तरह का निर्णय नहीं ले पाते हैं। इस तरह के गांवों में संक्रमण फैलने का अंदेशा ज्यादा है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार दावा कर रही है कि घर पर रह रहे कोविड मरीजों को किट उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन वह किट है कहा? इसी तरह से गांव में आइसोलेशन सेंटर बनाने का सरकार का दावा भी सही साबित नहीं हो रहा है।

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