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कोविड -19

भारत में वयस्क आबादी के लगभग 10.5 से 11.1% लोगों को मधुमेह है, अधिकतर को समय पर नहीं मिल पाता उपचार !

Janjwar Desk
20 March 2026 5:07 PM IST
भारत में वयस्क आबादी के लगभग 10.5 से 11.1% लोगों को मधुमेह है, अधिकतर को समय पर नहीं मिल पाता उपचार !
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file photo

आज भारत में हर 100 में से 12 लोगों को डायबिटीज, साढ़े चार करोड़ लोगों को हृदय से जुड़ी बीमारियाँ, 2 करोड़ लोगों को अस्थमा और करीब 3 करोड़ लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं...

जनस्वास्थ्य चिकित्सक डॉ. एके अरुण की टिप्पणी

भारत के लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर अक्सर उदासीन रहते हैं।यहाँ के लोग बहुत कम जागरूक हैं ! यहाँ का नागरिक औसतन अपने स्वास्थ्य पर साल भर में केवल 13950 रुपये ही खर्च करता है जबकि अमेरिका में यही आँकड़ा 1.42 लाख रुपये, फ्रांस में 64 हज़ार रुपये, ब्रिटेन में 72 हज़ार रुपये, कनाडा में 1 लाख 20 हज़ार रुपये और चीन में 26 हज़ार रुपये है।

स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतने का ही नतीज़ा है कि वयस्क आबादी के लगभग 10.5% से 11.1% लोगों को मधुमेह है, जिनमें से अधिक मामलों का समय पर निदान नहीं हो पाता है। आज भारत में हर 100 में से 12 लोगों को डायबिटीज, साढ़े चार करोड़ लोगों को हृदय से जुड़ी बीमारियाँ, 2 करोड़ लोगों को अस्थमा और करीब 3 करोड़ लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार अगले दो वर्षों में यहाँ की 25 फीसद युवा आबादी किसी न किसी बीमारी की चपेट में होगी !

यहाँ के लोग व्यायाम को भी ज़्यादा महत्त्व नहीं देते हैं। एक सर्वे के मुताबिक भारत में 36 प्रतिशत लोग ही प्रतिदिन व्यायाम करते हैं। यही नहीं, आज देश में 74 प्रतिशत लोग तनाव और 88 प्रतिशत लोग चिंता (Anxiety) के शिकार हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी की वजह से तनाव और अवसाद बढ़ रहा है और इन सब की वजह से युवा बड़े पैमाने पर घातक रोगों के शिकार हो रहे हैं। इस दौर में महंगे इलाज और महँगी दवाएँ आग में घी का काम कर रही हैं। यदि समय रहते समुचित क़दम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में बीमार व विच्छिप्त युवाओं को सम्भालना आसान नहीं होगा।

यहाँ यह बताना जरूरी है की देश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण और बाजारीकरण के कारण कोई 85 फ़ीसद लोग एलोपैथी का मनमाफिक लाभ नहीं उठा पाते। ऐसे में जरूरी है की वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अपनायें।

सुझाव

1. ऐलोपैथी के हानिकारक दवाओं से बचें।

2. प्राकृतिक जीवन शैली को अपनायें।

3. बीमारी की स्थिति में यदि दवा ज़रूरी हो तो होमियोपैथी को अपनायें ! एक होमियोपैथिक डॉक्टर के संपर्क में रहें।

4. यथासंभव सादा भोजन करें, नियमित योग व व्यायाम करें।

(हील इनिशिएटिव)

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