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कोविड -19

बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश- लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए स्टील प्लांट्स और उद्योगों की सेवाओं पर विचार करे सरकार

Janjwar Desk
24 April 2021 7:01 AM GMT
बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश- लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए स्टील प्लांट्स और उद्योगों की सेवाओं पर विचार करे सरकार
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प्रतीकात्मक फोटो

एडवोकेट तुषार मांडलेकर और एमिकस क्यूरी एसपी भंडारकर ने कहा कि ऑक्सीजन की रिफिलिंग के लिए पर्याप्त मात्रा में खाली सिलेंडरों की अनुपलब्धता के कारण समस्या उत्पन्न हुई है....

जनज्वार डेस्क। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में COVID-19 संकट से निपटने के लिए प्रभागीय आयुक्त (नागपुर) को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र में लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए स्टील प्लांट्स और उद्योगों की सेवाओं पर विचार करें।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक पीठ ने कहा कि इस तरह के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत शक्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कोर्ट ने भंडारा, ठाणे, पुणे और डोलवी में स्थित स्टील प्लांट्स का जिक्र किया।

आवेदक आदित्य गोयल ने कोर्ट को बताया कि उनके पास स्टील प्लांट्स में काम करने का अनुभव है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इन स्टील प्लांट्स में कोविड रोगियों के लिए पर्याप्त मात्रा में लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन करने की क्षमता है और अगर इन उद्योगों के प्लांट्स को ऑक्सीजन की पूर्ति करने के लिए कहा जाता है तो महाराष्ट्र के संबंध में कोविड रोगियों को ऑक्सीजन की कमी की पूरी समस्या कुछ ही समय में हल हो जाएगी।

कोर्ट ने आदेश दिया कि कार्यालय गोयल के आवेदन की कॉपी नागपुर के डिविजनल कमिश्नर को देगा और उसी की प्राप्ति पर हम अनुरोध करेंगे कि यह उचित रूप से जांच करके माना जाए कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 37 के तहत लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए इन उद्योग की सेवाओं की आवश्यकता है।

कोर्ट ने आगे कहा कि वास्तव में हमें इस कंपनी के निदेशकों पर पूरा भरोसा है कि नागपुर के डिविजनल कमिश्नर के विनम्र अनुरोध पर कंपनी के निदेशक ऑक्सीजन संयंत्रों द्वारा कोविड से निपटने के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए आसानी से सहमत होंगे। नागपुर के डिविजनल कमिश्नर अपनी तरफ से कंपनी के ऑक्सीजन प्लांट्स को अनिवार्य रूप से ऑक्सीजन आपूर्ति करने की स्थिति पैदा नहीं होने देंगे।

अधिवक्ता गोयल ने आवेदन में कहा है कि प्लांट 120 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकता है और इससे क्षेत्र में 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है।

कोर्ट ने जिला कलेक्टर को स्टील प्लांट, रेलवे और फैब्रिकेटर से सभी खाली ऑक्सीजन सिलेंडरों को मंगवाने का निर्देश दिया। इसके बाद एडवोकेट तुषार मांडलेकर और एमिकस क्यूरी एसपी भंडारकर ने कहा कि ऑक्सीजन की रिफिलिंग के लिए पर्याप्त मात्रा में खाली सिलेंडरों की अनुपलब्धता के कारण समस्या उत्पन्न हुई है।

न्यायमूर्ति शुकरे ने राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एमजी भांडगे की याचिका को स्वीकार नहीं किया कि पीठ इस तरह के आदेश पारित नहीं कर सकती क्योंकि बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने पहले ही राज्य को सार्वजनिक और निजी तौर पर पूरे राज्य के अस्पताल में ऑक्सीजन की सुचारू रूप से आपूर्ति के लिए एक तंत्र तैयार करने का निर्देश दिया है।

बेंच ने कहा- तो क्या मरीजों को तब तक मरने के लिए छोड़ दिया जाए जब तक राज्य सरकार तंत्र का निर्माण नहीं करती है? न केवल न्यायालय बल्कि डिविजनल कमिश्नर को भी संरक्षण के लिए कोई उपाय नहीं करना चाहिए? हम सिर्फ सुझाव पर विचार करने के लिए कह रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि आप इस अदालत की सहायता करेंगे। यह एक बहुत ही सकारात्मक दिशा है जिसे बहुत नकारात्मक तरीके से लिया जा रहा है।

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