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कोविड -19

पूर्वोत्तर राज्यों में गंभीर बना हुआ है कोरोना संकट, असम ने अंतर जिला यात्रा पर लगाया प्रतिबंध

Janjwar Desk
18 May 2021 9:01 AM GMT
पूर्वोत्तर राज्यों में गंभीर बना हुआ है कोरोना संकट, असम ने अंतर जिला यात्रा पर लगाया प्रतिबंध
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)

पूर्वोत्तर का हर राज्य कोविड -19 संकट से निपटने के लिए अपनी स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे, ऑक्सीजन की आपूर्ति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है......

जनज्वार ब्यूरो/गुवाहाटी। जैसा कि देश के कई राज्यों में कोविड -19 मामलों में गिरावट का रुख है, पूर्वोत्तर राज्यों के मामले में ऐसा नहीं है। बढ़ते मामलों का राष्ट्रीय औसत -3.52 है। जबकि भारत के कुछ राज्य वक्र को समतल कर रहे हैं। यह अभी भी अधिकांश उत्तर-पूर्वी राज्यों में असंतुलित है।

17 मई तक असम को छोड़कर पूर्वोत्तर में दैनिक कोरोना संक्रमण मामलों की वृद्धि दर अधिक हो रही है। उत्तर-पूर्वी राज्यों के अलावा आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, जम्मू और कश्मीर, पुडुचेरी और तमिलनाडु ऊपर की ओर रुझान प्रदर्शित करने वाले अन्य राज्य हैं।

संयोग से पूर्वोत्तर में ऊपर की ओर उछाल मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोविड -19 भविष्यवाणी मॉडल के साथ मेल खाता है। इस बीच असम ने 17 मई को कोविड -19 के प्रसार को रोकने के लिए अंतर-जिला यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। फिलहाल रोकथाम के उपाय काम करते दिख रहे हैं लेकिन कब तक हालात काबू में रहेंगे कहा नहीं जा सकता।

हालांकि अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में संक्रमण दर अधिक है, लेकिन अन्य भारतीय राज्यों की तुलना में यह संख्या कम है। अगर यह बीमारी दूर-दराज के इलाकों में फैलती है तो इसका प्रबंधन करना मुश्किल होगा और यह इन राज्यों की स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी दबाव डालेगा।

पूर्वोत्तर का हर राज्य कोविड -19 संकट से निपटने के लिए अपनी स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे, ऑक्सीजन की आपूर्ति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

पूर्वोत्तर राज्य में कोरोना वायरस रोगियों के ठीक होने की दर 84.34 प्रतिशत है। मणिपुर में अब उपचाराधीन मरीजों की संख्या 5,272 है। अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 के लिए राज्य में अब तक 6,46,740 नमूनों की जांच हो चुकी है। राज्य में अब तक कुल 2,82,958 लोगों को टीका लगाया गया है।

वहीं, कोविड-19 संकट के दौरान जब मिजोरम मानव बल की कमी का सामना कर रहा है ऐसे में करीब 400 लोग जिनमें अधिकतर बेरोजगार चिकित्सक, नर्सिंग छात्र और लैब तकनीशियन हैं, महामारी से मुकाबले में सरकार की मदद कर रहे हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक (योजना) डॉक्टर लालजेपुई ने बताया कि राज्य सरकार ने मानव बल की कमी को पूरा करने के लिए नर्सिंग और चिकित्सा संस्थानों से स्वयंसेवकों की मदद ली है।

उन्होंने कहा कि करीब 412 स्वयंसेवक वर्तमान में कोविड-19 से जुड़े कार्यों में मदद कर रहे हैं। इनमें 37 प्रशिक्षित चिकित्सक, 144 नर्स, 97 स्वास्थ्य कर्मी, 91 लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट, डायलिसिस तकनीशियन शामिल हैं। लालजेपुई के अनुसार करीब 900 चिकित्सकों, नर्सों और मेडिकल छात्रों ने पिछले साल महामारी से मुकाबले में स्वयंसेवक के तौर पर अपना योगदान दिया।

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