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कोविड -19

ग्राउंड रिपोर्ट: मौत का मरघट साबित हो रहा है मिर्जापुर का मंडलीय अस्पताल

Janjwar Desk
24 April 2021 9:42 AM GMT
ग्राउंड रिपोर्ट: मौत का मरघट साबित हो रहा है मिर्जापुर का मंडलीय अस्पताल
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पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ रही हैं इंसानी सांसें, जमीनी हकीकत से दूर है स्वास्थ्य विभाग के कागजी हकीकत, मंडली अस्पताल के खाली पड़े बेड, थम रही सांसों के बीच का मंजर देख दहल जा रहे हैं लोग...

मिर्जापुर से संतोष देव गिरि की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो। एक तरफ कोरोना का कहर तो दूसरी तरफ थम रही सांसों का सफर! यह हालात उत्पन्न हुए हैं मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल के, जहां से उठने वाली लाशों को देख लोग सहम जा रहे हैं। जिस मंडलीय अस्पताल में कभी मरीजों की भीड़ उमड़ती थी आज वहां के बेड खाली पड़े हुई हैं। लोग यहां जाना नहीं चाहते, लेकिन विवशता है जो उन्हें जाने पर मजबूर कर दे रही है।

इस अस्पताल में आने के बाद जो सकुशल स्वस्थ होकर अपने घर को पहुंच जा रहा है वह अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझ रहा है, अन्यथा जिनके परिजन यहां आने के बाद सकुशल घर नहीं पहुंच पा रहे हैं उनके घरों, उन लोगों की क्या स्थिति है उन पर क्या गुजर रही है यह वही बता सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं का जो हाल है वह किसी से छुपा हुआ नहीं है, उससे मिर्जापुर का मंडलीय अस्पताल भी अछूता नहीं है। देशभर की तरह यहां भी ऑक्सीजन और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव तो है ही, ऊपर से कोरोना संदिग्धों की जांच ना होने के कारण आए दिन लोगों की मौत हो रही है।

पिछले 1 सप्ताह पर नजर डालें तो तकरीबन 100 से ज्यादा लोगों ने दम तोड़ दिया है। अब यह अलग बात है कि जमीनी हकीकत से कोसों दूर स्वास्थ्य विभाग का कागजी हकीकत है।

अधिकांश मृतकों के परिवार के लोगों की मानें तो सर्दी, जुकाम और बुखार के दौरान ही सांस लेने में तकलीफ होने से मौत हुई है। इन सभी की अचानक सांस फूलने लगी, अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जगह न होने के कारण उन्हें सर्दी, जुखाम की दवा देकर तथा कोविड का भय बताकर घर भेज दिया गया। घर आते ही कुछ लोगों की मौत हुई तो कुछ ने वहीं पर दम तोड़ दिया है।

मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल जिसका दायरा मिर्जापुर जनपद से लेकर सोनभद्र और भदोही सहित मध्य प्रदेश के रीवा जनपद तक फैला हुआ है, यहां सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही के अलावा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के रीवा से भी काफी तादात में उपचार के लिए आते हैं लेकिन इन दिनों इस अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी होने के साथ ही यहां मौत के मरघट का नजारा देखने को मिल रहा है।

बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए ओपीडी की सेवाएं बंद कर दी गई है। ऐसे में आमजनों को जो परेशानी हो रही है उसे सहज ही समझा जा सकता है। इन दिनों मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल में आने वाले ज्यादातर लोग घटना-दुर्घटना के शिकार हो या सर्वाधिक सांस लेने की समस्या से पीड़ित लोग ही पहुंच रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के दावे चाहे जो हों, लेकिन मंडलीय अस्पताल की हकीकत कुछ और ही है। मरीजों को समुचित ऑक्सीजन प्राप्त नहीं हो पा रहा है। मंडलीय अस्पताल के स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत की पड़ताल करने के लिनए जनज्वार टीम गुरुवार 22 अप्रैल और शुक्रवार 23 अप्रैल को मंडली अस्पताल का दौरा किया। पड़ताल करते हुए न केवल इसकी जमीनी हकीकत को परखा, बल्कि मरीजों एवं तीमारदारों से भी रूबरू हुए जो वहां मौजूद थे।

मिर्जापुर जनपद में कोरोना संक्रमितों की जहां कई मौत हुई है, वहीं विभिन्न बीमारियों से खासकर सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों की भी मंडली चिकित्सालय में मौत हुई है। इनमें ज्यादातर सर्दी, जुखाम, बुखार तथा सांस की परेशानी वाले मरीज शामिल होने बताए जा रहे हैं।

मंडलीय अस्पताल में मौत होने के बाद कई लोग तो चुपके से यहां से शव के साथ खिसकते बने हैं, क्योंकि उनके मन में एक प्रकार का यह भी भय बना हुआ था कि कहीं कोविड का नाम ना उनके साथ जुड़ जाए। अन्यथा वह अपने परिजनों के अंतिम संस्कार से भी हाथ धो बैठेंगे, सो वह यहां से अपनों का शव लेकर चलते बने हैं, जिससे कागजी खानापूर्ति भी संभव नहीं हो पाया है।

मरघट जैसा दिख रहा है नजारा

गुरुवार 22 अप्रैल को जनज्वार टीम ने मंडलीय अस्पताल की जब पड़ताल की तो यहां मरघट जैसा नजारा देखने को मिला। अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक के सामने ही एक लाश के साथ परिजन अंतिम संस्कार के लिए अंतिम रूप देने की तैयारी में रोते बिलखते जुटे हुए थे, जिसे देख यह कहना मुश्किल हो जा रहा था कि यह अस्पताल है या पोस्टमार्टम घर। लाश के साथ 2 लोग मौजूद थे, जिनके आंसू थम नहीं रहे थे। उधर से गुजरने वाले लोग कन्नी काटकर गुजर रहे थे, मानो वह अछूत हों।


अस्पताल के अंदर आपातकालीन कक्ष में प्रवेश करने पर दोनों कक्ष मरीजों से पटे हुए थे। यहां अधिकतर लोग सांस की तकलीफ से परेशान देखे गए। बच्चा वार्ड, सर्जिकल वार्ड, महिला वार्ड में कुछेक मरीजों को छोड़ छोड़कर सारे बेड खाली पड़ा हुए थे। महिला वार्ड में भर्ती एक महिला की तीव्र गति से चल रही सांसें और बिगड़ती स्थिति को देखकर उनके परिजन रोते बिलखते हुए नजर आए।

बगल के ही बेड पर लेटे मिर्जापुर के बिरोही गांव निवासी उमेश जो अपनी माता को लेकर आए हुए थे, वह अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर फूट पड़ते हैं 'कहते हैं केवल इंजेक्शन लगाकर सुलाया गया है, कोई पूछने वाला नहीं है ना ही कोई यहां हाल जानने वाला है। सब कुछ राम भरोसे चल रहा है।'

'खून सने स्ट्रेचर पर लाया जा रहा है मरीजों को

मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल में कहने को तो साफ सफाई के नाम पर सफाईकर्मियों की एक लंबी चौड़ी फौज है और भारी भरकम रकम भी प्रति महीने खर्च की जाती है, लेकिन साफ सफाई की व्यवस्था पर नजर डालें तो इसे नाकाफी ही कहा जाएगा।

आश्चर्य की बात है कि इस संक्रमण के दौर में जहां साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की बात सरकारें कह रही हैं, स्वास्थ्य महकमा कह रहा है, लेकिन खुद ही यहां स्वास्थ्य महकमा उदासीन नजर आया है। मंडलीय अस्पताल के पड़ताल के दौरान हमारी टीम ने देखा तो एक स्ट्रेचर जिस पर काफी मात्रा में खून लगा हुआ था जिसकी सफाई करना भी मुनासिब नहीं समझा गया था, उसी पर ही मरीजों को ले आने ले जाने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह संक्रमण को बढ़ावा नहीं देंगे। खामोशी के आलम तले इमरजेंसी वार्ड से लेकर अन्य वार्डों में भर्ती अधिकांश मरीजों की सांस लेने में हो हो रही तकलीफ से कराहने की आवाज तो बाहर निकलने पर दम तोड़ने वाले मरीजों के तीमारदारों के रोने की आवाज से पूरा माहौल गमगीन नजर आने के साथ ही साथ लोगों की जुबान से बस एक ही शब्द फूट रहे थे कि आखिरकार कब थमेगा यह संक्रमण का दौर और कब बढ़ेगी मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं।

'कोविड का टीका लगने के बाद भी शिक्षक ने तोड़ दिया

शुक्रवार 23 अप्रैल को दूसरे दिन भी जनज्वार टीम ने मंडलीय अस्पताल का पड़ताल जारी रखा। इस दौरान एक मरीज के दम तोड़ देने की खबर पर जब हम वार्ड में पहुंचे तो पता चला कि मरने वाले व्यक्ति का नाम कृष्ण गोपाल बरनवाल है। 72 वर्षीय बरनवाल नगर के ही नारघाट निवासी तथा माता प्रसाद माता भीख इंटर कॉलेज के शिक्षक थे। उन्हें 21अप्रैल को सांस लेने में हो रही तकलीफ को देखते हुए परिजनों ने मंडलीय अस्पताल में लाकर भर्ती कराया था, जहां उनका उपचार चल रहा था कि उन्होंने शुक्रवार 23 अप्रैल की सुबह दम तोड़ दिया।

परिजनों के मुताबिक उन्होंने 2 सप्ताह पूर्व ही 6 अप्रैल को कोविड का इंजेक्शन भी लगवाया था। उनके बेटे राहुल बरनवाल की मानें तो उनके पिता कृष्ण गोपाल बरनवाल ने 6 अप्रैल को कोविड का टीका लगवाया था, जिसके बाद से ही उनके स्वास्थ्य में गिरावट आनी शुरू हो गई थी। उन्हें मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल में लाकर दाखिल कराया गया था। उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान उन्हें दवाएं सारी बाहर से लानी पड़ी है।

'बुरी तरह से जली महिला को घंटों तक नहीं मिला उपचार

मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल में चरमरा उठी स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही संवेदनाएं भी मर चुकी हैं। शुक्रवार 23 अप्रैल को दोपहर बाद कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसे देख कलेजा फट पड़ रहा था। दरअसल हुआ यह कि बुरी तरह से झुलसी हुई एक महिला को कुछ महिलाएं स्ट्रेचर पर लेकर इमरजेंसी वार्ड के करीब पहुंची हुई थी। दर्द और जलन की पीड़ा से तड़प रही महिला को त्वरित उपचार के नाम पर केवल इंजेक्शन लगाकर उसके जस के तस हालात पर छोड़ दिया गया था। वह काफी देर से कराह रही थी, लेकिन उसे कोई देखने तक नहीं करीब आ रहा था।


मंडलीय अस्पताल की व्यवस्था पर नगर विधायक ने भी खड़े किए हैं सवाल

जनज्वार टीम द्वारा मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल के 2 दिनों की पड़ताल के दौरान जो तथ्य और यहां के हकीकत सामने आई, उसने आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ की तरफ इशारा किया। इस अस्पताल की अव्यवस्था पर यहां के स्थानीय भाजपा विधायक पंडित रत्नाकर मिश्रा भी उठा चुके हैं।

उन्होंने अपने एक करीबी व्यवसायी के मौत पर मंडली अस्पताल की व्यवस्था की कलई खोल कर रख देने के साथ ही स्पष्ट अक्षरों में कह दिया था कि मंडलीय अस्पताल में भ्रष्टाचार व्याप्त है। दलालों के माध्यम से यहां सारे काम होते हैं। बिना दलालों के यहां कुछ भी संभव नहीं है, उन्हीं के इशारे पर यहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं नाचती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत करने की भी बात कही थी, हालांकि उनके इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार हुक्मरान ने लिखित तो नहीं, लेकिन मौखिक तौर पर और वह भी दबी जुबान विधायक के इन आरोपों को नकारा।

रात्रि में नहीं उठता निःशुल्क शव वाहन का नंबर

मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल में भले ही कहने को निःशुल्क शव वाहन मुहैया कराया गया है, इसके लिए दो नंबर भी दिए गए हैं जिन पर कॉल करने पर यह शव वाहन उपलब्ध हो जाता है, लेकिन देखने में आया है कि रात के समय में अधिकांश यह सुविधा नहीं मुहैया हो पाती है, जिससे मजबूरन लोगों को प्राइवेट या अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।

पड़ोसी जनपद भदोही के गोपीगंज निवासी जड़ावती देवी को पिछले दिनों उनके परिजन सांस लेने में हो रही परेशानी के बाद मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल लेकर आए थे, जहां प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन की उपलब्धता न होने के अभाव में उनकी मौत हो गयी। महिला की मौत के बाद परिजन काफी रात तक निःशुल्क शव वाहन के लिए दिए गए नंबर पर डायल कर वाहन की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन उन्हें भोर होने तक वाहन मिलना तो दूर रहा है नंबर तक नहीं रिसीव हुआ। थक हार कर उन्हें प्राइवेट वाहन का सहारा लेकर शव को अपने गंतव्य तक लेकर जाना पड़ा था।

क्या बोलते हैं स्वास्थ्य विभाग के हुक्मरान

मौजूदा संक्रमण काल तथा उत्पन्न हुई ऑक्सीजन इत्यादि की व्यवस्थाओं पर मिर्जापुर जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ पीडी गुप्ता बताते हैं कि मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल एल-2 अस्पताल को 50 बेड को बढ़ाकर अब 100 बेड का कर दिया गया है, जहां 34 बेड पर गंभीर मरीज हैं। इसी प्रकार 120 बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर तथा 34 छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर रिजर्व में है। जल्द ही और ऑक्सीजन सिलेंडर की खेप आने वाली है।

वह बताते हैं कि निरंतर आपूर्ति बनी रहे तो हम बराबर स्वास्थ्य सेवा देते रहेंगे फिर भी बराबर यह प्रयास है कि ऑक्सीजन के अभाव में किसी की जान ना जाने पाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की मानें तो ऑक्सीजन कंसंट्रेट मशीन के जरिए भी आपातकालीन स्थिति में निपटने का भरपूर प्रयास किया जाता है, मगर होने वाली मौतें कुछ और ही सच बयां करती हैं।

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