कोविड -19

कोरोना से हुई 18 फीसदी मौतों में शरीर के एंटीबॉडीज जिम्मेदार, जानें कैसे इम्यून सिस्टम पर ही कर दिया हमला

Janjwar Desk
3 Sep 2021 3:06 AM GMT
कोरोना से हुई 18 फीसदी मौतों में शरीर के एंटीबॉडीज  जिम्मेदार, जानें कैसे इम्यून सिस्टम पर ही कर दिया हमला
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(नए रिसर्च में पता चला है कि कोरोना से हुई 18 फीसदी मौत में एंटीबॉडीज जिम्मेदार हैं)

एक ताजा शोध में पता चला है कि कोरोना से होने वाली 18 फीसदी मौतों के लिए इंसानी शरीर में उत्पन्न हुई दुष्ट एंडीबॉडीज जिम्मेदार हैं, इन्हें ऑटोएंडीबॉडीज भी कहा जाता है, जो शरीर के प्रतिरोधक तंत्र पर ही हमला कर देती हैं.

जनज्वार। कोविड-19 वायरस के कारण पूरी दुनिया में हड़कंप है। यह वायरस नया है और इसे लेकर लगातार रिसर्च हो रहे हैं। इन शोधों में रोज नए नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि कोरोना वायरस के कारण हुई मौतों में 18 फीसदी शरीर की एंटीबॉडीज के कारण ही हो गई हैं। मेडिकल भाषा में इन एंटीबॉडीज को 'बैड एंटीबॉडीज' कहा जाता है।

एक ताजा शोध में पता चला है कि कोरोना से होने वाली 18 फीसदी मौतों के लिए इंसानी शरीर में उत्पन्न हुई दुष्ट एंडीबॉडीज जिम्मेदार हैं। इन्हें ऑटोएंडीबॉडीज भी कहा जाता है, जो शरीर के प्रतिरोधक तंत्र पर ही हमला कर देती हैं।

इसे लेकर हाल में ही साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में एक विस्तृत शोध प्रकाशित हुआ है। इसी के आधार पर नेचर जर्नल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। नेचर जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, इंसानी शरीर में सक्रिय कुछ एंटीबाडीज कभी-कभी शरीर के प्रतिरोधक तंत्र की ही दुश्मन बन जाती है।

हालांकि, इसके कारण का पता नहीं है लेकिन कोरोना महामारी से पहले 35 हजार स्वस्थ लोगों पर हुए शोध में पाया गया कि 18-69 आयु वर्ग के 0.18 फीसदी लोगों में ये बैड एंटीबॉडीज मिली है। वहीं 70-79 आयु के 1.1 फीसदी लोगों में इस प्रकार की दुष्ट एंटीबॉडीज पाई गई हैं। यह उम्र बढ़ने के साथ यह बढ़ती हैं। लेकिन कोरोना मरीजों में इनकी मौजूदी ज्यादा देखी गई है।

यह रिसर्च 38 देशों के मरीजों पर की गई है। शोध के दौरान इन मरीजों की ऑटोएंटीबॉडीज की जांच की गई। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने 38 देशों के 3,595 गंभीर कोरोना मरीजों में ऑटोएंटीबॉडीज की जांच की। इस रिसर्च में पाया गया कि 13.6 फीसदी मरीजों में ये मौजूद थीं। 40 वर्ष से कम आयु के 9.6 और 80 वर्ष से अधिक आयु के 21 फीसदी मरीजों में ये एंटीबॉडीज पाई गईं। जबकि जिन मरीजों की मौत हो चुकी थी, उनमें 18 फीसदी में ही इनकी मौजूदगी पाई गई।

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