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अनिल अंबानी की 3 कंपनियों के बैंक खाते फ्रॉड घोषित लेकिन राफेल के रखरखाव का मिला जिम्मा

Janjwar Desk
8 Jan 2021 2:32 AM GMT
अनिल अंबानी की 3 कंपनियों के बैंक खाते फ्रॉड घोषित लेकिन राफेल के रखरखाव का मिला जिम्मा
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एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशन, रिलायंस इंफ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम के खातों को फ्रॉड की श्रेणी में रखा है, हाईकोर्ट ने इन तीनों कंपनियों के खातों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है..

जनज्वार ब्यूरो। एक तरफ तो राफेल फाइटर जेट के रखरखाव का जिम्मा दसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड को मिला है तो दूसरी तरफ सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अनिल अंबानी की तीन कंपनियों के खातों को फ्रॉड घोषित कर दिया है।

बैंक द्वारा यह जानकारी गत बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दी गई है। एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशन, रिलायंस इंफ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम के खातों को फ्रॉड की श्रेणी में रखा है। हाईकोर्ट ने इन तीनों कंपनियों के खातों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों कंपनियों के तत्कालीन डायरेक्टर्स की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस प्रतीक जालान की बेंच में सुनवाई हुई। उसी क्रम में कोर्ट द्वारा यह निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि तीनों कंपनियों सहित सभी प्ररिवादी और रिजर्व बैंक 11 जनवरी तक अपना जबाब दाखिल कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।

इस याचिका में रिजर्व बैंक के साल 2016 के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसमें किसी बैंक खाते को धोखाधड़ी वाला खाता घोषित करने का नियम जारी किया गया है। इस सर्कुलर में किसी खाते को ग्राहक को बिना किसी पूर्व सूचना या जानकारी के धोखाधड़ी के रूप में घोषित करने की अनुमति दी गई है। याचिका में इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध बताया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राफेल के रखरखाव आदि का ठेका डेसॉल्ट रिलायंस एरोस्पेस लिमिटेड को दिया गया है, जो कि अनिल अम्बानी की रिलायंस डिफेन्स लिमिटेड और डेसॉल्ट एविएशन का संयुक्त उपक्रम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में 10 अप्रैल, 2015 को फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ बातचीत के बाद 36 राफेल विमानों की खरीद की घोषणा की थी. कांग्रेस इस सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाती रही है।

भारत और फ्रांस ने 36 राफेल फाइटर जेट की खरीद के लिए विगत 23 सितंबर, 2016 को 7.87 अरब यूरो (लगभग 59,000 करोड़ रुपये) के सौदे पर हस्ताक्षर किए। यह डील दोनों देशों की सरकारों के बीच हुई है। राफेल जेट को फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन ने तैयार किया है।

10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि दोनों सरकारें 36 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के सौदे के लिए राजी हैं।

वर्ष 2015 में बेंगलुरु में आयोजित हुए एयर शो के दौरान दसॉ और अनिल अंबानी की कंपनी के बीच संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) की योजना बनी। कांग्रेस ने सवाल उठाए थे कि एचएएल जैसी सरकारी कंपनी को छोड़कर दिवालिया हो चुकी एक निजी कंपनी को क्यों तरजीह दी गई।

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