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Narendra Giri Death Case : 200 करोड़ का बाघम्बरी मठ, लेकिन नरेंद्र गिरी द्वारा 3 बार वसीयत लिखने पर उठ रहे सवाल?

Janjwar Desk
25 Sep 2021 9:57 AM GMT
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(मौत के बाद नरेंद्र गिरी की तीन बार लिखी वसीयत पर हो रहा विवाद)

Narendra Giri Death Case : बाघम्बरी मठ की संपत्ति को लेकर वसीयत में नई बातें सामने आ रही हैं। नरेंद्र गिरी ने लगभग 200 करोड़ की संपत्ति वाले मठ के लिए अपने जीवनकाल में तीन बार वसीयत की...

Narendra Giri Death Case (जनज्वार) : मठ बाघम्बरी गद्दी के महंत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझाने में सीबीआई (CBI) पूरी शिद्दत से लग गई है। इस बीच बाघम्बरी मठ की संपत्ति को लेकर वसीयत में नई बातें सामने आ रही हैं। नरेंद्र गिरी ने लगभग 200 करोड़ की संपत्ति वाले मठ के लिए अपने जीवनकाल में तीन बार वसीयत की।

पहली बार उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया, लेकिन एक साल बाद ही उनके स्थान पर आनंद गिरि को उत्तराधिकारी बनाते हुए वसीयत कर दी। आनंद गिरि के क्रियाकलापों से नाराज होकर दूसरी वसीयत के 9 साल बाद उन्होंने दोबारा बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाते हुए वसीयत की।

इस वसीयत के मुताबिक, बलवीर गिरि ही बाघम्बरी गद्दी के महंत और उनके उत्तराधिकारी हैं। करीब 300 वर्ष पुराने इस मठ पर नरेंद्र गिरी को भी अपने गुरु भगवान गिरी से वसीयत के जरिए ही उत्तराधिकार मिला था।

क्या है वसीयत में?

महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद सामने आए तथाकथित सुइसाइड नोट में जिस वसीयत का जिक्र है, उसे तैयार करने वाले वकील ऋषि शंकर द्विवेदी ने दावा किया है कि वसीयत के मुताबिक बलवीर गिरि ही मठ बाघम्बरी गद्दी के महंत और उत्तराधिकारी होंगे। मठ के बाइलॉज में वसीयत के जरिए उत्तराधिकारी तय करने की बात कही गई है। ऐसे में निरंजनी अखाड़ा उत्तराधिकारी तय नहीं कर सकता। बलवीर गिरि को उत्तराधिकार से तभी वंचित किया जा सकता है, जब वह महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में दोषी पाए जाएं।

ऋषि शंकर द्विवेदी ने बताया कि, महंत नरेंद्र गिरी ने पहली वसीयत 7 जनवरी, 2010 को स्वामी बलवीर पुरी को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए की थी। बलबीर गिरि के हिमालय में तपस्या के लिए चले जाने और विभिन्न धार्मिक नगरों में रहने के कारण इस वसीयत को रद्द कर दिया गया। 29 अगस्त, 2011 को उन्होंने दूसरी वसीयत अपने शिष्य स्वामी आनंद गिरि के पक्ष में की। इस बीच 2015 में बलवीर गिरि मठ में फिर से आकर सेवा और प्रबंधन के कार्यों में सहयोग करने लगे।

वसीयत व सुसाइड नोट में अलग हैं हस्ताक्षर

वहीं आनंद गिरि विदेश यात्राएं कर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने लगे। उन्होंने गंगा सेना के नाम से एक संस्था भी बनाई। उन पर विदेश में धर्म विरोधी कार्यों में संलिप्त होने के आरोप भी लगते रहे। इन आरोपों के चलते महंत नरेंद्र गिरि ने 4 जून 2020 को तीसरी वसीयत की। इसमें दोबारा बलबीर गिरि को श्री मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर का महंत घोषित किया गया। 100-100 रुपये के स्टांप पेपर पर 7 पन्नों में लिखे गए वसीयतनामा में दो वकीलों को गवाह भी बनाया गया है।

हालांकि, ऋषि शंकर द्विवेदी और वसीयत में गवाह वकील संजय मिश्र का दावा है कि तथाकथित सुइसाइड नोट और वसीयत में किए गए महंत नरेंद्र गिरि के हस्ताक्षरों में काफी अंतर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि, महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या करने वाले लोगों में नहीं थे।

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