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असम में शॉर्ट्स पहन परीक्षा देने पहुंची छात्रा को टीचर ने नहीं दी Exam में बैठने की इजाजत, फिर पर्दा लपेट बिठाया

Janjwar Desk
18 Sep 2021 6:05 AM GMT
असम में शॉर्ट्स पहन परीक्षा देने पहुंची छात्रा को टीचर ने नहीं दी Exam में बैठने की इजाजत, फिर पर्दा लपेट बिठाया
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परीक्षा देने पहुंची छात्रा ने पहनी थी शॉर्टस तो परीक्षा नियंत्रक ने रोका, बाद में पर्दा लपेटकर बैठने दिया एग्जाम में

पीड़ित लड़की जुबली के मुताबिक परीक्षा केंद्र में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा था, न तो किसी का मास्क चेक किया गया और न ही तापमान, लेकिन इस बात का ध्यान रखा गया कि शॉर्ट्स क्यों पहना है...

गुवाहाटी, जनज्वार। असम कृषि विश्वविद्यालय (Assam Agricultural University) की प्रवेश परीक्षा देने पहुंची 19 वर्षीय छात्रा जुबली (Jublee) के साथ परीक्षा नियंत्रक द्वारा बदसलूकी का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक असम कृषि विश्वविद्यालय(AAU) की प्रवेश परीक्षा देने गिरजानंद चौधरी इंस्टीट्यूट आफ फार्मासेयूटिकल साइंसेस (GIPS) पहुंची छात्रा को परीक्षा नियंत्रक ने पैरों में पर्दा लपेटकर परीक्षा (Exam) देने के लिए मजबूर किया, क्योंकि उसने शॉर्ट्स पहन रखा था। छात्रा का नाम जुबली बताया जा रहा है और वो असम के विश्वनाथ चारियाली की रहने वाली है। जुबली अपने पिता के साथ परीक्षा देने पहुंची थी। छात्रा ने बताया कि ये उसकी जिंदगी का सबसे शर्मिंदगी वाली घटना थी।

लड़की ने की शिक्षा मंत्री से शिकायत

पूरे मामले को लेकर अब छात्रा जुबली ने असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगु (Assam Education Minister Ranoj Pegu) को पत्र लिखने का विचार किया। यह मामला बुधवार 15 सितंबर का है। इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) की रिपोर्ट के मुताबिक असम के विश्वनाथ चारियाली की रहने वाली जुबली अपने पिता के साथ अपने घर से 70 किमी दूर असम कृषि विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा देने तेजपुर गई थी। जुबली तेजपुर के गिरिजानंद चौधरी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस (Girijananda Chowdhury Institute of Pharmaceutical Sciences) में बने परीक्षा केंद्र में परीक्षा देने पहुंची थी। जुबली का कहना है कि यहां उसे अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा।

परीक्षा नियंत्रक ने परीक्षा देने से रोका

जुबली ने मीडिया को दिए बयान में बताया कि परीक्षा केंद्र में सिक्योरिटी गार्ड (Security Guard) ने उसे जाने की अंदर जाने इजाजत तो दे दी, लेकिन जैसे ही वो एग्जाम हॉल की तरफ बढ़ी परीक्षा नियंत्रक ने उसे रोक दिया और कहा कि वो शॉर्ट्स पहनकर परीक्षा नहीं सकती। छात्रा जुबली के अनुसार जब उसने कहा कि एडमिट कार्ड में तो किसी ड्रेस कोड का जिक्र नहीं है तो परीक्षा नियंत्रक ने उसे फटकार भी लगाई। जुबली रोते हुए पिता के पास गयी। परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि यदि जुबली कहीं से एक ट्राउजर का जुगाड़ कर सकती है तो ही उसे परीक्षा देने दिया जाएगा। जुबली के पिता को नया कपड़े खरीदने के लिए 8 किमी दूर जाना पड़ता। इधर, परीक्षा का समय भी निकला जा रहा था।

जब कोई और रास्ता नहीं सुझा तो जुबली को अपने पैरों को पर्दे में लपेटकर परीक्षा देनी पड़ी। जुबली का कहना है कि परीक्षा दे रहे अन्य छात्र उसे घूर रहे थे। ये सब बेहद अपमानजनक था।

Admit Card में नहीं था Dress code का जिक्र

जुबली ने बताया कि एडमिट कार्ड में किसी भी ड्रेस कोड का जिक्र नहीं था। उसने कहा कि कुछ दिन पहले वो नीट की परीक्षा देने इसी शहर में आई थी। तब भी उसने ऐसी ही ड्रेस पहनी था, मगर वहां किसी ने ऐसे आपत्ति नहीं जताई। जुबली का कहना है कि केवल परीक्षा के लिए ही नहीं बल्कि असम कृषि विश्वविद्यालय का भी ऐसा कोई ड्रेस कोड नहीं है।

जुबली का आरोप है कि परीक्षा नियंत्रक ने चिल्लाते हुए कहा कि तुम में कॉमन सेंस नहीं है, जिंदगी में कैसे कामयाब बनोगी। जुबली ने कहा कि परीक्षा केंद्र में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा था। न तो किसी का मास्क चेक किया गया और न ही तापमान, लेकिन इस बात का ध्यान रखा गया कि शॉर्ट्स क्यों पहना है।

वहीं पीड़ित छात्रा जुबली के पिता ने मीडिया से हुई बातचीत में कहा, 'मेरी बेटी घबरा गई थी और उसने इस अपमानजनक घटना के बारे में कुछ स्थानीय पत्रकारों से बात की तथा फिर यह बात सोशल मीडिया पर छा गई। अनेक लोगों ने घटना की निंदा की, लेकिन कई ने मेरी बेटी पर ही हमला बोल दिया, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गई है।'

यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल ने क्या कहा

इस मामले में जीआईपीएस के प्रिंसिपल डॉ. अब्दुल बारीक अहमद ने कहा कि वे उस वक्त कॉलेज में मौजूद नहीं थे, लेकिन उनको घटना की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि इस प्रवेश परीक्षा में उनके कॉलेज की कोई भूमिका नहीं थी। इसे केवल परीक्षा केंद्र बनाया गया था। परीक्षा करवाने वाले तमाम कर्मचारी और परीक्षा नियंत्रक बाहर से आये थे। उन्होंने कहा कि शॉर्ट्स को लेकर कोई नियम नहीं है, लेकिन परीक्षा के दौरान डेकोरम मैंटेन किया जाना चाहिए। अभिभावकों को भी इसका ध्यान रखना चाहिए।

अब इस मामले में विश्वविद्यालय ने अपना बचाव करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। इसके रजिस्ट्रार तपन कुमार गोहैन का कहना है कि एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के डीन के नेतृत्व में समिति जांच करेगी और 10 दिन के अंदर रिपोर्ट देगी। उन्होंने कहा कि एएयू ने परीक्षार्थियों के लिए कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया था।

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