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शिक्षा

JNU News : रूसी भाषा में शोधार्थी मयंक की अचानक मौत से उठे कई सवाल, कौन देगा जवाब, प्रोटेस्ट आज

Janjwar Desk
23 March 2022 9:48 AM IST
रूसी भाषा में शोधार्थी मयंक की अचानक मौत से उठे कई सवाल, कौन देगा जवाब
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मयंक की मौत के खिलाफ प्रदर्शन आज।

JNU News : जेएनयू के छात्रों का कहना है कि मयंक की मौत जेएनयू कैंपस में स्वास्थ्य सुविधाओं को घोर अभाव और विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही की वजह से हुआ है।

नई दिल्ली। देशभर में प्रतिष्ठित जवाहर लाल विश्वविद्यालय ( JNU ) में मंगलवार को अचानक एक शोध छात्र मयंक ( Research Student mayank ) के निधन से यूनिवर्सिटी प्रशासन ( University Student ) के खिलाफ छात्रों में संतोष चरम पर पहुंच गया है। यह असंतोष किसी भी समय विस्फोटक रूप ले सकता है। जेएनयू के छात्रों का कहना है कि मयंक की मौत जेएनयू कैंपस में स्वास्थ्य सुविधाओं को घोर अभाव और विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही की वजह से हुआ है। मयंक का समय पर इलाज होने स्थिति में उसकी मौत नहीं होती।

दरअसल, जेएनयू ( JNU ) ताप्ती छात्रावास के रेसिडेंट मयंक रूसी भाषा में पीएचडी के शोध छात्र थे। मंगलवार को उनकी अचानक मृत्यु के बाद से छात्रावास में रहने वाले छात्रों में काफी रोष है। जानकारी के मुताबिक कल रात 8 बजे मयंक ने अचानक सीने में दर्द की शिकायत की। हालत गंभीर होने के वजह से मयंक को एम्स ले जाया गया, लेकिन एम्स पहुंचने से पहले रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मौत की वजह हार्ट अटैक बताया गया है।

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नींद से कब जागेगा जेएनयू प्रशासन

लेकिन मयंक की मौत ने कई सवाल कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या जेएनयू कैंपस में प्राइमरी सुविधाओं की भी व्यवस्था नहीं है। जबकि हजारों लोग जेएनयू परिसर में रहते हैं। क्या जेएनयू प्रशासन द्वारा यहां के छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता। सवाल यह भी है कि जेएयू हेल्थ सेन्टर में बेसिक इक्विपमेंट और इमरजेंसी सविधा क्यों नहीं है। आखिर कब तक जेएनयू प्रशासन की लापरवाही की वजह से एक होनहार शोधार्थी जान गंवाता रहेगा।

वार्डन ने तो हद कर दी

गंभीर चिंता की बात तो यह है कि हॉस्टल का वार्डन के अतिरिक्त तीन अन्य वार्डन हद से परे जाकर असंवेदनशीलता का परिचय देते हैं। एक शोध हॉस्टल में बच्चों से बात तक करने नही आते। शोक व्यक्त करना तो दूर की बात है। क्या देश की नंबर एक यूनिवर्सिटी का प्रशासन छात्रों की मौत को लेकर इतना लापरवाह हो सकता है। क्या जेएनयू में हर बीमारी का इलाज पैरासिटामोल और ORS है।

आखिर जेएनयू के हेल्थ सेन्टर की बेसिक सुविधाओं में कब सुधार होगा? छोटी—छोटी बीमारियों के लिए कब तक यहां के छात्रों को एम्स और सफदरजंग भेजा जाएगा? हेल्थ सेंटर और जेएनयू प्रशासन को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। आखिर कब तक वह कम सुविधाओं और इक्विपमेंट के न होने का रोना रोते रहेंगे।

प्रोटेस्ट में शामिल होने की अपील

JNU News : इस बीच ताप्ती के रेसिडेंट के छात्रों ने जेएनयू प्रशासन के खिलाफ बुधवार को प्रदर्शन का ऐलान किया है। ताप्ती के रेजिडेंट्स ने सभी से सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर ताप्ती छात्रावास से हेल्थ सेन्टर तक प्रस्तावित प्रोटेस्ट में शामिल होने की अपील की है। ताकि जेएनयू प्रशासन नींद से जागे और हेल्थ सेंटर में बेसिक सुविधाओं को बहार करने की दिशा में कोई कदम उठाए।

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