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Patna University Election Result : जेडीयू का लहराया परचम, छात्रसंघ के 5 पांच में से अध्यक्ष समेत 4 पदों पर कब्जा

Janjwar Desk
20 Nov 2022 3:37 AM GMT
Patna University Election Result : छात्र जेडीयू का लहराया परचम, छात्रसंघ के 5 पांच में से अध्यक्ष समेत 4 पदों पर कब्जा
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Patna University Election Result : छात्र जेडीयू का लहराया परचम, छात्रसंघ के 5 पांच में से अध्यक्ष समेत 4 पदों पर कब्जा

Patna University Election Result : पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव परिणाम से साफ है कि बिहार में नीतीश कुमार की सियासी हनक को कम होने की दलिलों को यहां के छात्रों ने खारिज कर दिया।

जनज्वार। बिहार में छात्र राजनीति के केंद्र बने पटना विश्वविद्यालय ( Patna University Student Union ) में इस बार छात्र जेडीयू ( JDU student Union win election ) ने अपना परचम लहराया है। छात्रसंघ के चुनाव में पांच प्रमुख पदों में से चार पर जेडीयू के छात्रसंगठन ने ही बाजी मारी है। जबकि एक पद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ( ABVP ) के हिस्से में गया। जीत के तमाम दावों के बावजूद आरजेडी के छात्र संगठन, एनएसयूआई समेत आइसा व अन्य वाम संगठन को छात्रों ने नकार दिया।

छात्रसंघ चुनाव ( student union election ) को लेकर एक माह तक कैंपस में गहमागहमी बनी रही। जिसके बाद 19 नवंबर को मतदान के साथ देर शाम मतगणना शुरू हुई। चुनाव परिणाम आधी रात से ही आने लगे थे। छात्र संघ चुनाव नतीजों से एक बात सामने आई कि बिहार में नीतीश कुमार की सियासी हनक को कम होने की दलिलों को यहां के छात्रों ने खारिज कर दिया। जेडीयू के सभी उम्मीदवार भारी अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। सेंट्रल पैनल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर छात्र जदयू का उम्मीदवार जीता है, वहीं महासचिव पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी समर्थित के उम्मीदवार ने बाजी मारी है।

अध्यक्ष पद पर छात्र जेडीयू के आनंद मोहन ने जीत हासिल की। इन्हें 3710 वोट मिला है। इनके मुख्य प्रतिद्वंदी रहे एआईएसएफ एनएसयूआई गठबंधन के शाश्वत कुमार को 2517 वोट मिला। उपाध्यक्ष के पद पर छात्र जेडीयू के विक्रमादित्य सिंह 1329 वोट से जीते हैं। विक्रमादित्य को कुल 4055 वोट और एबीवीपी की प्रतिभा को 2726 वोट मिले हैं। संयुक्त सचिव पद पर छात्र जेडीयू की संध्या कुमारी 2062 वोट से चुनाव जीती है। संध्या को 4787 वोट मिले और एबीवीपी के रवि करण को 2725 वोट प्राप्त हुआ। ऐसे में छात्र जेडीयू को काफी अंतर से विजय मिली। कोषाध्यक्ष पद पर छात्र जेडीयू के रविकांत 964 वोट से जीते हैं। रविकांत को 4006 वोट व एबीवीपी के वैभव को 3042 वोट प्राप्त हुए। महासचिव पद पर एबीवीपी के विपुल चुनाव जीते हैं। निर्दलीय मुदब्बीर को 2231 वोट मिला।

Patna University Election Result : काउंसलर पद पर जीते उम्मीदवारों के नाम

बीएन कॉलेज (तीन पद)- जितेंद्र कुमार, प्रकाश कुमार, शिवम कुमार

पटना वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज (एक पद)- शालू (निर्विरोध)

पटना लॉ कॉलेज (एक पद)- मृत्युंजय कुमार (निर्विरोध)

पटना ट्रेनिंग कॉलेज (एक पद)- राज किशोर (निर्विरोध)

कला एवं शिल्प महाविद्यालय (एक पद)- जीतू कुमार

सोशल साइंस संकाय (दो पद)- धीरज कुमार, अंशुमाली कुमार मिश्रा

मगध महिला कॉलेज (तीन पद)- माहिरा फातमा, प्रियंका कुमारी, ट्विंकल कुमारी

पटना कॉलेज (दो पद)- सलोनी सिंह, नीतीश कुमार

पटना साइंस कॉलेज (दो पद)- लक्ष्मण श्री, अमन कुमार

वाणिज्य महाविद्यालय (दो पद)- हर्षवर्द्धन, शिवम नयन

कामर्स, शिक्षा और ला संकाय (एक पद)- आदित्य आलोक

मानिवकी संकाय (एक पद)- अंकित कुमार

विकान संकाय (दो पद)- संजीव कुमार

फायरिंग व पथराव की आती रही खबरें

इससे हपले मतदान के समय गोली और बम विस्फोट को लेकर अफरातफरी बनी रही। पुलिस ने कई स्थानों पर लाठीचार्ज भी किया। दिनभर रुक रुक कर गोली और बम विस्फोट कर की खबरें मिलती रही। काउंटिंग स्थल के पास कुछ उपद्रिवयों ने हवा में कई राउंड फायरिंग किया है और बम भी फोडे। मतदान के दौरान हुई गोलीबारी में छात्र नेता गौतम आनंद घायल हो गए। मतगणना के दौरान बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढते जदयू छात्रसंगठन के कार्यकर्ताओं को लाठी चार्ज कर पुलिस को खदेड़ना पड़ा। कहा जाता है कि सेकेंड राउंड की गिनती के बाद जेडीयू से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और सचिव पद पर आगे होने के रुझान पर छात्र जेडीयू के कार्यकर्ता उत्साहित होकर नारा लगाते हुए विद्यापति भवन की ओर बढ़ने लगे। बैरिकेडिंग को पार करते हुए लगभग 50 मीटर दूरी तक आगे बढ़ गए। इस पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

54.53% हुआ मतदान

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के 31 पदों के लिए मतदान हुआ। इसके लिए कुल 51 बूथों पर छात्रों ने वोट किये। कुल 54.33 प्रतिशत मतदान हुआ। पटना महिला कालेज में सबसे ज्यादा वोट पड़े। यहां कुल 68.75 फीसदी वोटिंग हुई। सबसे कम मतदान का प्रतिशत पटना लाॅ कालेज का रहा। कुल 24395 छात्र-छात्राओं को मतदान का अधिकार मिला था।

आरजेडी को सबसे बड़ा झटका

पटना विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में सबसे बड़ा झटका छात्र राजद को लगा है। इसके पैनल के कोई भी उम्मीदवार चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सका। हालांकि राज्य में सत्ता में होने का असर जदयू के छात्रसंगठन ने दिखाया। कहा जा रहा है कि यहां के चुनावी इतिहास में किसी भी दल के छात्रसंगठन के रूप मंे जदयू की सबसे बड़ी सफलता है।

छात्रसंघ के चुनाव से ही उभरे लालू प्रसाद यादव

पटना विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की स्थापना साल 1956 में हुई थी। साल 1968 तक चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से कराए जाते थे। 100 पर एक काउंसलर चुने जाते थे और काउंसलर लोग मिलकर प्रेसिडेंट यूनियन का चुनाव करते थे। साल 1969 में लालू प्रसाद यादव, रामजतन सिन्हा और आदित्य पांडेय ने सीधी तरह से यानी कि वोटिंग के जरिए चुनाव कराने की मांग की। इसके बाद लालू पहले ही चुनाव में जनरल सेक्रेटरी के रूप में चुने गए। 1971 में पहली बार मतदान के जरिए छात्र संघ का चुनाव हुआ। इसमें अध्यक्ष पद के लिए लालू और रामजतन सिन्हा आमने सामने थे। हालांकि चुनाव में रामजतन सिन्हा की जीत हुई और लालू हार गए। लालू के हारने के बाद जनरल सेक्रेटरी के रूप में पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह निर्वाचित हुए। इसमें सुशील मोदी भी कैबिनेट मेंबर बने। रामजतन सिन्हा पूर्व एमएलसी हैं और वह प्रोफेसर भी रहे हैं। उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से हुए पीयू इलेक्शन का पहला छात्र संघ चुनाव जीता था। वर्ष 1973 में फिर जब पटना विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव हुए तो लालू यादव ने चुनाव अपने नाम किया था। उस वक्त लालू के लिए सबसे बड़ी चुनौती एबीवीपी संगठन थी, लेकिन लालू तब तक विश्वविद्यालय में इतने प्रसिद्ध हो चुके थे कि लोग उनको काफी पसंद करते थे। 1973 में लालू ने एबीवीपी से गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। उन्होंने पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह को हराया था। लालू प्रसाद यादव अध्यक्ष बने तथा सुशील मोदी महासचिव और रविशंकर प्रसाद सहायक महासचिव बने। लालू यादव यहां से और भी ज्यादा प्रसिद्ध हो गए। जेपी आंदोलन के दौरान लालू पूरी तरह से नेता के रूप में उभर कर आए। वहीं इमरजेंसी के चलते बीच में कुछ साल चुनाव नहीं हुआ। 1977 में चुनाव हुए तो एबीवीपी के उम्मीदवार अश्विनी कुमार चैबे प्रेसिडेंट बने। इसके बाद कुछ साल और सिलसिला चलता गया, लेकिन फिर चुनाव में हिंसक गति होने लगी जिसके चलते 1984 से 28 साल तक चुनाव को स्थगित कर दिया गया। फिर 2012 में चुनाव होना शुरू हुआ।



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