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UP : AMU ने दो इस्लामिक स्कॉलर्स को पाठ्यक्रम से हटाया, दक्षिणपंथी स्कॉलर्स ने पीएम मोदी को लिखी थी चिट्ठी

Janjwar Desk
4 Aug 2022 2:02 AM GMT
Aligarh Muslim University में पढ़ाया जाएगा सनातन धर्म, इस्लामिक स्टडीज डिपार्टमेंट में तैयारी शुरू
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Aligarh Muslim University में पढ़ाया जाएगा सनातन धर्म, इस्लामिक स्टडीज डिपार्टमेंट में तैयारी शुरू

UP : एएमयू ( Aligarh Muslim University ) ने अपने स्तर पर फैसला लेते हुए मौलाना अबुल आला मौदूदी और सैय्यद कुतुब को सिलेबस से हटा दिया है।

UP : अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ( Aligarh Muslim University ) इस्लामिक स्टडीज विभाग ने इस्लामिक स्कॉलर ( Islamic Scholars ) अबुल आला मौदूदी ( Abul Ala Maududi ) और सैय्यद कुतुब ( Syed Qutab ) को सिलेबस से हटा दिया है। दक्षिणपंथी स्कॉलर्स ( right wing scholars ) ने दोनों विद्वानों को पाठ्यक्रम से हटाने के लिए पीएम मोदी ( PM Narendra Modi ) को चिट्ठी लिखी थी। दक्षिणपंथी स्कॉलर्स ने पत्र में कहा था कि मौदूदी इस्लामिक कट्टरवाद से जुड़े हुए हैं और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में उन्हें और ऐसे अन्य स्कॉलर्स को नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। इस पत्र के कुछ ही दिनों बाद एएमयू ने अपने स्तर पर फैसला लेते हुए मौलाना अबुल आला मौदूदी और सैय्यद कुतुब को सिलेबस से हटा दिया है।

इस फैसले के बाद मधु किश्वर ने अपने ट्वीट में लिखा है कि मौलाना मौदूदी को हटाना यह स्वीकार करता है कि वह कट्टर खूनी जिहाद को ही मुसलमान का फर्ज बताते थे। अब उन्होंने यूनिवर्सिटी ( Aligarh Muslim University ) से पूरा सिलेबस रिव्यू करने की मांग की है।

बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता मधु किश्वर समेत देश के 20 से ज्यादा दक्षिणपंथी शिक्षाविदों ने बीते 27 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था जिसमें स्कॉलर्स ने एएमयू (AMU ), जामिया मिलिया इस्लामिया और हमदर्द यूनिवर्सिटी सहित राज्यों के अनुदान से चलने वाले विश्वविद्यालयों में मौलाना अबुल आला मौदूदी के लेखों की पढ़ाई कराए जाने पर एतराज जताया था। मधु किश्वर के मानुषी की वेबसाइट पर पीएम मोदी लिखा गया यह पत्र मौजूद है। पत्र में लिखा गया था। हम आपके ध्यान में लाना चाहते हैं कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और हमदर्द विश्वविद्यालय जैसे राज्य वित्त पोषित इस्लामी विश्वविद्यालयों के कुछ विभागों द्वारा बेशर्मी से जिहादी इस्लामिक पाठ्यक्रम का पालन किया जा रहा है।

हिंदू समाज, संस्कृति और सभ्यता पर कभी न खत्म होने वाले हिंसक हमले ऐसी शिक्षाओं का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। यह गहरी चिंता का विषय है कि प्रमुख इस्लामी विश्वविद्यालय ऐसी विचारधाराओं को वैधता और सम्मान का आवरण प्रदान कर रहे हैं। भारत के कुछ प्रमुख मुस्लिम नेताओं ने खुले तौर पर 2047 तक भारत का इस्लामीकरण करने के अपने दृढ़ संकल्प की घोषणा की है। हम करदाताओं और संबंधित नागरिकों के रूप में ऐसी शिक्षाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं। मधु किश्वर की चिट्ठी में मौलाना अबुल आला मौदूदी का बार-बार उदाहरण देते हुए और उनके लेखन का जिहादी संगठनों द्वारा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। चिट्ठी में पत्रकारों, रिसर्च स्कॉलर्स और लेखकों के लेखन के उदाहरण देकर यह बताने की कोशिश की गई है कि मौलाना अबुल आला मौदूदी इन सरकारी संस्थानों में पढ़ाए जाने लायक नहीं हैं।

इस्लामिक थिंकर्स ऑप्शनल पेपर

एएमयू ( AMU News ) के मास्स कम्युनिकेशन विभाग के प्रोफेसर और प्रवक्ता शाफे किदवई ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि इस्लामिक स्टडीज में एक ऑप्शनल पेपर है जिसका नाम है इस्लामिक थिंकर्स जिसमें सैय्यद कुतुब और मौलाना अबुल आला मौदूदी जैसे कई सारे इस्लामिक थिंकर्स हैं। यह कोई कम्पलसरी पेपर नहीं है। यह एक ऑप्शनल पेपर है। इनके विचारों को लेकर एक विवाद हो रहा था तो हमने उससे जुड़े पाठ्यक्रम को हटा दिया। यह ऑप्शनल पेपर है तो इसे रोका जा सकता था।

बांग्लादेश में दोनों की किताबों पर है बैन

बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने 2010 में आदेश दिया था कि देश की सभी मस्जिदों, मदरसों और पुस्तकालयों से मौलाना मौदूदी की लिखी किताबें हटा दी जाएं। बांग्लादेश की सरकार का उस समय कहना था कि मौलाना मौदूदी की किताबें चरमपंथी और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं। बांग्लादेश की सरकार समर्थक संस्था इस्लामिक फाउंडेशन के महानिदेशक शमीम मोहम्मद ने बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि मौदूदी का लेखन इस्लाम की शांतिपूर्ण विचारधारा के विरुद्ध है। इसलिए यह मस्जिदों में उनकी लिखी किताबें रखना सही नहीं है। ये बात अलग है कि उस समय जमात ए इस्लामी ने सरकार के इस कदम को इस्लाम विरोधी करार दिया था।

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