ग्राउंड रिपोर्ट

झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी मनरेगा योजना, सरकारी पैसों की हो रही है बंदरबांट

Janjwar Desk
11 July 2021 11:33 AM GMT
झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी मनरेगा योजना, सरकारी पैसों की हो रही है बंदरबांट
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(देवघर में सिंचाई कूप का काम पूरा किए बगैर निकाल लिए 3,99,167 लाख रूपए)

मनरेगा सोशल ऑडिट की टीम ने जांच के बाद जब लाभुक मुर्शीद आलम से बात की तो पाया कि लाभुक का कुंआ पूरा हुआ ही नहीं है और पूरी राशि कुल राशि 3,99,167 रुपये की निकासी कर ली गयी है...

विशद कुमार की रिपोर्ट

जनज्वार। झारखंड के देवघर जिले का सारवां प्रखंड का डहुआ पंचायत स्थित सुरसुरा गांव में मनरेगा के सिंचाई कूप का काम पूरा किए बगैर 3,99,167 लाख रूपए की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। इस अवैध निकासी का खुलासा तब हुआ जब मनरेगा सोशल ऑडिट की टीम ने जांच के बाद जब लाभुक मुर्शीद आलम से बात की तो पाया कि लाभुक का कुंआ पूरा हुआ ही नहीं है और पूरी राशि कुल राशि 3,99,167 रुपये की निकासी कर ली गयी है। मजे की बात यह है कि यह योजना 2019—20 की है।

(लाभुक मुर्शीद आलम)

बता दें इसकी रिपोर्ट बीडीओ और डीडीसी को भी भेजी गयी। सुरसुरा गांव के सिंचाई कूप के लाभुक मुर्शीद आलम ने भी सारवां बड़ीओ को आवेदन देकर इसकी जांच कर राशि की रिकवरी की मांग की है। लेकिन अभी तक कोई कार्यवाई नहीं हुई है। वहीं सारवां प्रखंड के बीडीओ सहित योजना से संबंधित कर्मचारियों का भी तबादला हो गया। बताना जरूरी होगा कि यह क्षेत्र जरमुंडी विधानसभा के तहत आता है, जहां के कांग्रेसी विधायक बादल पत्रलेख जो झारखंड सरकार के कृषि मंत्री हैं।

लाभुक मुर्शीद आलम ने बताया कि मनरेगा योजना के अंतर्गत वर्ग 2019–20 में मेरे नाम से एक सिंचाई कूप की स्वीकृति ग्राम सभा से हुई थी। जिसका योजना कोड 3422007008/IF/7080901293762 है तथा प्राक्कलित राशि 4,12,000 रूपये है। वर्ष 2019 में कूप का खुदाई कार्य प्रारंभ किया गया। लगभग 19-20 फिट खुदाई होने के बाद काम बंद कर दिया गया। माह फ़रवरी 2021 में जब सोशल ऑडिट की टीम मनरेगा योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण करने आयी तो टीम के BRP सलीम अंसारी के द्वारा मुझे जानकारी मिली कि मेरे सिंचाई कूप निर्माण कार्य मद में से मजदूरी मद में राशि 2,09,667 रूपये तथा सामग्री मद में राशि 1,89,500 रुपये की कुल राशि 3,99,167 रुपये की निकासी कर ली गयी है।

तो मुझे काफी आश्चर्य हुआ, क्योंकि उस समय मेरे कूप में खुदाई का कार्य भी पूरा नहीं हुआ था। ये तो अच्छा हुआ कि सोशल ऑडिट की टीम आई, अन्यथा मुझे मालूम ही नहीं होता। मेरे द्वारा इस बात की शिकायत सोशल ऑडिट टीम को लिखित में दी गयी एवं ग्राम सभा में संपुष्टि भी किया। दिनांक 1 मार्च 2021 को पंचायत स्तरीय जनसुनवाई में मुद्दा उठा तो ज्यूरी सदस्यों द्वारा निर्णय दिया गया कि सिंचाई कूप को एक माह के अन्दर पूर्ण कर दिया जाय।

(लाभुक मुर्शीद आलम का सिंचाई कूप

जनसुनवाई के पंद्रह दिन बाद किर्यान्वयन एजेंसी द्वारा कूप की खुदाई का कार्य किया गया तो मुझे लगा कि अब मेरे कूप का कार्य पूरा हो जायेगा, लेकिन 10 दिन के बाद ही पुनः काम को बंद कर दिया गया। मेरे द्वारा जब इसकी सूचना मुखिया कौशल्या देवी के पति अर्जुन हाजरा एवं वार्ड सदस्य बिजय कुमार सिंह को दी गयी तो उन लोगों ने मुझे पुनः आश्वासन दिया कि जल्द ही काम शुरू कर दिया जायेगा। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं किया गया है।

इसके बाद मैंने दिनांक 18 मई 2021 को प्रखंड विकास पदाधिकारी, सारवाँ को पत्र लिखकर कूप का निर्माण कार्य शीघ्र कराने का आवेदन दिया है एवं आवेदन की प्रति उपविकास आयुक्त, देवघर को एवं जिला संसाधन विभाग और सोशल ऑडिट यूनिट, देवघर को दी है। लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है। इधर पूर्व के प्रखंड विकास पदाधिकारी, सारवाँ का स्थानान्तरण भी हो गया है। पूर्व के संबंधित सभी कर्मचारी भी बदल गए हैं।

पलामू के रामगढ़ में बिना काम कराए निकाल लिए लाखों रुपए

पलामू जिले में कोरोना संक्रमण के बीच ही भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किये जा रहे हैं। मनरेगा योजनाओं में बिना काम किए ही फर्जी दस्तावेज खासकर मजदूरों के नाम संधारित कर राशि गबन की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। ताजा वाकया रामगढ़ प्रखंड के बेडमा बभंडीह का है, जहां तीन ऐसे मामले सामने आए हैं। इन मामलों में 49,950, 63,722, 32,400 और 52,364 रुपए निकाल लिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बताया जाता है कि सुदूर क्षेत्र होने की वजह से लोग धड़ल्ले से बिना काम कराए पैसों की निकाली कर ले रहे हैं।

केस 1

बेडमा बभंडीह गांव के कोरवादोहरी टोला में बिरसा मुंडा के खेत में डोभा निर्माण स्वीकृत है। जिसका योजना कोड 3405002025/आईएफ / 7080901378229 है। इसकी प्राक्कलित राशि 1.31 लाख है। कोरवादोहरी टोला के ग्रामीणों को योजना स्वीकृति की कोई जानकारी नहीं है और न ही पिछले 2 महीने के दौरान कोई डोभा निर्माण का कार्य किया गया है। जबकि उक्त योजना में 10 मई 2021 से 2 जून तक 13 मजदूरों के नाम से 49,950 रूपये की फर्जी निकासी कर ली गई है। पिछले वित्तीय वर्ष में 63,722 रूपये की निकासी कर ली गई थी।

(हुसैनाबाद प्रखण्ड का अधुरा योजना)

केस 2

कोरवादोहरी टोला के विकास बारला के खेत में डोभा निर्माण है, जिसका योजना कोड 3405002025/ आईएफ/7080901378230 है। इसकी प्राक्कलित राशि 1.31 लाख है। इसमें 10 से 23 मई तक 32,400 की निकासी की गई है। पिछले साल इसमें 52,364 रु. निकाले गए थे।

केस 3

बेडमा कोरवा दोहरी से हरि भुइयां के घर होते हुए शिव स्थान तक मिट्टी मोरम पथ निर्माण है। इसमें भी ग्रामीणों ने बताया कि पूरा काम जेसीबी द्वारा एक महीने पूर्व करा लिया गया है। झारखण्ड नरेगा वाच के संयोजक जेम्स हेरेंज ने कहा कि कार्रवाई के लिए पत्राचार करेंगे।

अफसरों ने क्या कहा

मामला प्रकाश मे आने के बाद रामगढ़ बीडीओ को उपरोक्त सभी मामले की जांच कर 24 घंटे में प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान जो भी दोषी पाए जाएंगे उनपर कार्रवाई की जाएगी राशि की रिकवरी की जाएगी। उप विकास आयुक्त शेखर जमुआर ने कहा है जांच के बाद राशि की रिकवरी की जाएगी।

झारखंड नरेगा वाच के राज्य संयोजक जेम्स हेरेंज ने बताया कि पलामू जिलान्तर्गत हुसैनाबाद प्रखण्ड के पतरा खुर्द पंचायत में 12 मनरेगा योजनाओं में वगैर कार्य कराये अथवा आंशिक कार्य कर फर्जी मस्टर रोल तैयार कर सरकारी राशि गबन कर लिए जाने की शिकायत मिलने के बाद झारखण्ड नरेगा वाच से जुड़े 4 सदस्यों द्वारा दिनांक 28 जून 2021 को एक दर्जन से अधिक मनरेगा योजना स्थलों का गहराई से अवलोकन किया गया, जिसमें 6 योजनाएँ धरातल पर क्रियान्वित की ही नहीं गई हैं।

(हुसैनाबाद प्रखण्ड का फर्जी योजना स्थल)

जबकि उन योजनाओं के फर्जी मस्टर रोल संधारित कर राशि की फर्जी निकासी ठेकेदारों और पंचायतकर्मियों द्वारा कर ली गई है। इसी प्रकार दो पथ निर्माण की योजनाएँ ऐसी हैं, जिसके कुछ ही जगहों पर सिर्फ पतले लेयर में मोरम डाला गया है, लेकिन वास्तविक कार्य से कई गुणा अधिक राशि निकासी कर ली गई है। ऐसे ही कई अनियमिताएँ बरती गई है, जिसका विस्तृत विवरण उल्लेखित है।

हेरेंज ने एक पत्र उप विकास आयुक्त–सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक जिला पलामू (झारखण्ड) को भेजा है। जिसमें उपर्युक्त गबन का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि यह आवेदन हम महात्मा गाँधी नरेगा कानून 2005, अनुसूची I की धारा 29 के अंतर्गत समर्पित कर रहे हैं। आपसे अपेक्षा की जाती है कि धारा 29 (क) से (छ) तक उल्लेखित क़ानूनी प्रावधानों के आधार पर यथोचित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे. इसके साथ ही सक्षम पदाधिकारी द्वारा योजना स्थल का भौतिक जाँचकर दोषी अधिकारियों एवं कर्मियों पर कानून सम्वत् प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। धन्यवाद।

जेम्स हेरेंज ने इसकी प्रतिलिपि उपायुक्त, पलामू / मनरेगा आयुक्त, झारखंड सरकार/ प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार को भी संबोधित किया है। लेकिन अभी तक कोई कार्यवाई की गुंजाइश नजर नहीं आई है।

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