जनज्वार विशेष

रामदेव की पतंजलि के नाम पर बनाई फर्जी वेबसाइट और कर ली 17 लाख की ठगी, लेकिन पुलिस FIR करने को नहीं तैयार

Janjwar Desk
28 Aug 2020 6:51 AM GMT
रामदेव की पतंजलि के नाम पर बनाई फर्जी वेबसाइट और कर ली 17 लाख की ठगी, लेकिन पुलिस FIR करने को नहीं तैयार
x

(आईएमए की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मांग- आधुनिक चिकित्सा सुविधा को खत्म कर दें या फिर योग गुरू बाबा रामदेव के खिलाफ मुकदमा चलाएं)

पतंजलि के नाम पर हुई लाखों की ठगी के बाद जब पीड़ित पहुंचा बालकृष्ण के पास और उसे दिखाई सुनील गुप्ता की आईडी और अन्य पेपर तो उन्होंने कहा आपके साथ किसी ने फ्रॉड किया है, इस नाम का कोई व्यक्ति हमारे यहाँ कार्यरत नहीं है और न ही आपके द्वारा उपलब्ध करवायी गयी कोई भी डिटेल पतंजलि की है...

फरीदाबाद से विवेक कुमार की रिपोर्ट

जनज्वार। नालंदा जिले की एक दुकान लकड़ा स्वीट्स में बैठकर बिहार का ठग धर्मेन्द्र हॉटस्टार देखते हुए फरीदाबाद के कृशन से 17 लाख से भी ज्यादा पैसे डकार कर आराम से चाय नाश्ता कर रहा है। दूसरी तरफ कृशन दर-दर की ठोकर खा रहा है कि फरीदाबाद पुलिस ठग धमेंद्र को पकड़ कर उसके पैसे वापस दिलाये।

बीते 19 अगस्त को फरीदाबाद सेक्टर 3 स्थित बजरंग ट्रेडिंग कंपनी के मालिक कृशन छिब के साथ पतंजलि आयुर्वेद के नाम पर 17 लाख 62 हज़ार रुपये की ठगी हो गई। ठगी करने वाला इंसान है बिहार का धर्मेंद्र। ठगी करने वाला धर्मेंद अब उल्टा कृशन को ही माँ-बहन की गालियां लगातार फ़ोन पर भी दे रहा है।

ऐसे में ध्यान जाता है फिल्म स्टार सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस पर। यदि आप फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर के साले हैं तो आपकी दो-दो एफ़आईआर दर्ज हो जायेंगी, सीबीआई को केस दिया जाएगा, पर यदि आप आम आदमी हैं तो एक भी मुक़दमा दर्ज होने में सालों लगेंगे और होगा कुछ नहीं।

यहां दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत का जिक्र इसलिए क्योंकि जिस फरीदाबाद का यह मामला है वहां के पुलिस कमिश्नर उनके जीजा ओपीसिंह हैं। पीड़ित कृशन जब पुलिस कमिश्नर ओपी सिंह के दफ्तर में इस बाबत शिकायत देने गया तो कह कर टाल दिया गया कि 4 दिन में वे तय करके बताएँगे कि किस विभाग को उनके साथ हुई ठगी का केस देना है।

पतंजलि के नाम पर ठगी का शिकार हुआ कृशन

हालांकि फरीदाबाद पुलिस ने झारखण्ड राज्य के जामतारा जिले में फिशिंग के एक बड़े और नए तरीके से ठगने वाले रैकेट का भांडा फोड़ने का दावा किया है और कुछ गिरफ्तारियां भी की हैं, पर कृशन का मामला इससे अलग है।

43 वर्षीय कृशन छिब, ट्रेडिंग और सप्लाई का काम करते हैं। कृशन कहते हैं, उन्हें सैमसंग कंपनी नोएडा में बतौर वेंडर एलोवेरा जूस व अन्य जूस की सप्प्लाई करने का आर्डर मिला। अधिक मुनाफा पाने के लिए कृशन ने गूगल सर्च इंजन पर पतंजलि आयुर्वेद के नाम से सर्च किया और वेबसाईट पर मौजूद टेलीफोन नम्बर 9875581729 पर सुनील गुप्ता नामक व्यक्ति, जिसने खुद को पतंजलि का कर्मचारी बताया, से सामान लेने के बारे में बात की।

सुनील के बाद शुक्ला उपनाम के एक अन्य व्यक्ति ने 9123982166 नम्बर से फ़ोन किया और कहा कि सामान की डिलीवरी से पहले उन्हें खाते में पैसा ट्रांसफर करना होगा। पतंजलि के नाम पर कृशन को दो बैंक खाते एचडीएफसी और आईडीबीआई के दिये गये और उसमें बतौर एडवांस 5 लाख की पेमेंट जमा करवाने को कहा गया। कृशन ने 5 लाख की रकम खाते में जमा करवा दी।

रकम जमा होने के बाद वेंडर कोड बनवाने और अन्य कई प्रकार के रीफंडेबल सिक्योरिटी के नाम पर कृशन से कुल 1762764/- रुपये जमा करवाये गये। इसके बाद कृशन के पास एक फ़ोन 9430997547 नंबर से आया, जिसमें फोन करने वाले ने खुद को माल लाने वाला ड्राईवर बताया और कृशन को सूचना दी कि आपका सामान मुजफ्फ़रनगर में पुलिस ने पकड़ लिया है। माल को छुड़ाने के लिए 2.5 लाख रुपये की रकम का एक लाइसेंस बनवाना होगा, जो कि बाद में कंपनी आपको वापस कर देगी।


पुलिस को दी गयी कृशन छिब की एप्लीकेशन की कॉपी जिसमें उसने बतायी है ठग की पूरी डिटेल

इस फोन के बाद कृशन को मामला थोड़ा संदिग्ध लगा और वो अपनी कार से मुजफ्फरनगर पहुंचे। वहाँ जाने पर उन्हें पता कि ऐसा कोई ट्रक पुलिस ने नहीं पकड़ा है। मुज़फ्फरनगर से पतंजलि की दूरी अधिक नहीं थी, इसलिए कृशन पतंजलि पहुंचे और वहां किसी तरह उनकी मुलाकात पतंजलि के सीईओ बालकृष्ण जोकि बाबा रामदेव के दायें हाथ हैं, से हुई।

ठगी के शिकार कृशन कहते हैं, 'रामदेव के सहयोगी और पतंजलि के मालिक बालकृष्ण ने सुनील गुप्ता नाम से आईडी और अन्य पेपर देखते हुए मुझसे कहा कि आपके साथ किसी ने फ्रॉड किया है, इस नाम का कोई व्यक्ति हमारे यहाँ कार्यरत नहीं है और न ही आपके द्वारा उपलब्ध करवायी गयी कोई भी डिटेल पतंजलि की है। साथ ही बालकृष्ण ने यह भी कहा कि इस तरह के कई फ्रॉड पतंजलि के नाम पर आये दिन उनके सामने आ रहे हैं और इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को भी दी है।'

यही सुनील गुप्ता खुद को बता रहा था पतंजलि का कर्मचारी

बालकृष्ण के मुंह से यह बात सुनते ही ठगी का शिकार हुए कृशन के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी की सूचना कृशन ने पुलिस कमिश्नर ऑफिस फरीदाबाद में जमा करवाई है, पर अभी तक पुलिस ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया है।

लाखों की ठगी की शिकायत के लिए लगभग 5 दिन से चक्कर काट रहे कृशन की एफआईआर अभी तक दर्ज नहीं की गयी है। पांच दिन बीतने के बाद भी पीड़ित को पुलिस कमिश्नर की तरफ से आश्वासन के नाम पर डीसीपी बल्लभगढ़ ऑफिस का एक फ़ोन कॉल मिला है, जिसमें सेक्टर 7 पुलिस थाना फ़रीदाबाद में शुक्रवार 28 अगस्त तक एफ़आईआर दर्ज हो जाने का हीलाहवाला दिया गया।

जब पीड़ित कृशन ने सम्बंधित चौकी पर बात की तो वहां मौजूज पुलिसकर्मियों ने यह कह कर टाल दिया कि "भाई पटना कोई यहीं ना धरा है, जब तक पुलिस जाएगी वो अपनी लोकेशन बदल लेगा।" पुलिस के इस रुख के बावजूद कृशन को सेक्टर 7 थाने से एफ़आईआर के बाबत सन्देश आने का इंतजार है।कृशन कहते हैं, जिस नम्बर पर उनकी सुनील गुप्ता से बात हो रही है, वह अब भी सेवा में है। बार-बार पेमेंट के लिए आने वाले फ़ोन से परेशान होकर कृशन ने सुनील को गालियाँ दीं और तबसे फ्रॉड करने वाले उस व्यक्ति के न जाने कितने ही धमकी भरे फ़ोन कृशन को आ रहे हैं, जिसमें वो कृशन को ही देख लेने और गाली-गलौज से भरी अपनी आवाज़ में रिकार्डिंग भी भेज रहा है।

कृशन के एकाउंट से हुए लेनदेन की डिटेल

फरीदाबाद पुलिस को शिकायत मिलने के बाद भी वह कोई एक्शन नहीं ले रही है। ध्यान देने की बात यह है कि फरीदाबाद के नए नवेले कमिश्नर पुलिस ओपी सिंह ने अपने साले व फ़िल्मी सितारे दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत के मामले में बिहार तक में एफ़आईआर करने की पैरवी की है। मगर जब बात आम जनता की आई तो कमिश्नर साहब को यही नहीं पता कि मामला किस विभाग को देना है और ये पता करने के लिए उन्हें चार दिन का वक़्त लगेगा।

हमारे देश में आम जनता को सत्तासीन रामराज्य के ख्वाब दिखाते हैं, मगर असलियत में जब उसके जान पर बन आती है तो पुलिस प्रशासन कोई मदद को आगे हाथ नहीं बढ़ाता। दूसरी तरफ ठगी से सारी पूँजी हड़पने वाला लुटेरा बेख़ौफ़ फ़ोन करके कृशन को धमका रहा है और पुलिस को भी इसकी कोई परवाह ही नहीं।

दूसरी तरफ सवाल यह भी उठता है क्या यह संभव है कि पतंजलि के नाम से एक वेबसाईट बाकायदा लोगों को बेवक़ूफ़ बना रही है और इस बात की सूचना होने के बावजूद बालकृष्ण और दिन रात टीवी चैनलों पर विराजमान रहने वाले योगगुरु के नाम से ख्यात रामदेव की शिकायत पर आज की तारीख में पुलिस कार्यवाही न करे?

पतंजलि के नाम पर बने बैंक खाते की डिटेल, जिसमें भेजी थी कृशन ने लाखों की रकम

अगर ऐसा है तो फिर पतंजलि के बाबा रामदेव और बालकृष्ण भी शक के घेरे में आने चाहिए। आम आदमी का नाम भी गलती से ऐसे मामले में आ जाता तो यही पुलिस उस व्यक्ति को बिना दिन-रात का समय देखे और सारे कानूनों को ताक पर फेंककर उठा लाती।

यदि रामदेव और बालकृष्ण सही मायनों में अपनी कंपनी के नाम से होने वाले धोखाधड़ी से चिंतित होते तो उनकी एक शिकायत पर गूगल ऐसी फ़र्ज़ी वेबसाइटों को बंद कर चुका होता, जबकि आजतक उस फर्जी वेबसाईट का लिंक गूगल पर बदस्तूर जारी है। साथ ही पुलिस ने कड़ी कार्यवाही करते हुए कभी न कभी किसी न किसी को तो पकड़ा ही होता। इन सबसे साफ़ है कि न तो बाबा रामदेव ने और न ही बालकृष्ण ने अपनी कंपनी के नाम पर होने वाले इन मामलों पर कोई गंभीर संज्ञान लिया और न ही लेना चाहते हैं।

यह बात इसलिए कि जिस बाबा के एक इशारे से पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी जैसे बड़े पत्रकार की नौकरी चली गई, वह यदि मीडिया के सामने इतना भर ही कह दें कि पतंजलि के नाम से ऐसे फ्रॉड हो रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है तो क्या सच में पुलिस चुप बैठी रह सकेगी? क्या कृशन जैसे लोगों की गाढ़ी कमाई बची नहीं रहेगी?

मगर रामदेव एंड कंपनी की तरफ से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शायद इसका कारण यह भी हो सकता है कि रामदेव और उनकी कंपनी खुद भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है। बालकृष्ण का नाम तो हत्या जैसे संगीन अपराधों में संलिप्त रह चुका है।

​जिसके माध्यम से ठगी का शिकार हुआ कृशन, वह वेबसाइट अभी भी गूगल पर खुल रही है आसानी से यानी ठगी का सिलसिला है जारी

कृशन ने जिस अकाउंट में पैसे डाले वह खाता और जिस पर बात हुई वह मोबाइल नम्बर बिहार के पटना जिले और नालंदा जिले से सम्बंधित हैं। यह वही बिहार है जहां के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे विकास दुबे को ज़मीन से खोद कर ला रहे थे और भाजपा की राजनीति चमकाने के लिए सुशांत सिंह राजपूत मामले में कूद-कूद कर रिया चक्रवर्ती की औकात बताते हुए सुशांत को न्याय दिलवाने के लिए मरे जा रहे थे।

अब आम जनता को न्याय दिलाने के नाम पर उन्हें भी सांप सूंघ गया है। कृशन ने इस मामले की जानकारी डीजीपी बिहार को भी उनके आधिकारिक मेल पर भेज कर दी है, पर उस पर अभी तक न कोई कार्यवाही की गई न ही जवाब आया। पुलिस इस मामले में कार्यवाही करेगी या नहीं करेगी, पर यह बात तय है कि ऐसे फ्रॉड रोज़ आम जनता के साथ हो रहे हैं।

जिन दो बैंक खातों में कृशन से पैसे जमा करवाए गए उनसे निकल कर पैसा एक खाते 133015500803 जो कि आईसीआईसीआई बैंक का खाता है, उसमें गया। ये खाता डीएचएम मार्केटिंग एंड एसोसिएट्स के नाम से बिहार में नालंदा जिले के भरावपेर की ब्रांच में पंजीकृत है, जिसमें धर्मेन्द्र नामक व्यक्ति मालिक बताया गया है।

फरीदाबाद क्राइम सेल को दी है कृशन ने एप्लीकेशन, जिस पर अभी तक नहीं की गयी है कोई कार्रवाई

खाते की लेनदेन समरी से लगता है कि यह व्यक्ति इस पूरे मामले की एक छोटी मछली है, जो एक खाते से पैसा लेकर दूसरे में डालने के बदले अपना कमीशन लेता है। पर इस एक लीड से बड़ी मछलियों पर शिकंजा कसा जा सकता है, बशर्ते पुलिस को काम करके नाम कमाने की आदत पड़े तो। पेमेंट करने का एक खास तरीका है, जिसमें छोटे-छोटे पेमेंट्स ई-वालेट के माध्यम से हो रहे हैं और यह एक सुरक्षित तरीका है जिसमे ठग को ट्रैक न किया जा सके।

सूंघ कर क्राइम पकड़ने का दावा करने वाले फ़िल्मी पुलिस को इस केस में आधा काम हमने करके दे दिया है अब इससे आगे की जांच और इन सूचनाओं की सत्यता जांचने के बाद एक्शन लेना कमिशनर का काम है। देखते हैं कमिश्नर ओपी सिंह को अपने साले से इतर भी न्याय की कोई परिभाषा याद है?

कृशन छिब के खाते की डिटेल, जिसमें दिख रहा है कि किन खातों में गया है पैसा

ऐसा ही एक फ्रॉड इंदिरा गाँधी के ज़माने में दिल्ली संसद भवन मार्ग स्थित शाखा के बैंक एसबीआई में हुआ था, जिसे पुलिस ने मात्र चंद मिनटों में अपराधी फ़ौजी अफ़सर को पकड़ लिया। ऐसा तब हुआ जब तकनीक का कोई स्तर नहीं था। पर हाँ, उसमें नाम प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी का आया था और उसी का असर था जो अपराधी एक दिन में पकड़े गए।

इसी तरह अब नाम पतंजलि के बाबा रामदेव और बालकृष्ण का आया है, जो भाजपा सरकार में दिन दोगनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं और क्यों, ये सब जानते हैं। तो क्या बाबा को भी अपनी इज्ज़त की कुछ लाज बची है या वो भी रामलीला मैदान में सलवार के साथ उतार फेंकी, देखना बाकी है।

Next Story

विविध

Share it