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Kamla Bhasin Feminist Icon : 21वीं सदी का सबसे लोकप्रिय नारा 'हम छीन के लेंगे आजादी' दिया था कमला भसीन ने

Janjwar Desk
25 Sep 2021 8:59 AM GMT
Kamla Bhasin Feminist Icon : 21वीं सदी का सबसे लोकप्रिय नारा हम छीन के लेंगे आजादी दिया था कमला भसीन ने
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( कमला भसीन : प्रख्यात मानवतावादी और नारीवादी लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता )

'कई करोड़ लड़कियों को पढ़ने नहीं दिया जाता है, इसके अलावा कई करोड़ महिलाओं को हर साल घर से निकाल दिया है, ऐसे में चुप रहना सही नहीं है और हक़ की लड़ाई लड़ते रहना चाहिए' : कमला भसीन

जनज्वार ब्यूरो। प्रख्यात मानवतावादी और नारीवादी लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता कमला भसीन (Kamla Bhasin) का निधन हो गया है। वे देश के साथ-साथ विश्वभर में एक मजबूत जनवादी महिला के रूप में जानी जाती थीं। कमला भसीन (Kamla Bhasin) का जाना निश्चित तौर पर महिला आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। भसीन एक महिला कार्यकर्ता के साथ-साथ एक बेहतरीन लेखिका भी थी। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में महिलाओं के ऊपर कई प्रख्यात पुस्तक के साथ-साथ कविताएं भी लिखी हैं।

कमला भसीन पितृसत्तात्मक समाज के प्रति हमेशा मुखर रही हैं। पितृसत्तात्मक समाज को खत्म करने के लिए उन्होंने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि एशिया के कई देशों में जगह-जगह कार्यक्रम किए थे। उन्होंने एक मीडिया हाउस से बात करते हुए कहा था, 'कई करोड़ लड़कियों को पढ़ने नहीं दिया जाता है, इसके अलावा कई करोड़ महिलाओं को हर साल घर से निकाल दिया है, ऐसे में चुप रहना सही नहीं है और हक़ की लड़ाई लड़ते रहना चाहिए।'

"आजादी, आजादी, हम छीन के लेंगे आजादी", यह नारा कमला भसीन ने ही सबसे पहले दिया था। यह नारा उनकी एक कविता, आजादी, का मुखड़ा था—

आजादी

आजादी, आजादी

हम छीन कर लेंगे आजादी

है हक़ हमारा आजादी

जान से प्यारी आजादी

फासीवाद से आजादी

पूंजीवाद से आजादी

सामंतवाद से आजादी

प्यारी, प्यारी आजादी

आजादी, आजादी

कमला भसीन की नजर में जो नारीवाद था, उसकी पूरी व्याख्या उनकी एक कविता, नारीवाद का बहुबचन, में प्रस्तुत है—

नारीवाद का बहुबचन

मैं दो कारणों से नारीवाद को बहुवचन में लिख रही हूँ

एक तो इसलिए कि मुझे स्त्रीलिंग पुल्लिंग का न करना पड़े इस्तेमाल।

दूसरा इसलिए क्योंकि मेरी नज़र में एक नहीं, अनेक हैं नारीवाद

और मेरे नारीवाद में भी है कई नारिवादों का स्वाद।

मेरे नारीवाद जीवन जैसे सरल हैं पानी जैसे तरल हैं

जहां जैसी ज़रूरत होती है वहाँ वैसे हो जाते हैं

और, कहीं भी पितृसत्ता के आगे सर नहीं नवाते हैं।

बचपन में मैं नारीवाद शब्द को तो नहीं जानती थी

पर इनकी हक़ीक़त को पहचानती थी।

इसीलिए पितृसत्ता मुझे कभी रास न आई

उसकी सोच और करतूतें मुझे न भाईं।

जेंडर शब्द भी मुझे कहाँ आता था

मगर लड़की लड़के में फ़र्क किया जाना नहीं भाता था।

माँ बाप अच्छे थे, सो पहना वो जो मन को भाया

खेला वो जो जी में आया।

धीरे धीरे दुनिया देखी, करी पढ़ाई

फिर हौले हौले अपनी नारीवादी समझ बनाई।

मेरे नारीवाद वैचारिक हैं, नहीं हैं जिस्मानी

इसलिए औरत मर्द दोनों हो सकते हैं नारीवादी, गर है ठानी।

नारीवाद नहीं है औरत मर्द के बीच लड़ाई की कहानी

ऐसी अफ़वाहें तो हैं पितृसत्तात्मक शैतानी।

मेरे नारीवाद का मक़सद है सब की बराबरी सब की आज़ादी

जेंडर न कर पाए किसी की भी बरबादी।

इसीलिए मेरे नारीवाद में हैं ट्रांसजेंडर और मर्द

हम महसूस करते हैं सब जेंडर्स और सेक्सेस के दर्द।

मेरे नारीवाद के निशाने पर हैं सब तब्कियाती निज़ाम

पिदरशाही, जात, क्लास, रेस, सब का ही करना होगा काम तमाम।

चूंकि पितृसत्ता ग्लोबल भी है लोकल भी

मेरे नारीवाद भी लोकल भी हैं ग्लोबल भी।

मेरे लिए नारीवाद सफ़र भी है मंज़िल भी

यह आसान भी है मुश्किल भी।

नारीवाद विचारधारा भी है कार्य भी

यह जद्दोजहद हमारे अन्दर भी है बाहर भी।

नारीवाद चाहें वही जो कहता है हमारा संविधान

हो सब के लिए समानता, आज़ादी, अधिकार और सम्मान।

हम तोड़तीं नहीं परिवार, अमन चैन हर घर में हम तो चाहती हैं

तभी तो ज़ुल्मों ज़लालत को घर घर से हम हटवाती हैं।

कुछ सत्ता के दीवाने, समानता से घबराने वाले लोग

यूँ हीं बताते रहे हैं नारीवाद को एक रोग।

नारीवादी अर्बन, नारीवादी वेस्टर्न ऐसी अफ़वाहें लोग फैलाते रहे

हम मर्दों की दुश्मन, हम धर्मों की दुश्मन, हमें मर्दाना औरत बताते रहे

अब न तानों से डरें, अब न घुट घुट के मरें, एकता लाने के लिए, धूम मचाने के लिए।

मुलाक़ात न की, हम से बात न की, बिना समझे ही हम से हैं शिक़वे किये

हमें बुर्जवा कहा, एंटी-लेफ़्ट कहा, ऐसे कितने ही हम को हैं फ़तवे दिए

अगली पीढ़ी के लिए, कड़वे ये घूँट पिए, एकता लाने के लिए धूम मचाने के लिए।

आओ देखें ज़रा, नारीवाद है क्या, इतना हल्ला और इतना फ़साद है क्या

हमारी मांग है एक, बड़ी सीधी और नेक, ज़ुल्मों बंदिशों से होना चाहें रिहा

सोच के देखो ज़रा, इसमें क्या कुछ है बुरा, एकता लाने के लिए, धूम मचाने के लिए।

नारीवादी चाहें, औरतें मुक्ति पायें, हक़ बराबर के हों पूरा सम्मान हो

औरत आजाद हो, न वो बरबाद हो, नारी होने का उसको भी अभिमान हो

आओ ये नारा लगे, नारीवाद प्यारा लगे, एकता लाने के लिए, धूम मचाने के लिए।

औरों पर ऊँगली उठाने से पहले, करते हैं मेरे नारीवाद मुझ से सवाल

मेरे पितृसत्तात्मक विचारों, व्यवहारों, श्रृंगारों, रिश्तों पर मचाते हैं बबाल।

मैं नवाती हूँ सर नारीवाद को

क्योंकि समानता की बात और अधिकार दिए हैं हमें नारीवाद ने

आज़ादी से सोचना और बोलना सिखाया हमें नारीवादी संवाद ने

यह नारीवाद की देन है कि हम औरतें भी अब इन्सान मानी जाती हैं, सर उठा चल पाती हैं

मर्दों जैसे हम भी देश की बराबर की नागरिक मानी जाती हैं।

तो आओ दोस्तो, एक बार फिर से ये नारा लगे

हम सब इंसाफ़ पसंदों को नारीवाद प्यारा लगे।

बॉलीवुड की नामी अदाकारा और सामाजिक सरोकारों के प्रति सजग शबाना आजमी ने कमला भसीन के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है, 'तेजतर्रार कमला भसीन ने अपनी आखिरी लड़ाई, गायन और जीवन को अच्छी तरह से जीने का जश्न मनाया है। उनकी कमी हमेशा खलेगी। उनकी साहसी मौजूदगी हंसी और गीत, उनकी अद्भुत ताकत उनकी विरासत है। हम सब इसे संजो कर रखेंगे।'

कमला भसीन की पुस्तकें

कैंसर रोग से ग्रस्त रहीं कमला भसीन का 75 साल में जाना न सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा नुकसान है, बल्कि पुस्तक प्रेमियों के लिए भी एक कमला भसीन का जाना एक बड़ी छति है। कमला भसीन ने जेंडर 'लिंग', बच्चों और सामाजिक बराबरी पर आजीवन काम किया। भारत में महिला समूहों के एक नेटवर्क 'संगत—ए—​फेमिनिस्ट' से जुड़ी रहीं वरिष्ठ नारीवादी कार्यकर्ता कमला भसीन का गीत 'क्योंकि मैं लड़की हूं, मुझे पढ़ना' है, बहुत चर्चित रहा। उनकी लिखी किताबें और पुस्तिकाएं 30 से ज्यादा भाषाओं में प्रकाशित होती रही हैं। उनके कुछ महत्वपूर्ण कामों में उनकी लिखी किताब 'Women in India's Partition, Understanding Gender, and What Is Patriarchy' खासी चर्चित रही है।

कमला भसीन का बहुत साफ मानना था कि नारीवादी यानी ​फेमिनिज्म विदेशी सोच है। वह मानती थीं की नारीवाद मूलत: भारतीय विमर्श है और यह मर्द और औरत में फर्क करना नहीं सिखाता, बल्कि विचार की लड़ाई है, जो औरत की ओर से है।

कमला भसीन की महत्वपूर्ण पुस्तकें

Exploring Masculinity

Understanding Gender

Borders and Boundaries: Women in India's Partition

What is Patriarchy?

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