आजीविका

इंसानों को मारकर टाइगर बचाने की सरकारी नीति किसी भी शर्त पर नहीं बर्दाश्त, 2 दशक में 6 हजार से ज्यादा लोगों पर जानवरों ने किया हमला

Janjwar Desk
14 Dec 2023 11:44 AM GMT
इंसानों को मारकर टाइगर बचाने की सरकारी नीति किसी भी शर्त पर नहीं बर्दाश्त, 2 दशक में 6 हजार से ज्यादा लोगों पर जानवरों ने किया हमला
x
Ramnagar news : ग्रामीणों ने सरकार को समस्याओं के समाधान हेतु 4 दिन का वक्त दिया था, मगर वन प्रशासन एवं सरकार ने जनता की समस्याओं को हल करने की जगह धमकाने का काम किया, जिस कारण मजबूरन ग्रामीणों को कार्बेट पार्क बंद करना पड़ा....

रामनगर। जंगली जानवरों से इंसानों, फसलों, मवेशियों की सुरक्षा तथा जंगली जानवरों के हमले में मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए का मुआवजा और घायलों को 10 लाख रुपए का मुआवजा तथा संपूर्ण इलाज की गारंटी आदि मांगों को लेकर ग्रामीणों एवं विभिन्न संगठनों द्वारा आज 14 दिसंबर को धरना प्रदर्शन किया गया। ढेला रेंज कार्यालय के समक्ष धरनारत लोगों ने कार्बेट नेशनल पार्क के ढेला झिरना जोन में आज 14 दिसंबर को पर्यटकों की आवाजाही ठप कर दी गई तथा इस दौरान समस्याओं का समाधान न किए जाने पर आगामी 21 दिसंबर को वन परिसर रामनगर में धरने की घोषणा की है।

इस दौरान जनता की समस्या सुनने मौके पर पहुंचे तहसीलदार, कोतवाल व उपनिदेशक कॉर्बेट रिजर्व ने जनता को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया तथा पीसीसीएफ उत्तराखंड से वार्ता कराने का आश्वासन भी दिया।

धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हम पर्यावरण व टाइगर संरक्षण के खिलाफ नहीं है परंतु इंसानों को मारकर टाइगर व जंगली जानवरों को बचाने की नीति को किसी भी शर्त पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि टाइगर और तेंदुए अब विलुप्त प्रजाति नहीं रह गई है। वे जंगलों में ही नहीं, बल्कि गांव और शहरों में भी घुसकर लोगों को पर हमले कर रहे हैं। पिछले 20 वर्षों में 6 हजार से भी अधिक लोग जंगली जानवरों के हमले का शिकार हो चुके हैं। अतः इनको वन्य जीव संरक्षण अधिनियम में संरक्षित अनुसूची से बाहर किया जाना चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि वन प्रशासन पटरानी के बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है। गांव से स्कूल आते-जाते वक्त यदि जंगली जानवर बच्चों पर हमला कर देगा तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, अतः सरकार को बच्चों को स्कूल आने जाने के लिए निशुल्क बस की व्यवस्था करनी चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि 9 दिसंबर को ग्रामीणों ने सरकार को समस्याओं के समाधान हेतु 4 दिन का वक्त दिया था, मगर वन प्रशासन एवं सरकार ने जनता की समस्याओं को हल करने की जगह धमकाने का काम किया, जिस कारण मजबूर होकर कार्बेट पार्क बंद करने का कार्यक्रम लेना पड़ा। कार्यक्रम संयोजक ललित उप्रेती ने बताया कि 21 दिसंबर को बड़ी संख्या में लोग वन परिसर रामनगर पहुंचेंगे और वहीं पर आगामी कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।

Next Story

विविध