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भीमा कोरेगांव मामले में जेल में बंद प्रो. हनी बाबू के परिजनों की भावुक अपील, कहा उनकी जिंदगी खतरे में

Janjwar Desk
12 May 2021 8:21 AM GMT
भीमा कोरेगांव मामले में जेल में बंद प्रो. हनी बाबू के परिजनों की भावुक अपील, कहा उनकी जिंदगी खतरे में
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हनी बाबू के परिजनों ने कहा, संक्रमण में यदि एक दिन की भी देरी की गई तो उनके आंखों की न सिर्फ रोशनी जा सकती है बल्कि यदि संक्रमण का जहर उनके दिमाग तक पहुंचा तो उनकी जान भी जा सकती है...

जनज्वार। प्रोफेसर हैनी बाबू भीमा कोरोगांव मामले में एक विचाराधीन कैदी हैं। जुलाई 2020 से ही बिना ट्रायल के वह तजोला जेल में बंधक हैं। अब उनकी पत्नी जेनी रोवेना और भाई हरीश एमटी एंड एमटी अंसारी ने एक बयान जारी कर कहा है कि उनकी जिंदगी को जेल में खतरा है।

परिजनों के मुताबिक जेल में ही हैनी बाबू की आंखों में संक्रमण हुआ था। उनकी बांयी आंख की रोशनी लगभग नहीं ही बची है। माथे से लेकर कान और नीचे ठुड्डी तक सूजन फैली हुई है। उनके अन्य अंग भी प्रभावित हैं। संक्रमण के कारण शरीर में मस्तिष्क तक जहर फैलने का खतरा है, इससे उनकी जान तक जा सकती है।

परिजनों के मुताबिक असहनीय पीड़ा के कारण न ही हनी बाबू नींद ले पा रहे हैं और न ही अपनी दिनचर्या के काम कर पाने में समर्थ हैं। जेल में जबरदस्त पानी की किल्लत के कारण उन्हें साफ पानी तक नहीं मिल रहा, ताकि वह अपनी संक्रमित आंखों पर पानी की कुछ बूंदे तक छिड़क पाएं। उन्हें मजबूर किया जा रहा है कि वह अपनी संक्रमित आंखों को सख्त तौलिए से साफ करें।

परिवार के बयान के अनुसार, 'हैनी बाबू 3 मई, 2021 से बायीं आंख में पीड़ा और सूजन महसूस कर रहे हैं। जल्द ही उनके संक्रमण ने न सिर्फ पीड़ा बढ़ाई, बल्कि इसके कारण उन्हें कोई भी चीज दोहरी और धुंधली नजर आने लगी। जेल के स्वास्थ्य अधिकारी ने भी यह सूचित किया कि हैनी बाबू के आंखों के संक्रमण के इलाज के लिए यहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, इन्हें तत्काल किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श और उपचार चाहिए होगा। लेकिन उन्हें अभी तक परामर्श के लिए नहीं ले जाया जा सका है क्योंकि एस्कॉर्ट अधिकारी वहां उपलब्ध नहीं थे। 6 मई, 2021 को उनके वकील ने मजबूर होकर तजोला जेल के अधीक्षक को एक ई-मेल लिखा, जिसके बाद 7 मई को उन्हें वाशी के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया।

वाशी सरकारी अस्पताल में हैनी बाबू का परीक्षण एक नेत्र विशेषज्ञ ने किया और उन्होंने परामर्श में कहा कि इन्हें जीवाणुरोधी (एंटी-बैक्टीरियल) दवाएं दी जाएं और दो दिन के बाद दोबारा चिकित्सकीय परामर्श के लिए लाया जाए। उनकी स्थिति लगातार बिगड़ रही है और इसके बावजूद दो दिन बाद उन्हें अस्पताल नहीं ले जाया गया है। उन्होंने सूचित किया है कि इस बार भी वजह यही है कि जेल में एस्कॉर्ट अधिकारी नहीं है।

10 मई को हैनी बाबू के वकील श्री पायोशी राय ने जेल अधीक्षक से बात करने के लिए करीब 8 बार फोन किया, जबकि अधीक्षक ने फोनलाइन पर आने से मना कर दिया। रात करीब 8:30 बजे जेलर ने सूचित किया कि श्रीमान राय जी वह हैनी बाबू की स्थिति से अवगत हैं और अगले रोज उन्हें अस्पताल ले जाने का इंतजाम कर रहे हैं। वकील पायोशी राय ने एक ई-मेल भी अधीक्षक को किया और प्रार्थना में कहा कि हैनी बाबू को अस्पताल ले जाने में किसी तरह की कोताही न की जाए। ई-मेल में उनके सेहत की गंभीरता पर भी जोर दिया गया और बताया गया था कि ऐसे संक्रमण में यदि एक दिन की भी देरी की गई तो उनके आंखों की न सिर्फ रोशनी जा सकती है बल्कि यदि संक्रमण का जहर उनके दिमाग तक पहुंचा तो उनकी जान भी जा सकती है। हालांकि, उन्हें 11 मई को भी अस्पताल नहीं ले जाया गया।

परिजनों का कहना है, बीते कुछ दिन बहुत ही कष्टकारी और चिंताजनक रहे हैं, यह सोचकर कि हैनी बाबू को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भीख मांगनी पड़ रही है। यह हृदय को चीरकर रख देना वाला है। यहां तक कि आज भी वकील पायोशी राय के जरिए कई बार जेल में फोन करने के बाद भी हमें किसी तरह का जवाब नहीं मिला है। हमें यह भय है कि यह मलिन व्यवस्था ऐसे कई जेलों में होगी और वहां भी लोगों को इस तरह का अपूर्णीय नुकसान उठाना पड़ रहा होगा।

परिवार ने कहा है इस हालत में हम मांग करते हैं कि इस तरह के गंभीर मामलों में तत्काल और उचित चिकित्सकीय देखभाल पूरी पारदर्शिता के साथ लोगों को मिलनी चाहिए। आखिरकार हम सिर्फ भारतीय संविधान के तहत निहित गारंटीशुदा प्रदत्त अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

(दिये गये नोट में परिजनों ने लिखा है, यह पूरी आशंका है कि ये मामला ब्लैक फंगस का है। प्रोफेसर बाबू की मृत्यु किसी भी वक्त हो सकती है, यदि जेल वाले तत्काल नहीं जगे।)

-प्रोफेसर हैनी बाबू के परिजनों द्वारा अंग्रेजी में जारी किये गये बयान का विवेक मिश्रा ने हिंदी में अनुवाद किया है।

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