Top
आंदोलन

दलित ग्राम प्रधान की पत्नी की गुहार, मुझे मुआवजा नहीं न्याय दिलाये योगी सरकार

Janjwar Desk
17 Aug 2020 2:36 PM GMT
दलित ग्राम प्रधान की पत्नी की गुहार, मुझे मुआवजा नहीं न्याय दिलाये योगी सरकार
x

गोल घेरे में मारे गये दलित ग्राम प्रधान सत्यमेव जयते की पत्नी, योगी सरकार से लगाती न्याय की गुहार

मौत के घाट उतारे गये दलित ग्राम प्रधान की पत्नी ने पूछा, क्या 5 लाख में वापस आ जायेंगे मेरे पति...

लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या यानी 14 अगस्त को आज़मगढ़ में दलित प्रधान सत्यमेव जयते उर्फ पप्पू प्रधान की हत्या कर दी गयी थी।

इस घटना के बाद सामाजिक राजनीतिक संगठन रिहाई मंच ने तरवां थाना अंतर्गत बांसगांव का दौरा किया। मृतक प्रधान और 12 वर्षीय सूरज कुमार के परिजनों से मुलाकात की। ग्राम प्रधान के परिजनों ने जातिगत कारणों से हत्या का आरोप लगाया है।

मृतक प्रधान की पत्नी विलाप करते हुए कहती हैं, मेरे पति ही मेरे और 3 बच्चों का सहारा थे। वह भी हत्यारों ने छीन लिया। ये कैसी सरकार है जहां जनता का प्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं है, उसे दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी जा रही है।

पति की मौत के सदमे में पत्नी न्याय की भीख मांगते हुए कहती है, जैसे मेरे पति की हत्या हुई है सरकार उसी तरह से दोषियों को फांसी दे। क्या योगी सरकार के दिए हुए पांच लाख से मेरे पति वापस आ जाएंगे, मेरे बच्चों के सर पर बाप का साया वापस आ जायेगा, मुझे न्याय चाहिए। प्रधान की पत्नी कहती हैं कि अगर सरकार उन हत्यारों को सजा नहीं देती है तो सरकार भी उतनी ही दोषी होगी जितने कि वह हत्यारे हैं।

मृतक प्रधान की भतीजी रो-रो कर कहती है, यह कैसी आजादी है क्या इस सरकार में हम लोग आजाद हैं, क्योंकि उनके चाचा प्रधान सत्यमेव जयते की हत्या आजादी के ठीक एक दिन पहले होती है। क्या योगी सरकार मेरे छोटे-छोटे भाइयों और मेरी बहनों के सिर के ऊपर उनके बाप का साया लौटा सकती है। वे सरकार को भी उतना ही दोष देती हैं जितना कि हत्यारों को।

प्रधान की हत्या के बाद न्याय की गुहार लगाते परिजन

परिजन कहते हैं, आखिरकार ऐसे हत्यारे किसके सहारे खुलेआम घूम रहे हैं। मृतक ग्राम प्रधानकी भतीजी सरकार के दिए हुए मुआवजे पांच लाख की जगह पर पचास लाख का मुआवजा की मांग रखती है। प्रधान के छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई उनके शिक्षा-दीक्षा के लिए बोलती हैं कि जिस तरह से किसी विधायक और सांसद के परिवार को ऐसी स्थिति में सहयोग मिलता है वैसे ही सरकार इस परिवार का सहयोग करे क्योंकि वे भी एक जनप्रतिनिधि थे।

सत्यमेव जयते की भतीजी कहती है, मामला यहीं पर नहीं थम रहा है, तमाम प्रकार की धमकियां आ रही हैं। चिल्ला-चिल्ला कर रो-रोकर वह कहती हैं कि कोई आकर गांव में यह बताया और यह चैलेंज करके गया है कि अभी तो एक हत्या हुई है अभी तो 9 हत्याएं बची हुई हैं। आखिर किस प्रकार से हम मान लें कि हम सलामत हैं।

मृतक प्रधान की भाभी कहती हैं कि मेरी देवरानी के छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनमें उनकी सबसे बड़ी जो बच्ची है वह 9 साल की है। दो लड़के हैं एक 6 साल का और एक 4 साल का है। वह सरकार से यह अनुरोध करती हैं कि दोषियों को सजा तो मिले ही मिले हमारा अधिकार है। परिवार को आगे बढ़ने के लिए हमारी देवरानी को एक सरकारी नौकरी, बच्चों को निशुल्क शिक्षा और उनके लिए एक घर की मांग रखती हैं।

वह कहती है, जिस तरह से ऐसी घटना किसी सवर्ण जाति के व्यक्ति के साथ होती है तो घर, जमीन, नौकरी, बच्चों के निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जाती है, उसी तरह से मेरे देवर भी जनता के प्रतिनिधि थे और उनको भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। आज बिटिया 9 साल की है कल जब वह बड़ी तो शादी विवाह किस प्रकार से होगी। उसके भविष्य को देखते हुए योगी सरकार हमारी मांगो को पूरा करे, अगर ऐसा नहीं होता है तो हम ऐसी सरकार का बहिष्कार करते हैं।

गौरतलब है कि मृतक ग्राम प्रधान सत्यमेव जयते 30 सदस्यों वाले एक बड़े संयुक्त परिवार में रहते थे। परिजनों का कहना है कि काफी सोच-विचार के बाद उनका नाम 'सत्यमेव जयते' रखा गया था। वहीं उनके भतीजे का नाम दास प्रथा समाप्त करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के नाम पर 'लिंकन' रखा गया।

रिहाई मंच प्रतिनिधिमंडल को प्रधान के बड़े भाई और आर्मी से रिटायर्ड एक्स हवलदार रामप्रसाद ने बताया कि उनके भाई की हत्या श्रेयांश कुमार दुबे, विवेक सिंह उर्फ गोलू, विजेंद्र सिंह उर्फ गप्पू और वसीम ने मिलकर की है।

घटना के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले श्रेयांश अपना चरित्र प्रमाण पत्र बनाने को कह रहा था। उसके पिता ने प्रधान को मना किया था, इसलिए प्रधान ने मना कर दिया, जिसके बाद कई बार वो इस विषय पर घर आया। घटना से दो दिन पहले श्रेयांश रात में दारू पीकर आया और प्रमाण पत्र न बनाने पर गाली भी दी थी और मारने कि बात कही।

14 अगस्त को श्रेयांश प्रधान को बुलाकर ले गया और कहा कि चलो गप्पू सिंह बुला रहे हैं। प्रधान साथ में अपनी गाड़ी से चल दिए, पर कुछ आगे जाने के बाद एक आटा चक्की के पास से श्रेयांश ने प्रधान को अपनी गाड़ी पर बिठा लिया और साथ ले गया। जहां इन लोगों ने पहले से शूटर बुला रखा था और उन लोगों ने वहां इनकी हत्या कर दी।


प्रधान की हत्या के बाद ग्रामीणों के विरोध दर्ज करने के दौरान एक बच्चे के मौत हो गई। 12 वर्ष के सूरज जिसकी मौत हुई, उसका चचेरे भाई दीपक कहता है, प्रधान की हत्या कि बात जानने के बाद गांव में आक्रोश की लहर थी। हमने अपना प्रतिनिधि खोया था। हम लोग उसका विरोध कर रहे थे। तभी पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। उसी दौरान पुलिस की दो गाड़ी गुजरी, जिनमें एक सीओ की गाड़ी थी जिसकी चपेट में आने से मेरे भाई की मौत हो गई। पुलिस ने घटना को छुपाने के लिए अज्ञात वाहन पर मुकदमा लिखा है। गांव वालों का सवाल है कि पुलिस के इतने बंदोबस्त में अज्ञात गाड़ी कैसे हो गई।

मृतक प्रधान सत्यमेव जयते के बड़े भाई राम प्रसाद ने बताया कि घटना के दूसरे दिन 15 अगस्त की दोपहर 2 बजे डीएम साहब गांव में आए और 24 घंटे में अपराधी सलाखों के पीछे होंगे, इसका आश्वासन दिया। दोनों परिवारों को 5-5 लाख रुपए का चेक दिया।

प्रधान के बड़े भाई मांग करते हैं कि एक जन प्रतिनिधि की हत्या हुई है, योगी सरकार इसे संज्ञान में ले और उनके पत्नी और बच्चों के देखभाल के लिए उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी मुहैया कराए और 50 लाख रुपए राहत के लिए दे। गांव में जिस बालक की मौत हुई है उसके पास रहने के लिए घर नहीं है ऐसे में उसके लिए घर और उसके माता-पिता को भी राहत राशि 50 लाख रुपए दे। एफआईआर की कॉपी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बारे में पूछने पर बताया कि अभी कुछ नहीं मिला है।

रिहाई मंच प्रतिनिधि मंडल ने तरवां थाना के बीबीपुर गांव में 15 अगस्त की रात 2 बजे हुए हिंसक हमले के पीड़ितों के परिजनों से भी मुलाकात की। आमिर अहमद के परिजनों ने बताया कि पुराने कोटेदार की जांच आमिर द्वारा कराई गई थी, जिसके चलते अनिल सिंह पूर्व कोटेदार ने रात सोते समय कुल्हाड़ी से हमला करवाया, जिसमें आमिर को गम्भीर चोटें आईं और इस समय वे वेदांता अस्पताल में भर्ती हैं।

प्रतिनिधि मंडल में एडवोकेट विनोद यादव, अवधेश यादव, उमेश कुमार, अरविंद कुमार, सूरज कुमार, बांकेलाल यादव, श्रवण यादव और दीपक यादव शामिल थे।

Next Story

विविध

Share it