आंदोलन

खोरी गांव से उजाड़ने के बदले फ्लैट देने का सरकारी दावा बिल्कुल फर्जी : आंदोलनकारी

Janjwar Desk
15 July 2021 8:25 AM GMT
खोरी गांव से उजाड़ने के बदले फ्लैट देने का सरकारी दावा बिल्कुल फर्जी : आंदोलनकारी
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(फरीदाबाद का खोरी गांव कई साल पुराना असंगठित क्षेत्र के मजदूर परिवारों का गांव है)

जनज्वार से बातचीत में खोरी गांव के सामाजिक-राजनीतिक संगठनों से जुड़े आंदोलनकारियों ने कहा कि मीडिया में बयान के अलावा कभी अधिकारियों ने फ्लैट या मुआवजे पर स्थानीय लोगों से कोई बात नहीं की...

जनज्वार, फरीदाबाद। हरियाणा के बड़खल विधानसभा क्षेत्र में आने वाले गांव खोरी को पूरी तौर पर उजाड़ने को लेकर सरकार और प्रशासन पर कमर कस चुके हैं। ​कल और आज मिलाकर करीब 300 घरों को सरकारी इशारे पर बुल्डोजरों से जमींदोज कर दिया गया है।

हालांकि 5 हजार घरों और 10 हजार परिवार वाले खोरी गांव-बस्ती के लोग भी अपने घरों से उजड़ने को तैयार नहीं हैं, पुलिस की लाख सख्ती और तानाशाही के बावजूद वह लगातार विरोध कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि वह उजड़ने वाले परिवारों को फ्लैट देने को तैयार है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि यह खालिस मीडिया में बयानबाजी है और आंदोलन को भटकाने का तरीका है।

खोरी गांव में पत्रकारों के जाने पर लगी पाबंदी के बाद गांव के लोग खुद अपने आंदोलन की फोटो और वीडियो जनज्वार को भेज रहे हैं। लोगों को कहना है कि जब तक सरकार के प्रतिनिधि आकर उन्हें आवासीय सुविधा की लिखित गारंटी नहीं देते, वह लोग अपने घरों से उजाड़े जाने के बावजूद यहां से टस से मस नहीं हटेंगे। यही वजह से है कि विश्वकर्मा कॉलोनी, विजय चौक, सरदार कॉलोनी और बंगाली कॉलोनी के करीब 600 से अधिक घरों के टूटने पर भी लोग उसी मलबे पर पॉलीथीन डालकर रह रहे हैं।

7 जून को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश बाद से खोरी गांव के लोगों को अपने घरों को खाली करने के प्रशासन की ओर से जानकारी दे दी गयी थी।

खोरी गांव के लोग मकान तोड़े जाने के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। हाथ में मकान बचाओ की तख्तियों वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। महिलाओं ने जमीन पर लेटकर तोड़फोड़ कर विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक जिन लोगों का बड़थल विधानसभा जिसके अंदर खोरी गांव आता है, वहां का वोटर कार्ड हो और आमदनी 3 लाख से कम हो, उन्हें ही मकान के बदले फ्लैट दिया जायेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खोरी गांव में देशभर के मजदूर रहते हैं, जिनका वोटर कार्ड तो छोड़िये अन्य भी कोई पहचान नहीं है, वह कहां से वोटर आईडी का जुगाड़ करेंगे। स्पष्ट है कि लाख से भी ज्यादा आबादी वाले खोरी का बहुतायत सरकार द्वारा आवंटित किये जाने वाले फ्लैट से वंचित रह जायेगा, यानी वह न घर का रहेगा न घाट का।

जनज्वार खोरी गांव के ग्राउंड लेबल से जानकारियां उपलब्ध कराने वाले लोगों के नाम यहां इसलिए नहीं दे रहा है, क्योंकि नाम सामने आने के बाद पुलिस उन्हें उठा लेगी, या फिर उनके खिलाफ कोई और एक्शन लिया जा सकता है।

शासन-प्रशासन के दावे के मुताबिक नगर निगम ने खोरी में तोड़फोड़ से पहले एक ड्रोन सर्वे कराया था, जिसमें हरियाणा सीमा के अंदर कुल 6400 मकान आए थे। इन मकानों में रहने वाले लोगों को ही फ्लैट दिए जाएंगे। इसके लिए खोरी के जिन ग्रामीणों को फ्लैट दिये जायेंगे, उन्हें हरियाणा सरकार की पुनर्वास पॉलिसी की शर्तों का पालन करना होगा।

निगम कमिश्नर डॉ. गरिमा मित्तल ने मीडिया से कहा, खोरी में रहने वाले घर के मालिक को वोटर कार्ड, बिजली का बिल या फिर परिवार पहचान पत्र में से कोई भी एक दस्तावेज दिखाना होगा। साथ ही घर के सदस्य की इनकम 3 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। जो भी इन शर्तों को पूरा करेगा, वह आवेदन कर सकता है। इसके लिए खोरी के पास ही कैंप लगाया जाएगा। जहां लोग दस्तावेज जमा करवा सकते हैं।

कमिश्नर डॉ. गरिमा मित्तल के मुताबिक डबुआ कॉलोनी में 1766 व बापू नगर में 779 फ्लैट्स खाली हैं। कुल 2545 फ्लैट्स खोरी के लोगों को दिए जाएंगे। अगर ज्यादा लोगों के आवेदन आते हैं तो उन्हें भी पुनर्वसासित किया जाएगा। डबुआ व बाबू नगर में बने फ्लैट्स की कुल कीमत 3 लाख 77 हजार 500 रुपये है, जिसमें अलॉटमेंट लेने के लिए 15 दिन के अंदर 17 हजार रुपये जमा कराने होंगे। इसके बाद 15 साल तक 2500 रुपये प्रतिमाह किस्त देनी होगी।

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