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तिलका मांझी के शहादत दिवस कार्यक्रम में मोदी सरकार के कृषि कानून व नई शिक्षा नीति के विरोध का संकल्प

Janjwar Desk
13 Jan 2021 6:50 PM GMT
तिलका मांझी के शहादत दिवस कार्यक्रम में मोदी सरकार के कृषि कानून व नई शिक्षा नीति के विरोध का संकल्प
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विश्वविद्यालय परिसर में शहीद तिलका मांझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण का दृश्य।

भागलपुर में तिलकामांझी के 236वें शहादत दिवस पर मोदी सरकार के कृषि कानून एवं नई शिक्षा नीति का विरोध करने का संकल्प बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन ने लिया।

भागलपुर। बिहार के भागलपुर में बुधवार (13-01-2021) को बहुजन नायक तिलका मांझी का शहादत दिवस मनाया गया। इस मौके पर तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में स्थित शहीद तिलका मांझी की प्रतिमा पर बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन ने माल्यार्पण किया और उनकी विरासत को बुलंद करने का संकल्प लिया। इस मौके पर बहुजन बुद्धिजीवी डॉ विलक्षण रविदास ने कहा कि आज भारत और भागलपुर-संथाल परगना प्रक्षेत्र के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी महान क्रांतिकारी किसान नेता एवं महान मूलनिवासी बहुजन नायक अमर शहीद तिलका मांझी का 236वां शहादत दिवस है। इस अवसर पर हम अपने 35 वर्षीय अमर युवा शहीद के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए उनकी जुझारू लड़ाकू विरासत को बुलंद करने और फिर से देशी-विदेशी पूंजीपति व उसके दलालों से देश को बचाने के लिए निर्णायक जंग लड़ने का संकल्प लेना है।

वहीं, डाॅ योगेंद्र ने कहा कि शहीद तिलका मांझी ने मात्र 29 वर्ष की आयु में 1779 में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी की 10 वर्षीय कृषि ठेकेदारी की आर्थिक लूट की व्यवस्था व फूट डालो राज करो की नीति, आदिवासियों एवं किसानों का किए जा रहे सूदखोरी महाजनी शोषण,पहाड़िया-संताल जनजातियों के विद्रोहों, आन्दोलनों को कुचलने की दमनकारी नीतियों कार्यों के खिलाफ मूलनिवासी किसानों को संगठित कर विद्रोह का बिगुल बजा दिया था। शहीद तिलका मांझी के वारिस के आज कृषि पर देशी-विदेशी पूंजीपतियों के कब्जे को रोकने के लिए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे किसानों के साथ खड़े होने की जरूरत है।

माल्यार्पण व श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के रिंकु यादव, अंजनी भी मौजूद थे।

प्रतिवाद मार्च निकालते संगठन के सदस्य।

इस मौके पर बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन, बिहार के सोनम राव और विभूति ने कहा कि तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के छात्र तिलका मांझी की विरासत को बुलंद करते हुए देशी-विदेशी पूंजीपतियों के कब्जे से खेत व खेती बचाने के लिए लड़ रहे किसानों के साथ हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा देश को देशी-विदेशी पूंजीपतियों को सौंप देने के खिलाफ किसान, मजदूर, छात्र, नौजवानों को मिलकर निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।

अभिषेक आनंद और राजेश रौशन ने कहा कि नई शिक्षा नीति. 2020 संपूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने और शिक्षा व्यवस्था को देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हवाले कर देने के लिए लाया है। इससे बहुसंख्यक आबादी शिक्षा से वंचित होगी, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

सौरव राणा और ऋषि राज ने कहा कि निजीकरण के जरिए मोदी सरकार बेरोजगारी बढ़ा रही है और देश को गुलाम बना रही है।

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