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हाईकोर्ट ने मंजूर की दिल्ली हिंसा में आरोपी जामिया स्कॉलर फैजान खान की जमानत याचिका, फर्जी सिमकार्ड मामले में आया था नाम

Janjwar Desk
23 Oct 2020 4:54 PM GMT
हाईकोर्ट ने मंजूर की दिल्ली हिंसा में आरोपी जामिया स्कॉलर फैजान खान की जमानत याचिका, फर्जी सिमकार्ड मामले में आया था नाम
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photo : social media

कोर्ट ने कहा जामिया स्कॉलर आरोपी फैजान खान के खिलाफ UAPA झूठे बयान पर लगाया गया था, रिकॉर्ड पर मौजूद मटेरियल और जांच एजेंसी की स्टेटस रिपोर्ट में गवाहों के बयानों को छोड़कर यूएपीए, 1967 के तहत अपराध के सबूत नहीं मिले हैं...

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार 23 अक्टूबर को दिल्ली दंगों के आरोपी और जामिया के स्कॉलर आसिफ इकबाल तनहा को सिम कार्ड की आपूर्ति करने वाले फैजान खान को जमानत दे दी।

कोर्ट ने पाया कि आरोपी के खिलाफ यूएपीए झूठे बयान पर लगाया गया था, जिसके बाद उसकी जमानत याचिका को मंजूरी दे दी गई। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत के नेतृत्व वाली हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ ने खान को जमानत देते हुए उल्लेख किया, "रिकॉर्ड पर मौजूद मटेरियल और जांच एजेंसी की स्टेटस रिपोर्ट में गवाहों के बयानों को छोड़कर यूएपीए, 1967 के तहत अपराध के सबूत नहीं मिले हैं।"

पीठ ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं है जैसे कि सीसीटीवी फुटेज, वीडियो क्लिप या याचिकाकर्ता के किसी भी समूह के साथ चैट रिकॉर्ड, बजाय इस आरोप के अलावा कि उसने दिसंबर 2019 में एक फर्जी आईडी पर सिम कार्ड प्रदान किया और उसके लिए उसने मात्र 200 रुपये लिए थे।

पीठ ने कहा, "यह अभियोग का मामला नहीं है, उसने कई सिम कार्ड दिए हैं और ऐसा ही करता आ रहा। वह न किसी चैट समूह का हिस्सा था या न ही किसी ऐसे समूह का हिस्सा था जिसने वर्तमान मामले में अपराध की साजिश रची थी और यह भी अभियोग का मुद्दा नहीं है।"

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमानत देते हुए उसे 25,000 रुपये का निजी मुचलका जमा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, "मेरे विचार से याचिकाकर्ता जमानत के हकदार हैं।"

कोर्ट ने आगे कहा, "इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि याचिकाकर्ता ने जांच में पूरी तरह से सहयोग किया है और जांच एजेंसी द्वारा निर्देशित किए जाने पर खुद को पेश कराया है।"

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा या सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।

खान ने कथित तौर पर एक अब्दुल जब्बार के नाम से फर्जी तरीके से पंजीकृत सिम कार्ड की आपूर्ति की थी, लेकिन वास्तव में इसका इस्तेमाल जामिया के छात्र सफोरा जरगर की अध्यक्षता वाली जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी (जेसीसी) द्वारा किया गया था।

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