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किसान आंदोलन में पहली बड़ी फूट, गुरनाम सिंह चढूनी को संयुक्त मोर्चा ने दिखाया बाहर का रास्ता

Janjwar Desk
18 Jan 2021 6:52 AM GMT
किसान आंदोलन में पहली बड़ी फूट, गुरनाम सिंह चढूनी को संयुक्त मोर्चा ने दिखाया बाहर का रास्ता
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किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी पर लगा कांग्रेस नेता से पैसे लेने का आरोप, संयुक्त किसान मोर्चा ने न केवल आंदोलन से किया बाहर बल्कि संगठन से भी कर दिया है सस्पेंड...

जनज्वार, चंडीगढ़। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी को कांग्रेस नेता से भारी-भरकम पैसे लेने और भाजपा को छोड़ विपक्ष के बाकी नेताओं से एक मीटिंग करने के आरोप में संयुक्त किसान मोर्चा ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

हालांकि चढूनी का कहना है कि उन्होंने किसी नेता से कोई पैसा नहीं लिया है, उन्हें फंसाया जा रहा है ताकि किसान आंदोलन को कमजोर किया जा सके। कल 17 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा ने चढूनी पर लगे आरोपों के बाद एक बैठक आयोजित की। बैठक में चढूनी को संयुक्त मोर्चा के सभी सदस्यों के गुस्से का सामना करना पड़ा।

सामने आ रही खबरों के मुताबिक संयुक्त किसान मोर्चा की सबसे मुख्य 7 सदस्यीय कमेटी से भी चढूनी को निलंबित कर दिया गया है। उन्हें 19 जनवरी को केंद्र सरकार से होने वाली बैठक से भी बाहर रखा जाएगा।

गुरनाम सिंह चढूनी पर आरोप लगा कि हरनाम सिंह चढूनी ने कल 17 जनवरी को राजनीतिक पार्टियों के साथ दिल्ली में एक सम्मेलन किया था और इस सम्मेलन में बीजेपी को छोड़कर बाकी विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया था। उन पर कांग्रेस के एक बड़े नेता से पैसे लेने का आरोप भी लगा है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने गुरनाम सिंह चढूनी को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए 7 सदस्य समिति भी गठित कर ली गयी है। समिति के सामने चढूनी को अपना पक्ष रखना होगा। जांच पूरी होने तक संयुक्त किसान मोर्चा की आंतरिक बैठकों और केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक से चढ़ूनी बाहर भी रहेंगे। हालांकि चढूनी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि किसान आंदोलन को कमजोर करने के लिए उन्हें फंसाया जा रहा है।

गुरनाम सिंह चढूनी पर संगठन के अंदरखाने ही आरोप लग रहे हैं कि वे इसके बहाने राजनीति कर रहे हैं। चढूनी पर यह भी आरोप है कि वो संगठन से अलग फंडिंग करते हैं जिसका कोई हिसाब नहीं दिया जाता। उनके टेंट में लगातार राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के आने की भी बातें सामने आ रही हैं। आरोप यह भी है कि उन्होंने राजनीतिक दलों को आंदोलन में शामिल करने की कई बार कोशिश की। संगठन के लोगों का कहना है कि दिल्ली में 3 बार 10, 14 और 17 जनवरी को किसान संसद के नाम पर चढूनी ने राजनीतिक लोगों को बुलाया था।

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