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UP पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान 1621 शिक्षा कर्मचारियों की मौत, शिक्षक संघ ने सभी परिवारों को 1 करोड़ देने की रखी मांग

Janjwar Desk
18 May 2021 7:05 AM GMT
UP पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान 1621 शिक्षा कर्मचारियों की मौत, शिक्षक संघ ने सभी परिवारों को 1 करोड़ देने की रखी मांग
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photo - social media

शिक्षक संघ की तरफ से सरकार को भेजी गई लिस्ट के मुताबिक मृतक 1621 कर्मयारियों में 1332 शिक्षक, 209 शिक्षा मित्र, 25 अनुदेशक, 5 बीईओ, 15 क्लर्क और अन्य कर्मचारी शामिल थे, की मौत हुई है...

जनज्वार ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की कोरोना से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ ने दावा करते हुए कहा है कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान 1600 से ज्यादा सरकारी स्कूल कर्मचारियों की मौत हुई है।

प्राथमिक शिक्षक संघ ने सभी मृतकों के परिजनों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने इस बाबत सीएम योगी आदित्यनाथ को एक चिट्ठी भी लिखी है। इस चिटठी में दावा किया गया है कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी में लगे 1621 सरकारी कर्मचारियों की मौत हुई है।

शर्मा ने इन सभी 1621 सरकारी स्कूल स्टाफ का नाम, स्कूल, जिला, मोबाइल नंबर और मृत्यु की तारीख तक का ब्योरा शासन को भेजा है। इस लिस्ट के मुताबिक मृतक 1621 कर्मयारियों में 1332 शिक्षक, 209 शिक्षा मित्र, 25 अनुदेशक, 5 बीईओ, 15 क्लर्क और अन्य कर्मचारी शामिल थे।

दिनेश चंद्र शर्मा का दावा है कि 26 अप्रैल तक तीसरे चरण के चुनाव तक प्राथमिक शिक्षा विभाग के 706 कर्मचारियों के कोरोना से मौत हो चुकी थी। मतगणना के दो हफ्ते बाद ये संख्या 1600 के पार निकल चुकी थी। उन्होंने दावा किया कि मतदान के दौरान और मतगणना के समय कोविड -19 प्रोटोकॉल को बिल्कुल भी फॉलो नहीं किया गया।

पंचायती राज के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा है कि 'हमने सभी 75 जिलाधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में लगे शिक्षकों और चुनाव ड्यूटी के दौरान मारे गए शिक्षकों की रिपोर्ट जमा करने को कहा था। हम सोमवार तक सभी डेटा को एक साथ जोड़ लेंगे। मामला पहले से ही अदालत में है क्योंकि शिक्षक संघ ने अपना प्रतिनिधित्व दिया है।'

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में 15 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच चार चरणों में पंचायत चुनाव हुए थे। चुनाव का रिजल्ट दो मई को आया था। तब से लेकर अब तक लगातार मृतक कर्मचारियों की संख्या कम होने की बजाय और भी अधिक हो गई।

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