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राष्ट्रीय

हमें नया इतिहास लिखने से कोई नहीं रोक सकता : Amit Shah

Janjwar Desk
11 Jun 2022 10:42 AM IST
Amit Shah ने क्यों कहा मुझे इतिहास लिखने से कोई नहीं रोक सकता है, क्या हैं इसके मायने?
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Amit Shah ने क्यों कहा मुझे इतिहास लिखने से कोई नहीं रोक सकता है, क्या हैं इसके मायने?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ( Amit shah ) ने 10 जून को ईएनटी सर्जन डॉ. ओमेंद्र रत्नू की पुस्तक 'महाराणा: सहस्र वर्षों का धर्मयुद्ध' पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इतिहास विकृत तरीके से लिखा, लेकिन हमें कौन रोक सकता है, हमारा इतिहास लिखने से। अब हम स्वाधीन हैं। किसी के मोहताज नहीं हैं।

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ( Amit shah ) ने 10 जून को ईएनटी स्पेशलिस्ट सर्जन ओमेंद्र रत्नू की पुस्तक 'महाराणा: सहस्र वर्षों का धर्मयुद्ध' पुस्तक का विमोचन करने के बाद कहा - "यह एक तथ्य है कि कुछ लोगों ने इतिहास को विकृत कर दिया है। उन्हें जो कुछ भी करना था, उन्होंने लिखा है लेकिन हमें अपने तरीके से इतिहास लिखने से कौन रोक सकता है? हमें कोई नहीं रोक सकता। अब हम स्वाधीन हैं। किसी के मोहताज नहीं हैं। हम अपना इतिहास खुद लिख सकते हैं।

साथ ही कहा कि न तो इतिहास को इतिहासकारों और न ही सरकारों द्वारा बनाया जा सकता है बल्कि यह सच्ची घटनाओं के आधार पर होनी चाहिए। गृह मंत्री अमित शाह ( Amit shah ) यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के लिए इन लड़ाइयों के बारे में लिखने की प्रक्रिया को कोई नहीं रोक सकता। शाह ने कहा कि इतिहास ( Indian History ) की नई किताबों के माध्यम से तथ्यों को सामने लाने का प्रयास "झूठ फैलाने वालों की तुलना में बड़ा और अधिक तीव्र" होना चाहिए ताकि यह "प्रभावी हो सके"।

अमित शाह ने ऐसा क्यों कहा?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ( Amit shah ) ने की मानें तो भारत के अधिकांश इतिहासकारों ने केवल मुगलों को ही इतिहास में प्रमुखता से जगह दी है। ऐसा करने के लिए उन्होंने कई महान साम्राज्यों जैसे पांड्य, चोल, मौर्य, गुप्त और अहोम आदि के शौर्य की अनदेखी की है। आक्रमणकारियों के खिलाफ भारतीय राजाओं द्वारा लड़े गए कई युद्धों को भुला दिए गए। एक हजार साल तक संस्कृति, भाषा और धर्म की रक्षा के लिए लड़ा गया युद्ध व्यर्थ नहीं गया है। असम में अहोम राजाओं और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में शिवाजी के नेतृत्व वाले मराठों द्वारा लड़ी गईं लड़ाइयों ने भारत को वह स्थान दिया है जहां वह अभी है। भारत में पांड्य शासन 800 साल रहा। अहोम राजाओं ने असम पर 650 साल शासन किया। अहोम राजाओं ने आक्रांता बख्तियार खिलजी, औरंगजेब तक को हराया और उन्हें असम की संप्रभुता से दूर रखा। पल्लव साम्राज्य 600 साल रहा। चोल राजाओं ने 600 साल शासन किया। मौर्य शासन ने अफगानिस्तान से लंका तक यानी पूरे भारत पर 550 साल तक शासन किया। सातवाहन ने 500 साल और गुप्त साम्राज्य ने 400 सालों तक शासन किया। गुप्त साम्राज्य के यशस्वी राजा समुद्रगुप्त ने पहली बार संयुक्त भारत की संकल्पना की थी। उन्होंने इस दिशा में पूरे साम्राज्य को बतौर एक देश स्थापित किया था। इसके बावजूद इतिहास की किताबों में इसका कोई उल्लेख तक नहीं है। शाह ने लेखकों और फिल्म निर्माताओं से सच्चाई को सामने लाने वाले तथ्यों पर काम करने का आग्रह किया है।

क्या करने का है इरादा?

देश के इतिहास ( Indian History ) के इन साम्राज्यों पर कोई संदर्भ पुस्तक नहीं है। इन साम्राज्यों पर संदर्भ पुस्तकें लिखी जानी चाहिए। अगर इन्हें लिखा जाता है तो जिसे हम अभी इतिहास मानते हैं वह धुंधला पड़ता जाएगा और सच उभरकर सबके सामने आएगा। इसके लिए बहुत से लोगों को काम शुरू करने की जरूरत है। इतिहास किसी की जीत-हार पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे उन घटनाओं के नतीजों के आधार पर आंकना चाहिए।

शाह के इस बयान से साफ है कि वामपंथी इतिहासकारों ने जिन पहलुओं की उपेक्षा की उसे फिर से इतिहास से जोड़ने की जरूरत है। उन तथ्यों को भी भारतीय इतिहास का हिस्सा बनाये जाएं जो किन्हीं कारणाों ने अभी तक इतिहास होते हुए भी उससे दूर रहे। उन वैचारिक पहलुओं को केंद्र में लाने का काम हो जिसे दक्षिणपंथी विचार मानकर अभी तक उपेक्षा हुई।

यहां पर सवाल यह है कि आखिर अमित शाह ( Amit shah ) करना क्या चाहते हैं, क्या वामपंथी इतिहास के फैक्ट बदलना चाहते हैं या केवल उन पहलुओं को इतिहास का हिस्सा बनाना चाहते हैं जो अभी तक इतिहास में विषयों में शामिल नहीं हैं। अगर इतिहास बदलने का मकसद उपेक्षित तथ्यों को जोड़ना है तो इसमें बहुत आपत्ति किसी को नहीं होनी चाहिए, लेकिन वापमंथी वैचारिक पहलुओं को इतिहास के पन्नों से हटाना सरकार का मकसद है तो उसे सही नहीं माना जा सकता। ऐसा इसलिए कि अगर शाह ऐसा बहुमत के दम पर करते हैं तो उन पर भी भविष्य में वही आरोप लगेगा, जो आरोप अभी तक दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग मध्यमार्गी और वामपंथी लेखकों पर लगाते आये हैं।

आरएसएस ( RSS ) और भाजपा ( BJp ) दोनों इस बात का आरोप लगाते रहे हैं कि इतिहास की किताबें वामपंथी इतिहासकारों द्वारा बनाई गई थीं जिन्होंने हिंदू राजाओं और राज्यों के योगदान को नजरअंदाज किया था। अपने संबोधन के दौरान शाह ने लेखकों और फिल्म निर्माताओं से "सच्चाई को सामने लाने" पर काम करने का आग्रह किया।


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