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यूपी चुनाव से पहले राम मंदिर जमीन घोटाला सामने आने के बाद विपक्ष आक्रामक-सत्ता रक्षात्मक, जानिए इनसाइड स्टोरी

Janjwar Desk
14 Jun 2021 1:02 PM GMT
यूपी चुनाव से पहले राम मंदिर जमीन घोटाला सामने आने के बाद विपक्ष आक्रामक-सत्ता रक्षात्मक, जानिए इनसाइड स्टोरी
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(प्रियंका गांधी ने कहा- करोड़ों लोगों ने आस्था और भक्ति के चलते भगवान के चरणों में चढ़ावा चढ़ाया। उस चंदे का दुरुपयोग अधर्म है, पाप है, उनकी आस्था का अपमान है।)

समाजवादी पार्टी के नेता पवन पाण्डेय कहते हैं कि खाली इसी जमीन की बात मैं नहीं कर रहा हूं। ट्रस्ट ने पूरे अयोध्या में जितनी जमीनें खरीदी हैं, उसकी जांच होनी चाहिए....

जनज्वार ब्यूरो/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रीराम मंदिर में हुआ घोटाला सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में घमासान छिड़ गया है। जिस कुसुम पाठक द्वारा 2 करोड़ रूपये की जमीन खरीदने की बात कही जा रही है, उसमें नई बात यह निकल कर सामने आ रही है कि कुसुम पाठक ने जमीन का बैनामा करवाया ही नहीं था।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा बागेश्वर की लगभग साढ़े 12 बीघा जमीन खरीदे जाने की बात सामने आ रही है। जमीन 2 करोड़ में खरीदी गई जिसके ठीक 10 मिनट बाद यही जमीन साढ़े 18 करोड़ में खरीदी गई। इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने ट्रस्ट पर भृष्टाचार का आरोप लगाया है। बागेश्वर की इस जमीन पर वक्फ बोर्ड के सदस्य ने कहा कि यह जमीन वक्फ बोर्ड की है जिसका अवैध तरीके से बैनामा किया गया है।

जमीन की खरीद-फरोख्त मामले से जुड़े एक शख्स के अनुसार, अयोध्या के बाग विलैसी में स्थित 180 बिस्वा यानी 12,080 वर्ग मीटर जमीन हरीश पाठक और कुसुम पाठक की थी। इसे उन्होंने सुल्तान अंसारी, रवि मोहन तिवारी, इच्छा राम, मनीष कुमार, रवींद्र कुमार, बलराम यादव सहित तीन अन्य के नाम 2019 में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कर दिया था। इस जमीन का सौदा 26.50 करोड़ रुपये में तय हुआ।

जमीन की सरकारी मालियत करीब 11 करोड़ रुपये आंकी गई थी। 2.80 करोड़ रुपये हरीश पाठक और कुसुम पाठक के खाते में ट्रांसफर कर 80 बिस्वा जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। बाकी 100 बिस्वा जमीन एग्रीमेंट धारकों ने अपनी सहमति से दो लोगों के नाम लिख दिया, जिनसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 18.50 करोड़ में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करवा लिया है।

वक्फ बोर्ड सदस्य मो. इकबाल के मुताबिक यह जमीन 1924 में हजीफ फकीर से खरीदी गई थी, जो इसके मुतलबी बने। उन्होने वैध तरीके से जमीन को अपने नाम करवा लिया। नूर आलम, जावेद आलम ने कुसुम पाठक के नाम से एग्रीमेन्ट किया फिर उन्ही के नाम से बैनामा कर दिया। इकबाल ने बताया कि हमारा मुकदमा वक्फ बोर्ड में चल रहा था। जब जमीन पर कमिश्नर स्टे था, इसके बावजूद बैनामा किया, तब जब यह सुल्तान अन्सारी को बेची गई। तब भी यह जमीन कुसुम पाठक के नाम से नहीं थी, इसका बैनामा टू बैनामा किया गया है।

वहीं पूर्व सीएम अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीन में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। सपा नेता का आरोप है कि 10 मिनट पहले 2 करोड़ में जमीन का बैनामा हुआ और उसी दिन फिर साढ़े 18 करोड़ में एग्रीमेंट हुआ। एग्रीमेंट और बैनामा दोनों में ही ट्रस्टी अनिल मिश्रा और अयोध्या नगर निगम के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह हैं।

उन्होंने सवाल पूछा है कि जिस जमीन को दो करोड़ रुपये में खरीदा गया, उसी जमीन का 10 मिनट बाद साढ़े 18 करोड़ में एग्रीमेंट क्यों हुआ? 5 मिनट में ही 2 करोड़ की जमीन साढ़े 18 करोड़ की कैसे हो गई? जमीन की कीमत कैसे बढ़ गया। पवन पांडेय ने कहा, 'सीबीआई जांच की मांग मैंने पहले भी की और अभी भी कर रहा हूं। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

केंद्र ने ट्रस्ट बनाया है और मामले की सीबीआई जांच करा ले। खाली इसी जमीन की बात मैं नहीं कर रहा हूं। ट्रस्ट ने पूरे अयोध्या में जितनी जमीनें खरीदी हैं, उसकी जांच होनी चाहिए। सारे तथ्यों की जांच हो और जो दोषी हैं उन पर कार्रवाई हो। ये तो 120 करोड़ लोगों की आस्था का सवाल है और लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है। मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं। मैं तो जांच की मांग कर रहा हूं। बैनामा सामने आया है, रजिस्टर्ड एफिडेविट सामने आया है। कागज के आधार पर मैं बात कर रहा हूं।'

समाजवादी पार्टी के नेता पवन पाण्डेय कहते हैं कि खाली इसी जमीन की बात मैं नहीं कर रहा हूं। ट्रस्ट ने पूरे अयोध्या में जितनी जमीनें खरीदी हैं, उसकी जांच होनी चाहिए। सारे तथ्यों की जांच हो और जो दोषी हैं उन पर कार्रवाई हो। ये तो 120 करोड़ लोगों की आस्था का सवाल है और लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि हम पर हमेशा आरोप लगते रहे हैं। हम आरोप लगने पर कोई चिंता नहीं करते, आप भी चिंता न करें। अभी कुछ नहीं कहना है। अभी मामले का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'सभी प्रकार की कोर्ट फीस और स्टैंप पेपर की खरीदारी ऑनलाइन हो रही है। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद अयोध्या में जमीन खरीदने के लिए देश से बहुत सारे लोग आने लगे।

यूपी सरकार भी अयोध्या के विकास के लिए काफी जमीन खरीद रही है। इस वजह से एकाएक अयोध्या में जमीनों के दाम बढ़ गए। जिस जमीन की चर्चा हो रही है वह रेलवे स्टेशन के पास प्रमुख स्थान है। ट्रस्ट ने जितनी भी जमीन खरीदी है वह खुले बाजार से काफी कम कीमत पर है। जमीन खरीदने के लिए वर्तमान विक्रेतागणों से वर्षों पूर्व जिस मूल्य पर एग्रीमेंट हुआ था उस जमीन को उन्होंने 18 मार्च 2021 को बैनामा कराया। इसके बाद ट्रस्ट के साथ एग्रीमेंट किया। समाज को गुमराह करने के लिए राजनीतिक लोग दुष्प्रचार कर रहे हैं।' इसके साथ ही चंपत राय ने कहा कि हम पर तो महात्मा गांधी की हत्या के भी आरोप लगे हैं। हम आरोपों से नहीं डरते, जो आरोप लगे हैं उसकी जांच करूंगा।

चंपत राय के राजनीतिक विद्वेष के आरोप पर पवन पांडेय ने कहा, 'मैं तो कह नहीं पाऊंगा कि सपा का कार्यकर्ता नहीं हूं। अगर चंपत राय जी इतने दूध के धुले हैं और हरिश्चंद्र हैं तो वह आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीबीआई जांच की मांग करते हुए पत्र लिख दें। मैं उनकी ईमानदारी और निष्ठा का स्वागत करूंगा। ये रजिस्ट्री, बैनामा या रजिस्टर्ड एग्रीमेंट है ये कोई समाजवादी पार्टी या पवन पांडेय के घर पर छपा हुआ दस्तावेज नहीं है। ये सरकारी दस्तावेज है। जिस जमीन का बैनामा पांच मिनट पहले 2 करोड़ में हुआ, वही रजिस्टर्ड एग्रीमेंट पांच मिनट बाद 18.5 करोड़ में हो रहा है।'

बैनामे और मंदिर ट्रस्ट के रजिस्टर्ड एग्रीमेंट में गवाह बने अयोध्या नगर निगम के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय का कहना है कि मैं तो तमाम मंदिरों के प्रॉपर्टी सेल में गवाह हूं, लेकिन डील विक्रेता और क्रेता के बीच होती है। उससे गवाह का कोई लेना-देना नहीं।

किस नेता ने क्या कहा

यूपी विधानसभा चुनाव आने से एक वर्ष पहले कथित घोटाला सामने आने के बाद सियासी बयानबाजियां भी शुरू हो गयी हैं। विपक्षी नेता आक्रामक हैं तो सत्ता समर्थक रक्षात्मक। प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा, करोड़ों लोगों ने आस्था और भक्ति के चलते भगवान के चरणों में चढ़ावा चढ़ाया। उस चंदे का दुरुपयोग अधर्म है, पाप है, उनकी आस्था का अपमान है। वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी ट्वीट कर निशाना साधा। उन्होंने लिखा- '2 करोड़ की जमीन 18 करोड़ में कैसे बेची?' हे राम, ये कैसे दिन...आपके नाम पर चंदे लेकर घोटाले हो रहे है। बेशर्म लुटेरे अब आस्था बेच 'रावण' से अहंकार में मदमस्त हैं। सवाल है कि 2 करोड़ में ख़रीदी ज़मीन 10 मिनट बाद 'राम जन्मभूमि'को 18.50 करोड़ में कैसे बेची? अब तो लगता है कंसो का ही राज है, रावण हैं चहुँ ओर !'

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर ने भी सवाल उठाते हुए कहा, 'अयोध्या में एक जमीन 18 मार्च को 2 करोड़ में खरीदी गई। वही जमीन 18 मार्च को ही 5 मिनट बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने 18.50 करोड़ मे खरीद ली। दोनों जगह गवाह वही हैं। 16 करोड़ का घोटाला। इससे पहले भी निर्मोही अखाड़ा ने विश्व हिंदू परिषद पर 1400 करोड़ घोटाला करने का आरोप लगाया है, मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र हो सकता है पर बीजेपी/आरएसएस के लिए व्यापार का जरिया है। इस जमीन घोटाले से करोड़ों भक्तों के आस्था से खिलवाड़ हुआ है । मोदी जी और योगी जी बताए कब होगा इन ट्रस्टी लोगों पर मुकदमा? कब गिरफ्तार कर भेजे जाएंगे ये लोग जेल?'

वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने इस मामले पर कहा, जिनके हाथ खून से सने हो, वे सलाह न दें' जिनके हाथ राम भक्तों के खून से रंगे हैं, वे लोग सलाह न दें, जिसने गड़बड़ किया होगा, ट्रस्ट उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा। जो लोग दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। राम लला के भव्य मंदिर का निर्माण होगा। सलाहकार न बनें, जो वहां साधु-संत हैं उन्हें यकीन है कि ट्रस्ट कार्रवाई करेगा।

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