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किसान बिल के विरोध में 'बिहार बंद' के दौरान पटना में भिड़े भाजपा-जाप कार्यकर्ता, जमकर चले लाठी-डंडे

Janjwar Desk
25 Sep 2020 12:04 PM GMT
किसान बिल के विरोध में बिहार बंद के दौरान पटना में भिड़े भाजपा-जाप कार्यकर्ता, जमकर चले लाठी-डंडे
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पप्पू यादव ने कहा, "बिहार बंद के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं की गुंडागंर्दी दिखी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जाप के कार्यकर्ताओं पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने हमला किया....

पटना, जनज्वार। बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पटना की सड़कों पर दो राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जन अधिकार पार्टी (जाप) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और जमकर लाठी डंडे चले।

इस दौरान भाजपा कार्यालय के सामने की सड़क रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। भाजपा के नेताओं का कहना है कि पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ता कृषि सुधार से जुड़े विधेयकों का विरोध करते हुए सडकों पर उतरे थे। इसी दौरान वे भाजपा के प्रदेश कार्यालय में दाखिल होने की कोशिश करने लगे, जिसका भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। धीरे-धीरे इस विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया।

आरोप है कि इसके बाद भाजपा के कार्यकर्ताओं ने लाठी डंडों से जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं की पिटाई शुरू कर दी। इस दौरान सड़क रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। किसी तरह मामला शांत करवाया गया।

कई किसान संगठनों ने कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार 25 सितंबर को 'भारत बंद' का आह्वान किया था, जिसका बिहार में विपक्षी दलों ने भी समर्थन दिया।

इधर, भारतीय जनता पार्टी (भजपा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि किसानों का शोषण कर अपनी राजनीति चमकाने वाले दल और उनके समर्थकों के प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर हमला कर कायरता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि बिचौलियों की इस करतूत की जितनी निंदा की जाय कम होगी। इसका जवाब अगले माह होने वाले विधानसभा के चुनाव में राज्य के किसान देंगे।

इधर, जाप के प्रमुख पप्पू यादव ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर गुंडगर्दी करने का आरोप लगाया है। पप्पू यादव ने कहा, "बिहार बंद के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं की गुंडागंर्दी दिखी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जाप के कार्यकर्ताओं पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने हमला किया, जिसमें जाप के कुछ सदस्य चोटिल हो गए।"

यादव ने कहा कि, पूंजीपतियों की समर्थक भाजपा किसानों की आवाज को दबाना चाहती है और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है।

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