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मुंह में चांदी का चम्मच लिए युवा नेताओं का नेतृत्व बिहार चुनाव पर कितना डाल पाएगा असर?

Janjwar Team
6 Jun 2020 11:16 AM GMT
मुंह में चांदी का चम्मच लिए युवा नेताओं का नेतृत्व बिहार चुनाव पर कितना डाल पाएगा असर?
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तेजस्वी ने विपरीत स्थितियों में पार्टी की कमान संभाली थी। पिता लालू प्रसाद जेल में थे। पार्टी के बड़े नेताओं की निष्क्रियता, पार्टी के कई स्थापित नेताओं का पाला बदलना, परिवार में खींचतान और पारिवारिक विवादों को तेजस्वी ने अबतक अच्छे तरीके से हैंडल कर अपनी योग्यता और राजनैतिक मैच्योरिटी का लोहा मनवा चुके हैं।

पटना से राजेश पांडेय की रिपोर्ट

जनज्वार। बिहार की राजनीति में पिता की राजनैतिक विरासत संभालने के पूर्व में भी कई उदाहरण हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्र बिहार में मंत्री रह चुके हैं। एक और पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के पुत्र कीर्ति झा आजाद सांसद रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं, अभी जदयू कोटे से राज्यसभा सांसद हैं। पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिन्हा की पुत्री सुचित्रा सिन्हा भी बिहार में मंत्री रह चुकीं हैं लेकिन आज चर्चा बिहार के बड़े राजनेताओं के उन युवा पुत्रों की करेंगे, जो पिता की विरासत संभाल रहे हैं और बिहार का भविष्य माने जा रहे हैं। इन युवा नेताओं में से कुछ ने अपनी पहचान स्थापित कर ली है तो कुछ पहचान बनाने की रेस में हैं।

भी पिता की विरासत संभाल रहे राजनेता पुत्रों में सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के छोटे पुत्र तेजस्वी यादव का माना जा रहा है। तेजस्वी एक तरह से राष्ट्रीय जनता दल के अघोषित सुप्रीमो हैं। तेजस्वी ने विपरीत स्थितियों में पार्टी की कमान संभाली थी। पिता लालू प्रसाद जेल में थे। लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद पार्टी के बड़े नेताओं की निष्क्रियता, पार्टी के कई स्थापित नेताओं का पाला बदलना, परिवार में खींचतान और कई तरह के पारिवारिक विवादों को तेजस्वी ने अबतक अच्छे तरीके से हैंडल कर अपनी योग्यता और राजनैतिक मैच्योरिटी का लोहा मनवा चुके हैं।

8 नवंबर 1989 को जन्मे 31 वर्षीय तेजस्वी यादव एक क्रिकेटर भी रहे हैं और आईपीएल में देल्ही डेयरडेविल्स टीम का हिस्सा रह चुके हैं। पिता लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद वे वर्ष 2015 में क्रिकेट छोड़ राजनीति में आए। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान वे राजनीति में सक्रिय हुए और बिहार के राघोपुर से चुनाव लड़ा।

राघोपुर से पिता लालू प्रसाद और माता राबड़ी देवी भी विधायक रह चुके हैं। उसी चुनाव में तेजस्वी भी पहली बार विधायक बने। उस चुनाव में राजद-जदयू की सरकार बनी और 20 नवंबर 2015 को उन्होंने बिहार के चौथे उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया। 26 जुलाई 2017 तक वे उपमुख्यमंत्री रहे और बिहार में राजद-जदयू सरकार के गिरने के बाद उन्हें भी उपमुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा। तेजस्वी यादव वर्तमान में बिहार विधानसभा में राजद विधायक दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष हैं। इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का सक्रियता से नेतृत्व कर रहे हैं और मुद्दों को लेकर काफी मुखर हैं। आगामी चुनाव में अगर उनके गठबंधन की सरकार बनी तो वे मुख्यमंत्री पद के सबसे सबल दावेदार माने जा रहे हैं।

स लिस्ट में दूसरा बड़ा नाम लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान का है। 37 वर्षीय चिराग पासवान का जन्म 31 अक्टूबर 1982 को हुआ था।वर्ष 2014 में बिहार के जमुई से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर पहली बार लोकसभा संसद बने थे।

र्ष 2019 में जमुई से ही लगातार दूसरी बार सांसद बने। अभी कई संसदीय कमिटियों में हैं।चिराग पासवान ने पहले बतौर अभिनेता अपना कैरियर शुरू किया। बॉलीवुड में उनकी पहली और एकमात्र फ़िल्म 'मिले न हम तुम' थी। वर्ष 2011 में प्रदर्शित हुई यह फ़िल्म तनवीर खान की थी। मशहूर अभिनेत्री कंगना रनौत इस फ़िल्म में मुख्य अभिनेत्री थीं। लेकिन यह फ़िल्म पिट गयी। इसके बाद चिराग ने राजनीति का रुख किया। उस दौर में पिता रामविलास पासवान 'लोक जनशक्ति पार्टी' के नाम से राजनैतिक दल की स्थापना कर चुके थे।

लोकसभा चुनाव आने वाले थे और वे निर्णय नहीं कर पा रहे थे कि एनडीए के साथ जाएं या यूपीए के साथ। माना जाता है कि तब चिराग ने ही उन्हें एनडीए के साथ जाने का सुझाव दिया था। यह सुझाव हिट कर गया और साथ ही चिराग भी।अभी चिराग लोजपा के सुप्रीमो बना दिए गए हैं और आगे के विधानसभा चुनाव में लोजपा उन्हीं के नेतृत्व में मैदान में उतरने वाली है। उनके समर्थक उन्हें भी भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देख रहे हैं।

स सूची में तीसरा नाम फिर से लालू परिवार के लाल का ही है। लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव यूं तो अपने अलग स्टाइल और अलग तरह के कार्यों से हमेशा सुर्खियीं में रहे है लेकिन अब राजनीति में भी उन्हें गंभीरता से लिया जाने लगा है। खासकर राजद के छात्र विंग पर उनकी पकड़ के कारण। वे खुद को कृष्ण और छोटे भाई तेजस्वी को अर्जुन बताते हैं और उनका साथ भी देते हैं।

हालांकि उत्तराधिकार को लेकर विवाद भी दबी जुबान से जबतब बाहर आती है, पर वे हमेशा इससे इनकार करते रहे हैं। 31 वर्षीय तेजप्रताप यादव वर्ष 2015 में पहली बार बिहार के महुआ से विधायक बने थे। तत्कालीन राजद-जदयू की सरकार में उन्हें स्वास्थ्य महकमे जैसा बड़ा पोर्टफोलियो मिला था। वर्ष 2019 में दूसरी बार भी वे महुआ से ही विधायक बने। इन्हें भी इनके समर्थक भविष्य के बड़े नेता के तौर पर देखते हैं।

सूची में चौथा नाम फिर रामविलास पासवान के परिवार से ही है। ये हैं रामविलास पासवान के अनुज रामचंद्र पासवान के पुत्र प्रिंस राज। 30 वर्षीय प्रिंस राज का जन्म 7 जुलाई 1989 को हुआ था। लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर प्रिंस राज पहली बार बिहार के समस्तीपुर से लोकसभा सांसद चुने गए। उसके बाद चाचा पशुपति नाथ पारस के स्थान पर उन्हें लोक जनशक्ति पार्टी का बिहार प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। प्रिंस राज अच्छे वक्ता माने जाते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त प्रिंस ने विदेश में पढ़ाई की है। प्रिंस के समर्थक भी उन्हें बिहार के बड़े नेता के तौर पर देख रहे हैं।

पांचवा नाम पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र सन्तोष कुमार सुमन का है। जीतनराम मांझी ने जब जदयू से अलग होकर 'हम' पार्टी बनाई, तब से सन्तोष कुमार सुमन सक्रिय राजनीति में हैं। पिता के साथ 'हम' पार्टी को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। इस बीच राजद के सहयोग से विधान परिषद में कदम भी रख चुके हैं। अभी पार्टी संगठन की कमान संभाले हुए हैं। 'हम' पार्टी के लोग इन्हें भविष्य के बड़े नेता के तौर पर देख रहे हैं। जाहिर है कि बिहार के बड़े राजनेताओं की दूसरी पीढ़ी अब कमान संभालने को तैयार है। इस पीढ़ी के नेता भी अब राजनीति के गुर सीख चुके हैं और अपनी पारी खेलने को तैयार हैं।

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