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बिहार

24 लाख हैं बाढ़ पीड़ित, राहत कैंप और सामुदायिक किचेन सिर्फ साढ़े 4 लाख के लिए

Janjwar Desk
28 July 2020 8:23 AM GMT
24 लाख हैं बाढ़ पीड़ित, राहत कैंप और सामुदायिक किचेन सिर्फ साढ़े 4 लाख के लिए
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बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात भयावह हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भी महज एक चौथाई पीड़ितों तक ही राहत कैंपों और सामुदायिक किचेन का लाभ पहुंच पा रहा है।

जनज्वार ब्यूरो, पटना। बिहार में बाढ़ से तबाही मची हुई है। बाढ़ से 11 जिलों में लाखों की आबादी प्रभावित है। काफी संख्या में लोग जहां-तहां फंसे हुए हैं। कोरोना और बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत देने की जिनपर जिम्मेदारी है, वे भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। कहीं अस्पताल पानी में डूबे हुए हैं तो कहीं थाने तो कहीं प्रखंड कार्यालय। सरकार लाख दावे करे, पर धरातल पर ये दावे नजर नहीं आ रहे। दरभंगा का कुशेश्वरस्थान थाना बाढ़ में डूबा है, पर यहां की पुलिस को गश्ती करने के लिए अपने पैसे से नाव का इंतजाम करना पड़ रहा है।

दरभंगा में थाना डूबा, चारों ओर घूम रहे हैं सांप

दरभंगा में भी बाढ़ के कारण विकट स्थिति है। यहां के 14 प्रखंडों के 154 पंचायत बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। इस बीच दरभंगा का कुशेश्वरस्थान थाना भी बाढ़ में डूब गया है। आसपास के इलाके भी डूबे हुए हैं। थाना में पानी घुसने से पुलिसकर्मियों के सामने विकट स्थिति हो गई है। बाढ़ के पानी में बहकर जहरीले सांप भी थाने में आ जा रहे हैं। पुकिसकर्मी ऊंची टेबल पर रखकर किसी तरह कागजातों को बचा रहे हैं।

नहीं मिली सरकारी नाव, खुद के पैसे से नाव का इंतजाम कर लगा रहे गश्त

थाना के ASI ने कहा 'हमने सारा सामान टेबल पर रखा हुआ है, ताकि वे पानी में बह न जाएं। हम ग्रामीण क्षेत्रों में नाव से पेट्रोलिंग कर रहे हैं, पर सरकार द्वारा हमें अबतक नाव उपलब्ध नहीं कराया गया है। हम अपने खर्च से नाव मंगा कर उससे गश्त कर रहे हैं।'

ऐसे में सहज कल्पना की जा सकती है कि जब थाने को नाव नहीं मिल रही तो आम लोगों की क्या हालत होगी। बाढ़ में लोग फंसे हैं, मदद की गुहार लगा रहे हैं, पर जरूरी मदद उन्हें नहीं मिल पा रही।

24 लाख की आबादी है पीड़ित, महज साढ़े 4 लाख लोगों की राहत तक पहुंच

खुद सरकारी आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में बाढ़ से 24 लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित है, पर राहत कैंप सिर्फ 29 ही चलाए जा रहे हैं। इस आंकड़े के अनुसार इन 29 राहत कैंपों में 1 लाख 28 हजार लोग शरण लिए हुए हैं। वहीं 703 सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं, जिनमें 3 लाख 28 हजार लोग भोजन कर रहे हैं। मतलब लगभग 4 लाख 60 हजार लोग सरकारी स्तर के राहत कैंपों में रह रहे हैं या इन्हें भोजन दिया जा रहा है, पर बाढ़ से प्रभावित लोगों का आंकड़ा 24 लाख से ज्यादा है।

कई जगह टूट चुके हैं तटबंध तो कई जगह डायवर्सन बहे

बाढ़ से गोपालगंज में गंडक नदी का सारण तटबंध कई जगह से टूट गया है। इसके बाद गोपालगंज के बरौली, मांझा प्रखंडों के सैकड़ों गांवों में तबाही का आलम है। कई गांवों में छतों तक पानी चढ़ गया था। हालांकि फिलहाल गंडक के जलस्तर में कमी से थोड़ी राहत है। पूर्वी चंपारण जिला में गंडक नदी पर बना चंपारण बांध भी टूट चुका है। इससे भी भारी तबाही मची थी। इसके अलावा विभिन्न जिलों में कई डायवर्सन ध्वस्त हो चुके हैं।

सेना के तीन हेलिकॉप्टर गिरा रहे फूड पैकेट, NDRF की 25 टीमें तैनात

बाढ़ प्रभावित इलाकों में विगत शनिवार से सेना के तीन हेलीकॉप्टरों द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच फूड पैकेट गिराए जा रहे हैं। ये हेलिकॉप्टर गोपालगंज, मोतिहारी और दरभंगा के प्रभावित इलाकों में फूड पैकेट गिरा रहे हैं। वहीं राहत और बचाव के लिए NDRF की 25 टीमें लगाई गईं हैं। हालांकि प्रभावितों की संख्या को देखते हुए राहत और बचाव में लगी NDRF की 25 टीमें कम पड़ जा रहीं हैं। लोगों की शिकायत है कि फंसे लोगों तक टीमें समय से नहीं पहुंच पा रहीं हैं। लोग और ज्यादा संख्या में टीम तैनात किए जाने की मांग कर रहे हैं।

11 जिलों के 93 प्रखंडों के 765 पंचायत हैं बाढ़ से प्रभावित

बिहार के 11 जिलों की 24 लाख 42 हजार की आबादी बाढ़ का प्रकोप झेल रही है। राज्य आपदा विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार इन 11 जिलों के 93 प्रखंडों के 765 पंचायत बाढ़ से प्रभावित हैं।

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