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बिहार

सर्वे : 64.6 प्रतिशत दलित परिवारों को लाॅकडाउन में रहना पड़ा भूखा, मात्र 2.3 प्रतिशत के पास पर्याप्त अनाज

Janjwar Desk
5 July 2020 12:40 PM GMT
सर्वे : 64.6 प्रतिशत दलित परिवारों को लाॅकडाउन में रहना पड़ा भूखा, मात्र 2.3 प्रतिशत के पास पर्याप्त अनाज
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प्रतीकात्मक फोटो.

बिहार में दलित आदिवासी परिवारों के बीच किए गए एक सर्वे में लाॅकडाउन पीरियड में उनके सामने खाद्यान्न संकट का खुलासा हुआ है। इस सर्वे में कई तथ्य सामने आए हैं...

जनज्वार, पटना। दलित अधिकार के लिए गठबंधन के बिहार के प्रतिनिधियों ने प्रेसवार्ता कर लाॅकडाउन की अवधि में दलितों एवं आदिवासियों की आर्थिक स्थिति पर शोध पत्र की प्रस्तुति की। यह शोध पत्र 14 जिले के 28 प्रखंडों की 56 पंचायतों के 112 गांव के 1400 परिवारों का सर्वे कर तैयार किया गया है। एक गांव में 12.5 परिवारों का सर्वे किया गया।

प्रेसवार्ता में उपस्थित पद्श्री सुधा वर्गीज, फादर अंटो, गजेंद्र मांझी, कपिलेश्वर राम, विधानंद राम, महेन्द्र रौशन आदि गठबंधन के नेताओं ने कहा कि लाॅकडाउन के अंतर्गत दलितों एवं आदिवासियों की भूख एवं आर्थिक स्थिति की जानकारी लेने के लिए बिहार के 14 जिले के 28 प्रखंड की 56 पंचायतों के 112 गांव के 1400 परिवारों के खाद्यान्न जरूरतों व रोजगार एवं सरकारी योजनाओं के संदर्भ में यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

इनमें से मात्र 2.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हमलोगों के पास पर्याप्त भोजन के लिए अनाज है। 18.6 प्रतिशत लोगों ने कहा हमलोगों के पास दो माह के लिए अनाज था। 14.6 प्रतिशत परिवार के सदस्यों ने कहा एक माह का अनाज है। 45.5 प्रतिशत परिवार के सदस्यों ने कहा कि कुछ दिन के लिए अनाज है। 15.5 प्रतिशत परिवार के सदस्यों ने कहा कि बिल्कुल अनाज नहीं है। कुछ परिवार के सदस्यों ने कहा कुछ-.कुछ अनाज है। इससे कुछ दिन किसी तरह न्यूनतम भोजन कर सकते हैं।

भुखमरी की स्थिति

84.4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भोजन की दिक्कत है। 64.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अनाज की अभाव मे भूखा रहना पड़ा। 75.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भोजन मे कटौती कर जीवन यापन किया। 82 प्रतिशत ग्रामीण लोगों ने कहा कि अनाज उधार व पइंचा लेना पड़ा। 84 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कि अनाज खरीदने के लिए नगद राशि उधार या कर्ज ली। 46.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान भोजन की काफी दिक्कत हुई।

सरकार की योजनाओं की लाभ की स्थिति

अप्रैल और मई माह में 66 प्रतिशत लोगों ने कहा कि राशन नहीं मिला। 40 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अप्रैल और मई में मुफ्त राशन नहीं मिला। 46 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित 1000 रुपये बैंको में नहीं मिला। 81 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि अप्रैल और मई माह में छात्रवृत्ति का कोई पैसा नहीं मिला। 60 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि जनधन योजना की 500 रुपये की राशि नहीं मिली। 93 प्रतिशत जाॅब कार्डधारी ने कहा कि अप्रैल और मई में किसी तरह का काम नहीं मिला। 92 प्रतिशत लोगों ने कहा लाॅकडाउन में अप्रैल और मई मे किसी तरह का आंगनबाड़ी केंद्र पर किसी तरह का योजना का लाभ नहीं मिला।

रकार से क्या है मांग

76.4 प्रतिशत लोगों ने सरकार से रोजगार की मांग की है।

16.7 प्रतिशत लोगों ने भोजन के संरक्षण की मांग की।

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